इतिहास के पन्नों से- मोदी की पाक यात्रा और पाक पीएम का बंगला
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। आज जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान की यात्रा करने का पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से वादा किया तब राजधानी दिल्ली के तिलक मार्ग पर पड़ोसी मुल्क के पहले वजीरे आजम लियाकत अली खान का भव्य बंगला भिग रहा था बारिश में। देश के विभाजन से पहले तिलक मार्ग वाले बंगले में लियाकत अली खान रहते थे अपनी पत्नी गुले-ए- राना के साथ। दोनों दिल्ली के सामाजिक जीवन की शान थे।
शिखर नेता
खान साहब मुस्लिम लीग के शिखर नेता थे। आप उन्हें मुस्लिम लीग का जिन्ना के बाद दूसरे नंबर का सबसे बड़ा नेता कह सकते हैं। गुले-ए-राना कुमाऊं के एक कुलीन ब्राहामण परिवार से थीं। उनके परिवार ने ईसाई मजहब को स्वीकार कर लिया था।
अहम बैठकें
खान साहब के तिलक मार्ग वाले घर में मुस्लिम लीग की अहम बैठकें होती थीं। इस रोड को पहले हार्डिंग रोड भी कहते थे। लियाकत अली खान की करनाल और मुजफ्फरनगर में बहुत अचल संपत्ति थे। वे बैरिस्टर थे। पत्नी राजधानी के आई.पी.कालेज में अंग्रेजी पढ़ाती थी।
जब कराची गईं
कहते हैं कि गुले-ए-राना देश के विभाजन के वक्त आई पी कालेज मैनेजमेंट से अवकाश लेकर कराची गईं। उन्हें यकीन नहीं था कि पाकिस्तान सच में बना रहेगा। उन्हें लगता था कि वह कुछ समय के बाद दिल्ली वापस लौट आएंगी। उन्होंने 40 के दशक में दिल्ली में शराबबंदी को लेकर कई बार प्रदर्शन भी किए।
एंग्लो अराबिक स्कूल
उधर, लियाकत अली खान दिल्ली के तारीखी एंग्लो अराबिक स्कूल के मैनेजमेंट भी रहे। इस स्कूल में निर्धन परिवारों के मुसलमान बच्चे पढ़ते हैं। खान साहब 1946 में बनी अंतरिम सरकार में फाइनेंस मिनिस्टर भी थे। अंतरिम सरकार के मुखिया जवाहर लाल नेहरु थे।
इंडिया गेट के करीब
खान साहब के बंगले पर फिर लौटते हैं। ये इंडिया गेट से पांच मिनट की दूसरी पर है। बंगले में अब पाकिस्तान के दिल्ली में हाई कमिश्नर रहते हैं। पर दिल्ली वालों के लिए ये बंगला लियाकत अली खान का ही बना हुआ है। बंगले के परिसर में बहुत से पेड़-पौधे लगे हैं। इसके ठीक आगे सुप्रीम कोर्ट है। बता दें कि लियाकत अली खान की 1951 में रावलपिंडी में हत्या कर दी गई थी जब वे एक सभा को संबोधित करने वाले थे। उनकी हत्या की गुत्थी कभी हल नहीं हुई।













Click it and Unblock the Notifications