पर्यटन सत्र शुरू, लेकिन आगरा के होटल मायूस
आगरा | रुपये में डॉलर के मुकाबले गिरावट के चलते ताज शहर आगरा के पर्यटन में तेजी आनी चाहिए थी, लेकिन सीरिया जैसे अंतर्राष्ट्रीय संकट तथा कई अन्य कारण से आगरा के होटलों में मायूसी छाई हुई है। पर्यटन सत्र यहां आम तौर पर 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस से शुरू होता है। फेडरेशन ऑफ ट्रैवल एजेंसी के अध्यक्ष राजीव तिवारी ने आईएएनएस से कहा, "यमुना एक्सप्रेसवे के खुलने के कारण ताजमहल आने वालों की संख्या बढ़नी चाहिए थी, क्योंकि इसके कारण लोग एक ही दिन में आगरा आकर यहां से लौट सकते हैं, लेकिन रात में रुकने की समस्या आगरा के होटलों के सामने बनी हुई है।"
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और आगरा विकास प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक ताजमहल देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले साल यहां 60 लाख पर्यटक पहुंचे थे। यह संख्या और भी काफी बढ़ सकती है अगर 15 वर्ष से कम उम्र के पर्यटकों को भी जोड़ दें। 15 वर्ष से कम उम्र के पर्यटकों को टिकट के लिए शुल्क नहीं चुकाना पड़ता है।

उन्होंने कहा, "कई लोग कहा करते हैं कि आगरा में नाइट लाइफ नहीं है, इसलिए लोग यहां रात में नहीं ठहरते हैं। लेकिन नाइट लाइफ से यदि उनका मतलब उन गतिविधियों को बढ़ावा देने से है, जो थाईलैंड के पटाया या फुकेट में होती है, तो हम निश्चित रूप से संस्कृति, स्थापत्य और इतिहास की अपनी थाती बेच कर खुश हैं।" तिवारी ने कहा, "हमारे पास योग, नृत्य और खान-पान है। हमारे पास स्वच्छ पर्यावरण अनुकूल पर्यटन है। हमारा धार्मिक पर्यटन बढ़ रहा है और पूरे ब्रज क्षेत्र में घरेलू पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।"
आगरा होटल्स एंड रेस्तरां एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संदीप अरोड़ा ने कहा, "विदेशी सैलानियों के लिए अधिक प्रवेश शुल्क (750 रुपये/12 डॉलर) एक बड़ी बाधा है। यदि पर्यटक एक बार ताज देख लेता है, तो वह दोबारा नहीं देखना चाहता है, क्योंकि उसे फिर से 750 रुपये खर्च करने होंगे। पहले यह स्थिति नहीं थी।"
अरोड़ा ने कहा कि सीरिया संकट के कारण आगरा का पर्यटन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि संकट का समाधान होने तक बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी बाहर नहीं निकलना चाह रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगरा से जयपुर को जोड़ने वाली नई रेलगाड़ी के कारण भी पर्यटन प्रभावित हो रहा है, क्योंकि पर्यटक शाम में जयपुर निकल लेते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की पर्यटन रणनीति बेहतर है, जबकि उत्तर प्रदेश की पर्यटन रणनीति दिशाहीन है। आगरा में काफी कुछ है लेकिन कोई विपणन रणनीति नहीं है।












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