भारत-पाक के बीच 1965 में हुई जंग की 15 वजहें
बैंगलोर। भारत-पाकिस्तान की 1965 की जंग कई मायनों में न सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्तान के लिए भी खास थी। इस युद्ध के साथ पाक यह बात समझ में आ गई थी कि अगर उसने कश्मीर को हासिल करने की कोई हिमाकत भी की तो भारत की सेना उसे मुंहतोड़ और करारा जवाब देगी, भले ही उसके साथ अमेरिका जैसी सुपरपावर खड़ी हों। पाक को 65 में सिखाया गया सबक आज तक नहीं भूला है। तभी तो अब उसने कश्मीर में आतंकी वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया है।

तब भी कश्मीर ही था पाक का सपना
आज से 50 वर्ष पहले भी पाक यही सपना देखता था कि वह भारत से कश्मीर को हासिल कर लेगा। लेकिन कश्मीर को हासिल करना पाक के लिए न तब आसान था और न अब और न ही कभी रहेगा। एक नजर डालिए इस युद्ध की शुरुआत की कुछ खास वजहों पर।
- 65 का युद्ध के पीछे भी दरअसल उस समय पाक की मंशा कश्मीर को अपने हिस्से में लेने की थी।
- कच्छ सीमा विवाद पर ब्रिटेन के हस्तक्षेप के बाद पाक को यह सपना काफी आसान लगने लगा था।
- जनरल अयूब खान के नेतृत्व में पाक मानने लगा था कि वह भारतीय सेना को काबू में कर सकेगा।
- उस समय तनाव की स्थिति को सोवियत यूनियन और अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद सुलझाया जा सका था।
- ताशकंद डिक्लेयरेशन के बाद दोनों के बीच सीजफायर कायम हो सका था।
- विशेषज्ञों की मानें तो पाक कहीं न कहीं इससे खुश नहीं था।
- उस समय तक अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश पाक के लिए सहानुभूति रखते थे।
- पाक इस सहानुभूति का फायदा भी उठाना चाहता था।
- वहीं भारत वर्ष 1962 में चीन के साथ युद्ध की वजह से भी कमजोर हो चुका था।
- पाक इस बात पर यकीन करता था कि कश्मीर की जनता भारतीय शासन के खिलाफ है।
- ऐसे में वह कश्मीर में एक आंदोलन की शुरुआत करने को बेकरार था।
- पाक ने कश्मीर में आंदोलन छेड़ने के मकसद से 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' की शुरुआत की थी।
- लेकिन कश्मीर की जनता ने उस समय भी वहां पर मौजूद घुसपैठियों के बारे में जानकारी दी।
- इसके आधार पर सेना ने कार्रवाई शुरू की और युद्ध की शुरुआत हुई।
- भारतीय सेना ने इस युद्ध पर विजय पाकर इस ऑपरेशन को खत्म किया।












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