कौन थे रविंद्र कौशिक? सलमान खान जिनपर बना रहे थे बायोपिक, अब पता चला क्यों नहीं बन पाई फिल्म
Who Is Ravindra Kaushik: कुछ समय से फिल्म इंडस्ट्री में बायोपिक बनने का चलन शुरु हुआ। इस यज्ञ में कई सितारों ने आहुति दी। इसी बीच साल 2021 में खबर आई कि सलमान खान एक बायोपिक पर काम करने जा रहे हैं। जो ब्लैक टाइगर के नाम से पहचाने जाने वाले जासूस पर आधारित होगी। जिसका असली नाम रविंद्र कौशिक है। ये उस समय की बात है जब सलमान अपनी फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' की शूटिंग कर रहे थे।
2021 के ठीक एक साल बाद 2022 में खबरें आती हैं कि अब ब्लैक टाइगर नहीं बन रही है। वजह क्या थी, तब सामने नहीं आई। लेकिन अब जानकारी मिली है कि आखिर सलमान के साथ वो फिल्म क्यों नहीं बन पाई। इस रिपोर्ट में जानिए फिल्म न बन पाने का असली कारण।

फिल्म ब्लैक टाइगर को रेड और आमिर जैसी फिल्म बनाने वाले डायेरक्टर राज कुमार गुप्ता बना रहे थे। उन्होंने PTI से बात करते हुए कहा, मैं अतुल अग्निहोत्री और अलविरा (सलमान खान की बहन और जीजा) के साथ फिल्म बना रहा था। सलमान खान के साथ भी रविंद्र कौशिक की बायोपिक पर बातचीत चल रही थी। उसके राइट्स मेरे पास थे। लेकिन वो कुछ दिनों बाद एक्सपायर हो गए। फिर मैं उसे रीन्यू भी नहीं करवा पाया। जिस वजह से वो फिल्म नहीं बनाई पाई। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उस समय सलमान टाइगर नाम के किरदार को निभा चुके थे। इसलिए वो दूसरी फिल्म इसी नाम से नहीं करना चाहते थे।
कौन थे ब्लैक टाइगर
ब्लैक टाइगर का नाम रविंद्र कौशिक था। वो भारत के सबसे उम्दा जासूस माने जाते हैं। रविंद्र के भाई राजेश्वरनाथ ने एक इंटरव्यू में उनके रॉ में शामिल होने के बारे में बताया था। उन्होंने कहा, रविंद्र को रॉ के कुछ अफसरों ने लखनऊ के कॉलेज में देखा। तब वो इंटर-कॉलेज में नाटक में एक रोल कर रहे थे। इसमें उनका किरदार भारतीय सेना के अफसर का था। जो चीन की सेना के गिरफ्त में था, फिर भी वो भारत को जानकारी दे रहा था। रॉ के अफसर इसी रोल से इंप्रेस हो गए और रविंद्र को दिल्ली बुलाया। फिर शुरू हुई उनकी दो साल की ट्रेनिंग। बाद में रविंद्र का खतना करवा दिया गया, ताकि वो खुद को मुस्लिम बता सकें। 1975 में वो 23 साल के थे, तभी उन्हें सरहद पार कर पाकिस्तान भेज दिया गया।
रविंद्र ने कराची पहुंच यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और LLB की पढ़ाई की। इसके बाद वो पाकिस्तानी सेना में शामिल हो गए। काम को देखते हुए उन्हें कुछ सालों में ही प्रमोशन मिल गया। सेना में रहते हुए उन्होंने भारत में कई खूफिया जानकारी दी, जिससे हजारों भारतीयों की जान बच पाई। लेकिन 1983 में रविंद्र को पाकिस्तान आर्मी ने पकड़ लिया। जिसके बाद उन्हें टॉर्चर किया गया और 1985 में उन्हें सजा-ए-मौत दी गई। जिसे वहां की सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया। 2001 में उनकी वहीं जेल में उनकी मृत्यु हो गई।
रविंद्र की कहानी ही खूब थ्रिलिंग लग रही है। अगर इस पर कोई फिल्म बनती है तो वो और भी थ्रिल हो सकती है। हालांकि अभी तक तो रविंद्र के जीवन पर कोई फिल्म नहीं बन पाई। देखना है कि आगे कभी उनकी बायोपिक बन पाती है या नहीं।












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