कंगना रनौत के बचाव में उतरी ये एक्ट्रेस, कहा- '2014 के बाद से ही तो हम खुलकर...'

अपने बयान को लेकर पहली बार कंगना रनौत को बॉलीवुड से समर्थन मिला है।

नई दिल्ली, 13 नवंबर: बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के उस बयान को लेकर खड़ा हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को 1947 में मिली आजादी एक भीख थी और देश को असली आजादी 2014 में मिली है। कंगना रनौत के इस बयान पर जहां कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, वहीं भाजपा के भी कई नेताओं ने अभिनेत्री के स्टेटमेंट को गलत करार दिया है। इस बीच, अपने बयान को लेकर पहली बार कंगना रनौत को बॉलीवुड से समर्थन मिला है और अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा ने कहा है कि 2014 के बाद वाकई हालात बदले हैं।

कंगना के बचाव में शर्लिन चोपड़ा ने क्या कहा?

कंगना के बचाव में शर्लिन चोपड़ा ने क्या कहा?

एबीपी न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू में शर्लिन चोपड़ा ने कंगना रनौत का बचाव किया है। शर्लिन चोपड़ा ने कहा, 'कंगना रनौत ने किस संदर्भ में वो बयान दिया, उसकी तह तक जाना बहुत जरूरी है। हमें अपने देश के स्वतंत्रता सेनानियों या क्रांतिकारियों का अपमान नहीं करना चाहिए, लेकिन कंगना रनौत एक बहुत अच्छी अभिनेत्री हैं, एक जिम्मेदार नागरिक भी हैं, इसलिए उनके बयान के संदर्भ को देखना चाहिए।'

'2014 के बाद हिंदुओं की स्थिति बदली है'

'2014 के बाद हिंदुओं की स्थिति बदली है'

शर्लिन चोपड़ा ने आगे कहा, 'मैंने उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी में पढ़ा था, जिसमें कंगना ने कहा है कि उनका बयान 1857 की क्रांति के संदर्भ में है। और, रही बात उनके 2014 को लेकर दिए गए बयान की, तो ये बात तो हम सभी जानते हैं कि जब से नरेंद्र मोदी की सरकार आई है, देश में विशेष तौर पर हिंदू धर्म के लोगों की स्थिति में बदलाव आया है, वो अब खुलकर अपने धर्म का पालन करने लगे हैं।

'तिलक लगाने पर झिझक महसूस होती थी'

'तिलक लगाने पर झिझक महसूस होती थी'

शर्लिन चोपड़ा ने कहा, 'पहले हिंदुओं को अपने धर्म के त्योहार मनाने पर, तिलक लगाने पर झिझक महसूस होती थी...चाहे होली का त्योहार हो या दिवाली हो, लेकिन अब हम पटाखे फोड़ रहे हैं, रंगों से खेल रहे हैं, खुलकर जय श्री राम के नारे लगा रहे हैं। तो मैं ये कह सकती हूं कि 2014 के बाद से हिंदुओं की स्थिति में बदलाव आया है और वो बिना किसी डर के अपने धर्म का पालन करने लगे हैं।'

'कंगना एक राष्ट्रवादी महिला हैं'

'कंगना एक राष्ट्रवादी महिला हैं'

कंगना रनौत का समर्थन करते हुए शर्लिन चोपड़ा ने कहा, 'और रही बात उस बयान की, कि आजादी हमें भीख में मिली है, तो मुझे लगता है कि इस पूरे विवाद में उस संदर्भ का जिक्र नहीं किया जा रहा है, जिस संदर्भ में कंगना ने वो बात कही। कंगना ने अपने बयान में कहीं भी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद या किसी भी स्वतंत्रता सेनानी का नाम नहीं लिया। कंगना रनौत जैसी राष्ट्रवादी अभिनेत्री ऐसा कोई बयान क्यों देना चाहेंगी, जिससे हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान को कोई ठेस पहुंचे। मुझे लगता है कि हम उनके बयान के संदर्भ को समझ नहीं पा रहे हैं।'

'मानसिक गुलामी से 2014 में आजादी मिली'

'मानसिक गुलामी से 2014 में आजादी मिली'

शर्लिन चोपड़ा ने आगे कहा, 'मैं ये नहीं मानती कि हमारे देश को आजादी भीख में मिली है, लेकिन मैं ये भी नहीं मानती कि कंगना रनौत जैसी राष्ट्रवादी महिला हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कर सकती है। मैं कंगना रनौत से ये जरूर कहना चाहूंगी कि वो इस बात को स्पष्ट करें कि उन्होंने भीख शब्द का इस्तेमाल किस संदर्भ में किया है। हो सकता है कि 2014 की जो बात उन्होंने कही, उसका मतलब ये हो कि मानसिक गुलामी से हम लोग 2014 में आजाद हुए हैं।'

कंगना ने कहा- लौटा दूंगी पद्मश्री, लेकिन गलत साबित करो

कंगना ने कहा- लौटा दूंगी पद्मश्री, लेकिन गलत साबित करो

वहीं, शनिवार को कंगना रनौत ने अपने बयान पर उठे विवाद को लेकर कहा कि अगर कोई उन्हें गलत साबित कर दे, तो वो पद्मश्री सम्मान लौटा देंगी। कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, 'मैंने अपने उसी इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा है कि हमारे देश की आजादी के लिए पहली सामूहिक लड़ाई 1857 में लड़ी गई। साथ ही सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई और वीर सावरकर जी जैसे महान लोगों ने देश के लिए बलिदान दिया। 1857 के बारे में मैं जानती हूं, लेकिन 1947 में कौन सी लड़ाई लड़ी गई, इसका मुझे नहीं पता। अगर कोई मुझे बता दे कि 1947 में कौन सी लड़ाई लड़ी गई तो मैं पद्मश्री सम्मान लौटा दूंगी और माफी भी मांग लूंगी।'

'गांधी ने भगत सिंह को क्यों मरने दिया'

'गांधी ने भगत सिंह को क्यों मरने दिया'

कंगना रनौत ने आगे लिखा, 'मैंने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर बनी फिल्म में काम किया है...1857 में स्वतंत्रता की पहली लड़ाई पर बहुत विस्तार से शोध किया है...राष्ट्रवाद का उदय हुआ तो दक्षिणपंथियों का भी हुआ... लेकिन अचानक राष्ट्रवाद की मौत क्यों हुई? और गांधी ने भगत सिंह को क्यों मरने दिया? नेताजी बोस की हत्या क्यों हुई और गांधी जी ने उन्हें कभी समर्थन क्यों नहीं दिया? एक गोरे इंसान ने देश में विभाजन की रेखा क्यों खींची? आजादी का जश्न मनाने के बजाय, भारत के ही लोगों ने एक-दूसरे की हत्या क्यों की? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब मैं मांग रही हूं, प्लीज इनका उत्तर हासिल करने में मेरी मदद कीजिए।'

'चेतना और विवेक के तौर पर हम 2014 में ही आजाद हुए'

'चेतना और विवेक के तौर पर हम 2014 में ही आजाद हुए'

अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में कंगना रनौत ने लिखा, 'जहां तक 2014 में आजादी मिलने का सवाल है, तो मैंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि हो सकता है शारीरिक तौर पर हम आजाद हो गए थे, लेकिन चेतना और विवेक के तौर पर हम 2014 में ही आजाद हुए हैं। एक मरी हुई सभ्यता में जान तो पड़ी, लेकिन वो उड़ने के लिए अपने पंख फड़फड़ा रही थी और आज अब वो ना केवल उड़ रही है, बल्कि गरज रही है। आज पहली बार कोई हमें अंग्रेजी ना बोलने, छोटे शहरों से आने या भारत में बने उत्पादों का इस्तेमाल करने पर अपमानित नहीं कर सकता। उस इंटरव्यू में मैंने सबकुछ स्पष्ट तौर पर कहा है। लेकिन, जो चोर हैं, उनकी तो जलेगी...कोई बुझा नहीं सकता...जय हिंद।'

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