रणवीर अल्लाहबादिया और समय रैना को हो सकती है 10 साल की जेल, जानें कैसे मिलेगा ऐसी सजा

Ranveer Allahbadia: फेमस पॉडकास्टर और यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया और उनके दोस्त कॉमेडियन समय रैना इस समय विवादों में घिरे हुए हैं। आपको बता दें कि रणवीर अल्लाहबादिया पैरेंट्स पर भद्दी टिप्पणी कर लोगों के निशाने पर आ गए हैं।

रणवीर अल्लाहबादिया समय रैना के खिलाफ एफआईआर
पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया की न सिर्फ जमकर आलोचना हो रही है बल्कि उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज हुई है। रणवीर से जुड़ा ये मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रणवीर अल्लाहबादिया ने कॉमेडियन समय रैना के शो इंडियाज गॉट लेटेंट में एक कंटेस्टेंट से पैरेंट्स के अंतरंग संबंधों को लेकर आपत्तिजनक बात कही थी।

Ranveer Allahbadia

किन-किन मामलों में केस दर्ज है और कितनी मिलेगी की सजा

फिलहाल इस बात को लेकर पूरे देश में नाराजगी है। बॉलीवुड सेलेब्स से लेकर आम आदमी तक इसका विरोध कर रहे हैं। वहीं रणवीर अल्लाहबादिया समेत 5 लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है। एनबीटी की खबर के अनुसार दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के वकील अनिल कुमार सिंह श्रीनेत ने बतया कि इन आरोपियों के खिलाफ किन-किन मामलों में केस दर्ज है और इन पर किन मामलों में कितनी सजा हो सकती है।

-जानकारी के अनुसार इस मामले में 5 लोगों पर अश्लीलता को बढ़ावा देने और यौन रूप से स्पष्ट और अश्लील चर्चा में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

-एफआईआर में 31 वर्षीय पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया के अलावा,आशीष चंचलानी, जसप्रीत सिंह, अपूर्वा मखीजा और समय रैना का नाम शामिल है।

-यूट्यूबर के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की गई हैं। सबसे पहले असम पुलिस ने इन 5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

-गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने साइबर पीएस केस नंबर 03/2025 के तहत बीएनएस 2023 की धारा 79/95/294/296 के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट, 2000 की धारा 67, सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 की धारा 4/7 और महिलाओं का अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4/6 के तहत मामला दर्ज किया है।

बीएनएस की धारा 294 (5 साल तक की जेल और जुर्माना)

-भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 के तहत अश्लील सामग्री की बिक्री, वितरण और सार्वजनिक प्रदर्शन को अपराध माना गया है। इस धारा के तहत पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की जा सकती है और आरोपी को जमानत पर छोड़ा जा सकता है।

-इस धारा के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की जेल और 5 हजार रुपए तक का जुर्माने की सजा है। वहीं दूसरी बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 हजार रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

बीएनएस की धारा 296 (अश्लील हरकत के लिए 3 महीने की सजा)

-भारतीय न्याय संहिता की धारा 296, अश्लील काम और गानों के लिए लगाई जाती है।

-इस धारा के तहत जो कोई भी, दूसरों को परेशान करने के लिए किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई अश्लील काम करता है या किसी सार्वजनिक स्थान पर या उसके आसपास कोई अश्लील गीत, गाथा या शब्द गाता, सुनाता या बोलता है, उसे 3 महीने की जेल या एक हजार रुपए तक के जुर्माना भरना ड़ सकता है।

बीएनएस की धारा 95 (3 से 10 साल तक की सजा)

-बीएनएस की धारा 95 के तहत किसी अपराध को करने के लिए किसी बच्चे को काम पर रखना, नियोजित करना या उससे जुड़ना जैसी बातें शामिल हैं।

-ऐसे में कम से कम 3 साल की कैद की सजा हो सकती है, जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही जुर्माना भी देना पड़ सकता है।

-यदि बच्चा अपराध करता है तो बच्चे को काम पर रखने या नियोजित करने वाले व्यक्ति को भी उसी तरह दंडित किया जाएगा जैसे कि उसने खुद अपराध किया हो।

बीएनएस की धारा 79 (महिला के अपमान में 3 साल जेल)

-बीएनएस के धारा 79 के तहत यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाता है तो उसे दोषी माना जाता है।

-उसे इस अपराध की सजा के तौर पर 3 साल तक की जेल व जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

-इसके तहत किसी महिला के चरित्र का अपमान करने के इरादे से कोई शब्द, इशारा या कार्य करना शामिल है।

आईटी एक्ट की धारा 67 (3 साल तक की जेल)

-सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 के तहत इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर दंड का प्रावधान है।

-इस धारा के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 साल की जेल और 5 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है।

-दूसरी बार दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है।

बीएनएस की धारा 4 और 6 (महिला की गरिमा के हनन पर 5 साल की जेल)

-महिलाओं का अशिष्ट चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4 के तहत महिलाओं के अशिष्ट चित्रण करने वाली किताबों, पुस्तिकाओं वगैरह के प्रकाशन या डाक द्वारा भेजने पर प्रतिबंध है। इस अधिनियम का मकसद महिलाओं की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना है।

-वहीं, इस कानून की धारा 6 के तहत जो कोई धारा 3 या धारा 4 के प्रावधानों का उल्लंघन करेगा, उसे पहली बार दोषी होने पर 2 साल तक की जेल और 2 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

-वहीं तीसरे या बाद के दोष के लिए उसे 6 महीने से 5 साल तक की जेल और 10 हजार रुपए से एक लाख रुपए तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

सिनेमैटोग्राफ एक्ट की धारा 4 (फिल्मों की जांच)

-सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 4 फिल्मों की जांच के प्रावधान से जुड़ा है। धारा 4 के तहत, अगर आप कोई फिल्म जनता को दिखाना चाहते हैं, तो आपको पहले बोर्ड में आवेदन करना होगा और प्रमाणपत्र मांगना होगा।

-बोर्ड फिल्म की समीक्षा करेगा या किसी और से समीक्षा करवाएगा और फिर फैसला करेगा कि फिल्म को सभी को दिखाने की अनुमति दी जा सकती है।

सिनेमैटोग्राफ एक्ट की धारा 7 (3 साल तक की जेल)

-सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 7 में सेंसरशिप के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए सजा का प्रावधान है।

-इस धारा के तहत सेंसरशिप से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है। सेल्युलाइड फिल्मों के मामले में 3 साल तक की जेल या एक लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

-वीडियो फिल्मों के मामले में कम से कम 3 महीने की जेल या 20 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। लगातार अपराध करने पर प्रतिदिन 20 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। ट्रायल कोर्ट फिल्म को सरकार को जब्त करा सकता है।

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