Mirai Review: 'मिराई' में तेजा सज्जा ने चलाया ऐसा जादू, फिल्म देखने से पहले जरूर पढ़ लें ये रिव्यू
Mirai Review In Hindi: इन दिनों साउथ की फिल्मों में एक अलग ही तरह जादू देखने को मिल रहा है। चाहे मास फिल्म हों या फिर क्लास, दोनों में ही साउथ की फिल्मों की बात अलग ही रहती है।
हाल ही में 'लोका पार्ट 1' आई थी, जिसे देखने के बाद दर्शक भी अपने आपको तृप्त महसूस कर थिएटर से बाहर निकले। ऐसे ही अब तेजा सज्जा की फिल्म 'मिराई', ये कैसी है? आज के रिव्यू में हम आपको इसके बारे में बताएंगे।

फिल्म की कहानी का सेंटर वेदा (तेजा सज्जा) है, एक क्लेवर और बहादुर यंग मैन। जिसे सम्राट अशोक के नौ पवित्र ग्रंथों को इविल फोर्सेस से बचाने का सैंक्टिफाइड ड्यूटी सौंपा गया है। कहानी में "मिराई", एक पावरफुल डिवाइन वेपन का समावेश, जिसे भगवान राम के त्रेता युग में बनाया गया था। कथा को एक डीप और हिस्टोरिकल महत्व देता है। राइटर कार्तिक गट्टामनेनी और मणिबाबू करनम ने इमोशनल और मार्मिक दृश्यों को थ्रिलिंग एक्शन दृश्यों के साथ seamlessly मिलाया है। जो ऑडियंस को शुरू से अंत तक हुक्ड रखता है।
आर्टिस्ट्स की परफॉरमेंस
तेजा सज्जा ने अपने मेस्मराइजिंग परफॉरमेंस से वेदा के किरदार में जान फूंक दी है। उनका पोर्ट्रेयल आकर्षण, साहस और संवेदनशीलता का एक यूनिक संगम है। एक ऑर्डिनरी पर्सन से चुने हुए वॉरियर तक का उनका ट्रांसफॉर्मेशन इनक्रेडिबली ऑथेंटिक और कन्विंसिंग लगता है, और वह फिल्म की बैकबोन बने रहते हैं। जादूगर महाबीर लामा के रूप में, मनोज मांचू का एक्टिंग किसी भी तरह से आकर्षक से कम नहीं है। उनका कैरेक्टर भयावह और कैप्टिवेटिंग दोनों है, जिसकी पावरफुल प्रेजेंस हर कंफ्रंटेशन को इफेक्टिव बनाती है। राणा दग्गुबाती अपने मिस्टीरियस रोल में एक इंप्रेसिव छाप छोड़ते हैं, जो स्टोरी में एक और लेयर जोड़ता है।
जगपति बाबू ने तंत्र रक्षक अंगमबली के रूप में डिग्निटी और अथॉरिटी लाया है, जबकि रितिका नायक (विभा) एक रिफ्रेशिंग और चार्मिंग ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस प्रदान करती हैं। श्रिया सरन (अम्बिका) और जयराम सुब्रमण्यम (अगस्त्य) भी स्ट्रॉन्ग सपोर्टिंग परफॉरमेंस देते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि हर कैरेक्टर को शाइन करने का मौका मिले।
विजुअल ग्रैंड्योर और सिनेमैटोग्राफी
अगर कोई एक एरिया है जहां "मिराई" ने कुछ अच्छा किया है तो वह उसके विजुअल्स में है। रामजी डॉट और मुथु सुब्बैया द्वारा सुपरवाइज्ड VFX ब्रीदटेकिंग और कुशलता से एग्जिक्यूट किए गए हैं। फिल्म में विशाल, मैजिकल लैंडस्केप और हार्ट-पाउंडिंग एक्शन सीक्वेंस दिखाए गए हैं जो पूरी तरह से जेनुइन लगते हैं। चलती ट्रेन के सीन से लेकर मोनुमेंटल बैटल्स तक, हर मोमेंट एक विजुअल मार्वल है।
कार्तिक गट्टामनेनी की सिनेमैटोग्राफी माइथोलॉजिकल ग्रैंड्योर और एक्शन की रग्ड इंटेन्सिटी दोनों को खूबसूरती से कैप्चर करती है, जिससे हर फ्रेम आर्ट का एक पीस बन जाता है। प्रदीप सेलम (नंग) और केचा खम्पाक्डी द्वारा कोरियोग्राफ किए गए एक्शन सीन्स की भी बहुत प्रशंसा की जाती है। फिल्म का डायरेक्शन और कहानी भी कार्तिक ने ही लिखी है।
डायलॉग, म्यूजिक और एडिटिंग सिनर्जी
फ़िल्म के डायलॉग पावरफुल और डीपली मीनिंगफुल हैं। एंशिएंट विजडम में निहित होने के बावजूद, वे मॉडर्न ऑडियंस के लिए रिमार्केबली रेलेवेंट और इन्फ्लुएंशियल हैं। गौरा हरि का म्यूजिक फ़िल्म के मूड का परफेक्टली कॉम्प्लीमेंट है-यह बैटल सीन्स के दौरान एनर्जी से भर जाता है और इमोशनल मोमेंट्स में सोलेस देता है। श्रीकर प्रसाद का प्रिसिजन एडिटिंग बिना किसी अननेसेसरी डिले के एक स्मूथ, इंगेजिंग स्टोरी सुनिश्चित करता है।
इसका कॉन्फिडेंट डायरेक्शन, फ्लॉलेस परफॉरमेंस और मेस्मराइजिंग विजुअल्स इसे बिग-स्क्रीन पर देखना एक एसेंशियल एक्सपीरियंस बनाते हैं। फ़िल्म थ्रिल, स्पेक्टकल और एक टाइमलेस क्वालिटी का एक आइडियल ब्लेंड प्रदान करती है, जो एक सिनेमाई लैंडमार्क इस्टैब्लिश करती है जो आने वाले इयर्स तक रेजोनेट करता रहेगा। बाकी आपको ये फिल्म थिएटर में जाकर देखना चाहिए।












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