नेपाल में Gen-Z प्रोटेस्ट से हालात बेकाबू, मनीषा कोइराला का फूटा सरकार पर गुस्सा, कहा-ये देश के लिए काला दिन

Manisha Koirala on Nepal Gen-Z Protest: नेपाल इन दिनों बड़े संकट से गुजर रहा है। सरकार द्वारा अचानक 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के फैसले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। फेसबुक, व्हाट्सऐप, एक्स (पहले ट्विटर) और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के बैन होने के बाद सबसे ज्यादा गुस्सा युवाओं में देखने को मिल रहा है।

शांतिपूर्ण विरोध से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे हिंसक रूप ले चुका है। राजधानी काठमांडू समेत कई शहरों की सड़कों पर भीड़ उमड़ रही है और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आ रही हैं। इस बीच खबर है कि अब तक 19 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इसी माहौल के बीच बॉलीवुड और नेपाली अभिनेत्री मनीषा कोईराला ने इसे नेपाल के लिए "काला दिन" करार दिया है।

Manisha Koirala

मनीषा कोईराला ने कही बड़ी बात

बॉलीवुड और नेपाली अभिनेत्री मनीषा कोईराला ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा, "आज नेपाल के लिए काला दिन है। जब जनता की आवाज़ और भ्रष्टाचार के खिलाफ उठे गुस्से का जवाब गोलियों से दिया जाता है, तो यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है।" उनकी इस पोस्ट को हजारों लोगों ने साझा किया और इस पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। मनीषा कोइराला का परिवार राजनीति से लंबे वक्त से जुड़ा हुआ है।
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कोईराला परिवार का राजनीतिक सफर

मनीषा कोईराला सिर्फ फिल्म जगत का ही बड़ा नाम नहीं हैं, बल्कि उनका परिवार नेपाल की राजनीति और सत्ता से भी गहराई से जुड़ा रहा है।

  • उनके पिता प्रकाश कोईराला नेपाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
  • उनकी दादी विमला कोईराला नेपाल की पहली महिला मंत्री थीं।
  • उनके दादा बिश्वेश्वर प्रसाद कोईराला नेपाल के पहले लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री थे।
  • वहीं उनके चाचा गिरिजा प्रसाद कोईराला और मृगेश्वर प्रसाद कोईराला भी नेपाल की सत्ता में बड़े पदों पर रह चुके हैं।
  • उनके चाचा गिरिजा प्रसाद कोईराला तो कई बार नेपाल के प्रधानमंत्री भी बने और देश की राजनीति में उनका बड़ा प्रभाव रहा।
  • इतना ही नहीं, मनीषा के परिवार के कई सदस्य नेपाल कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे और एक समय में कोईराला परिवार को नेपाल की राजनीति का सबसे ताकतवर परिवार माना जाता था।

यानी मनीषा कोईराला का यह बयान केवल एक अभिनेत्री के तौर पर नहीं, बल्कि नेपाल की एक राजनीतिक विरासत से जुड़े परिवार की आवाज के रूप में भी देखा जा रहा है।

यूजर्स ने जताया गुस्सा

मनीषा कोईराला की पोस्ट पर आम यूज़र्स ने भी सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया। एक यूज़र ने लिखा,"नेपाल की सरकार और कानून व्यवस्था पूरी तरह भ्रष्ट है। मासूम बच्चों को मार दिया गया। यह देश तब तक नहीं सुधरेगा जब तक पूरे सिस्टम में बड़ा बदलाव नहीं किया जाता।"

दूसरे ने लिखा, "भारत से मैं यह खबर सुनकर हिल गया हूं। जो आंदोलन शांतिपूर्ण होना चाहिए था, उसमें अब तक 20 से ज्यादा नौजवानों की जान चली गई। बीस सपने टूट गए, बीस आवाज़ें खामोश हो गईं। लेकिन उनका साहस और एकता पूरे देश को हिला देने वाला है।" एक अन्य ने लिखा,"नेपाल में फिर से राजा की वापसी होनी चाहिए और बालेन प्रधानमंत्री बनने चाहिए। तभी सत्ता पर सही मायनों में चेक और बैलेंस कायम हो सकेगा।"

सोशल मीडिया बैन बना आक्रोश का कारण

नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया था। इनमें फेसबुक, व्हाट्सऐप, एक्स (पहले ट्विटर), यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं। सरकार ने इसके पीछे अफवाहों और भड़काऊ सामग्री को रोकने का तर्क दिया था, लेकिन युवाओं ने इसे उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश बताया। इसी के बाद विरोध शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया।

काठमांडू में कर्फ्यू

हालात काबू से बाहर होते देख जिला प्रशासन ने काठमांडू के कई अहम इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है। संसद भवन, राष्ट्रपति निवास और सिंह दरबार (जहां प्रधानमंत्री का दफ्तर है) के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। भारी संख्या में पुलिस और सेना को तैनात किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र ने उठाई चिंता

नेपाल की बिगड़ती स्थिति पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आवाज उठ रही है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शमदसानी ने कहा,"हम प्रदर्शनकारियों की मौत और घायल होने की खबर से बेहद स्तब्ध हैं। हम नेपाल सरकार से मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की तुरंत और पारदर्शी जांच की जाए।"

युवाओं का आंदोलन जारी

हालांकि भारी हिंसा और कर्फ्यू के बावजूद नेपाल के युवा पीछे हटते नजर नहीं आ रहे। वे सरकार के फैसले को गलत बताते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं। उनकी नजर में सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और आवाज़ उठाने का सबसे बड़ा मंच है।
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