जानिए, 'प्रिंसेस ऑफ डूंगरपुर' क्यों बनना चाहती थीं लता मंगेशकर? बहुत कम लोगों को पता है 'मीठू' की ये कहानी
मुंबई, 06 फरवरी। भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित बॉलीवुड सिंगर लता मंगेशकर का आज (रविवार) 92 साल की उम्र में निधन हो गया। महाराष्ट्र में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुंबई पहुंचे थे। लता मंगेशकर के निधन पर देशभर में शोक की लहर है, हर किसी की जुबान पर उनके द्वारा गाए गाने आ रहे हैं। भारत में लता मंगेशकर किवदंतियों की तरह रहीं। 'स्वर कोकिला' की उपाधी उन्हें भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बड़ी आत्मीयता से दी थी।
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कभी पूरा नहीं हो सका लता मंगेशकर का ये सपना
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में नाम कमाने के बाद भी लता मंगेशकर का एक सपना उनके साथ ही चला गया। वह हमेशा से ही 'प्रिंसेज ऑफ डूंगरपुर' का टाइटल अपने नाम के साथ देखना चाहती थीं। आपको बता दें कि डूंगरपुर, राजस्थान में एक रियासत थी। इस रियासत से जुड़े एक शख्स के साथ लता मंगेशकर के खास रिश्तों की चर्चा म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री में बड़े अदब के साथ की जाती थी।

प्यार में बदली दोस्ती
दरअसर, भारत के प्रसिद्ध क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर रहे राज सिंह डूंगरपुर और लता मंगेशकर के बीच बड़ी गहरी दोस्ती थी। उनके बीच अपनेपन, आत्मियता और प्यार का नाता था। डूंगरपुर राजघराने के राज सिंह और लता मंगेशकर की दोस्ती किसी से छिपी नहीं थी, लेकिन दोनों का ये रिश्ता कब प्यार में बदल गया इसका अहसास न लता को हुआ और न ही राज सिंह को। इस बीच उन्हें लेकर चर्चाएं आम हो गई थीं।

कभी एक-दूसरे के नहीं हो सके लता और राज
आपको जानकर हैरानी होगी कि लता औ राज सिंह कभी एक-दूसरे के नहीं हो सके, लेकिन दोनों ने कभी किसी और से शादी नहीं की। राज सिंह डूंगरपुर रियासत के राजा रहे लक्ष्मण सिंह जी के बेटे थे। राज सिंह को क्रिकेट और लता मंगेशकर की आवाज से बहुत प्यार था। लता मंगेशकर को भी गाने के अलावा क्रिकेट में काफी दिलचस्पी थी। अपनी पसंद के चलते दोनों एक-दूसरे के करीब आए और दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला।

घर पर हुई पहली मुलाकात
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राज सिंह से लता की पहली मुलाकात उनके घर पर हुई थी। 1959 में राज सिंह लॉ की पढ़ाई के लिए मुंबई आए। वह 1955 से ही राजस्थान की रणजी टीम से जुड़े हुए थे। मुंबई आने के बाद वहां के स्टेडियम में राज की मुलाकात लता के भाई हृदयनाथ मंगेशकर से मुलाकात हुई। हृदयनाथ अक्सर राज को अपने साथ घर लाने लगे, और ऐसे राज और लता की पहली मुलाकात हुई। कहा जाता है कि पहली मुलाकात में उनका झुकाव लता मंगेशकर की ओर हो गया था।

लता को प्यार से इस नाम से बुलाते थे राज
बीकानेर की राजकुमारी राज्यश्री, जो डूंगरपुर की बहन की बेटी हैं, अपनी आत्मकथा 'पैलेस ऑफ क्लाउड्स- ए मेमॉयर' (ब्लूम्सबरी इंडिया 2018) में उन्होंने लता मंगेशकर और राज सिंह के बारे में कई अनकही बातें लिखी हैं। जानकारों की माने तो दोनों की शादी इस वजह से नहीं हो सकी क्योंकि राजपरिवार इस बात के लिये राजी नहीं था कि कोई साधारण परिवार की लड़की डूंगरपुर रियासत की बहू बने। राज सिंह का परिवार लता को अपनी बहू बनाने के लिए कभी राजी नहीं हुआ। हलांकि राज सिंह ने अपने परिवार की बात तो मान ली लेकिन उन्होंने कभी दूसरी शादी नहीं की। कहते हैं कि राज सिंह प्यार से लता मंगेशकर को मीठू कहकर बुलाते थे।
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