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Kathal: ‘विधायक जी का कटहल’ खोजने वाली फिल्म को बेस्ट फिल्म का नेशनल अवॉर्ड, मूवी बनाने में कितना आया खर्च?

Kathal: A Jackfruit Mystery Best Hindi Film Award: 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (नेशनल अवॉर्ड्स) का 1 अगस्त 2025 को सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने ऐलान किया। सबसे चर्चित विजेताओं में से एक रही "कटहल: ए जैकफ्रूट मिस्ट्री", जिसे बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि सान्या मल्होत्रा की पॉलिटिकल सटायर वाली फिल्म इतनी दमदार निकलेगी कि उसे बेस्ट हिंदी मूवी का अवॉर्ड मिलेगा। ये एक लॉ बजट की फिल्म थी।

नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही इस फिल्म में सान्या मल्होत्रा ने मथुरा में रहने वाली इंस्पेक्टर महिमा बासोर का किरदार निभाया है और उनके दमदार अभिनय की हर ओर तारीफ हो रही है। फिल्म का निर्देशन यशोवर्धन मिश्रा ने किया है और इसे सिख्या एंटरटेनमेंट और बालाजी मोशन पिक्चर्स ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म का पूरा प्लॉट 'विधायक जी के कटहल के चोरी होने' पर है।

Kathal A Jackfruit Mystery Best Hindi Film Award

क्या है 'विधायक का कटहल ढूंढ रही पुलिस' की कहानी?

"कटहल: ए जैकफ्रूट मिस्ट्री" के जरिए निर्देशक यशोवर्धन मिश्रा ने एक सटायर शैली में बेहद मनोरंजक कहानी को दर्शकों के सामने पेश किया था। यह फिल्म पुलिस सिस्टम और राजनीति पर तीखा तंज कसते हुए एक दमदार संदेश देती है।

छोटे शहर मोबा में एक विधायक के बाग से दो कटहल (जैकफ्रूट) चोरी हो जाते हैं। केस सुनने में जितना अजीब लगता है, असल में उससे कहीं ज्यादा पेचीदा और सच्चाइयों से भरा हुआ है। जब इंस्पेक्टर महिमा इस केस की तह में जाती हैं, तो सामने आते हैं जातीय भेदभाव, पुलिस की लापरवाही और यहां तक कि मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे इसमें शामिल हैं।

'कटहल' एक हल्की-फुल्की कॉमेडी लग सकती है, लेकिन इसके जरिए समाज की कई गहरी समस्याओं को बड़े ही दिलचस्प और असरदार तरीके से उजागर किया गया है। सान्या मल्होत्रा का अभिनय फिल्म की जान है -जहां वो सिस्टम पर तंज भी करती हैं और मानवीय संवेदना भी दिखाती हैं।

क्यों खास है "कटहल: ए जैकफ्रूट मिस्ट्री" फिल्म के लिए ये जीत?

यह फिल्म दर्शकों और समीक्षकों दोनों के बीच पसंद की गई। इसकी ताजा कहानी, समाजिक संदेश, और शानदार अभिनय ने दिखा दिया है कि अब दर्शक केवल मसाला फिल्में नहीं, बल्कि सार्थक और कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा को भी सराह रहे हैं।

"कटहल: ए जैकफ्रूट मिस्ट्री" फिल्म को बनाने में कितना आया खर्च?

हालांकि "कटहल: ए जैकफ्रूट मिस्ट्री" के निर्माण में कितना खर्च आया, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह साफ है कि इसकी शूटिंग ग्वालियर जैसे रियल लोकेशन पर की गई, जिससे प्रोडक्शन बजट किफायती रहा होगा। सान्या मल्होत्रा और अनंत वी. जोशी लीड रोल में हैं। आमतौर पर ऐसी फिल्मों को बनाने में 10 से 30 करोड़ रुपये ही लगते हैं। जिसमें से ज्यादातर फीस स्टारकास्ट में ही चली जाती है। ये फिल्म भी काफी कम बजट की थी। सान्या मल्होत्रा ने कथित तौर पर फिल्म में अपनी भूमिका के लिए ₹1 करोड़ लिए थे।

विकिपीडिया के मुताबिक "कटहल: ए जैकफ्रूट मिस्ट्री" का निर्माण लगभग ₹1.25 करोड़ के बजट में किया गया था। यह एक स्लीपर हिट साबित हुई थी। इसने चेन्नई डिस्ट्रीब्यूशन टेरिटरी से ही लगभग पूरा बजट रिकवर कर लिया था। (हालांकि विकिपीडिया जानकारी विश्वसनीय नहीं है।)

"कटहल: ए जैकफ्रूट मिस्ट्री" ने साबित कर दिया है कि मनोरंजन के साथ जब सच्चाई को जोड़ा जाता है, तो वह दर्शकों के दिल में उतर जाता है। यह फिल्म न केवल एक रहस्यमयी केस की कहानी है, बल्कि समाज की परतें खोलने वाला एक आईना भी है।

71वें नेशनल अवॉर्ड्स विजेताओं की लिस्ट

  • शाहरुख खान को फिल्म जवान और विक्रांत मैसी को '12th फेल' के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड संयुक्त रूप से दिया गया
  • फिल्म मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे के लिए रानी मुखर्जी को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड
  • कटहल को बेस्ट हिंदी फिल्म का अवॉर्ड
  • हिंदी फिल्म 'सिर्फ एक बंदा काफी है' को बेस्ट डायलॉग के लिए अवॉर्ड
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