'बेटे ने मां को पीटा, नहीं दिया खाना, तड़पते हुए छोड़ा', एक्ट्रेस की कर दी ऐसी हालत, ये मौत किसी को न मिले
Geeta Kapoor: चमकती फिल्मी दुनिया के पीछे कई ऐसी कहानियां छिपी होती हैं, जो किसी भी इंसान को भीतर तक झकझोर सकती हैं। बॉलीवुड की सीनियर एक्ट्रेस गीता कपूर की जिंदगी भी ऐसी ही एक कहानी है, जिसमें सफलता, संघर्ष, त्याग और अंत में गहरा अकेलापन शामिल था। करीब 100 फिल्मों में काम कर चुकीं गीता कपूर ने अपने परिवार और बच्चों के लिए पूरी जिंदगी समर्पित कर दी थी लेकिन जब उन्हें सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत थी, तब किस्मत ने उन्हें बेहद दर्दनाक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया था।
सिल्वर स्क्रीन से लेकर संघर्षों तक का सफर
गीता कपूर हिंदी सिनेमा का एक जाना-पहचाना चेहरा रही थीं। उन्होंने अपने करियर में कई चर्चित फिल्मों में काम किया और दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई। अभिनय के अलावा वह घुड़सवारी और डांस जैसी कलाओं में भी निपुण थीं। एक समय ऐसा था जब उनका जीवन खुशहाल और व्यवस्थित माना जाता था लेकिन वक्त के साथ परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई थीं।

बेटे के लिए सब कुछ गंवाया, बदले में मिला अकेलापन
बताया जाता है कि गीता कपूर ने अपने बेटे की जरूरतों और इलाज के लिए अपना घर तक बेच दिया था। मुंबई के जुहू इलाके में स्थित आलीशान बंगले को बेटे के इलाज के लिए बेचकर गीता कपूर परिवार के साथ गोरेगांव में एक छोटे फ्लैट में रहने लगी थीं। उन्हें उम्मीद थी कि जिन बच्चों के लिए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया, वही उनके बुढ़ापे का सहारा बनेंगे लेकिन उनकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी शायद उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।
बेटे ने चुपके से बेचा घर और हुआ गायब
कुछ समय बाद गीता कपूर की तबीयत बिगड़ने लगी थी। बेटे ने मां को अस्पताल में भर्ती कराया और उसके बाद गोरेगांव का फ्लैट बेचकर, उसके पैसे लेकर कहीं गायब हो गया। कहा जाता है कि गीता कपूर लंबे समय तक अस्पताल में ही अपने बेटे के लौटने का इंतजार करती रहीं लेकिन न तो बेटा और न ही परिवार का कोई सदस्य कभी उनसे मिलने के अस्पताल पहुंचा।
'बेटा मुझे पीटता था, खाना नहीं देता था'
-एक पुराने इंटरव्यू में गीता कपूर ने दावा किया था कि वह अपने बेटे से काफी परेशान थीं। उन्होंने बताया था- बेटा मुझे मारता-पीटता था क्योंकि मुझे उसकी अय्याशी वाली आदतें पसंद नहीं थीं। वह मुझे 4 दिन में एक बार खाना देता था और कभी-कभी तो कई दिनों तक मुझे कमरे में बंद करके भी रखता था। मैं ओल्ड-एज होम जाने के लिए तैयार नहीं थी इसीलिए उसने ये सब प्लान किया। उसने जान-बूझकर मुझे भूखा रखा और मैं बीमार पड़ गई। फिर उसने मुझे अस्पताल में भर्ती कराया और भाग गया।
-गीता कपूर के बयानों ने उस समय लोगों को झकझोर कर रख दिया था। एक ऐसी मां, जिसने अपने बच्चों के भविष्य के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया था, वही अपने अंतिम दिनों में उपेक्षा और अकेलेपन का सामना कर रही थी।
अस्पताल में भर्ती कर गायब हो गया परिवार
-मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गीता कपूर को तबीयत खराब होने पर मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनके बेटे ने इलाज शुरू करवाया और कुछ जरूरी काम का हवाला देकर वहां से चला गया। शुरुआती दिनों में उसने फोन और मैसेजेस के जरिए संपर्क बनाए रखा था लेकिन बाद में उसका कोई पता नहीं चला।
-अस्पताल प्रबंधन ने परिवार से संपर्क करने की कोशिश की थी लेकिन सफलता नहीं मिली। यहां तक कि जिस फ्लैट में एक्ट्रेस रहती थीं, वह भी बाद में खाली मिला। बताया गया कि संपत्ति बेची जा चुकी थी और परिवार वहां से जा चुका था।
मदद के लिए आगे आए फिल्म इंडस्ट्री के लोग
-जब गीता कपूर की स्थिति की खबर सार्वजनिक हुई, तब फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने उनकी मदद का जिम्मा उठाया। फिल्ममेकर अशोक पंडित और निर्माता रमेश तौरानी ने उनके इलाज और अन्य जरूरतों का खर्च उठाने में सहयोग किया।
-स्वास्थ्य में कुछ सुधार आने के बाद गीता कपूर को अस्पताल से एक वृद्धाश्रम में शिफ्ट किया गया, जहां उनकी देखभाल की व्यवस्था की गई। हालांकि वहां भी एक्ट्रेस अपने बेटे को याद करती रहती थीं और उम्मीद करती थीं कि वह एक दिन उन्हें वापस घर ले जाने जरूर आएगा।
आखिरी वक्त तक बेटे का करती रहीं इंतजार
गीता कपूर के जीवन का सबसे भावुक पहलू ये था कि उन्होंने अंतिम समय तक अपने बेटे का इंतजार नहीं छोड़ा। गीता कपूर के करीबियों के मुताबिक, वह अक्सर अपने बेटे का नाम लेकर उसे याद करती थीं और उम्मीद करती थीं कि वह एक दिन उनसे मिलने जरूर आएगा। हालांकि यह इंतजार अधूरा ही रह गया। साल 2019 में एक्ट्रेस ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन के बाद भी कुछ समय तक परिवार के सदस्यों का इंतजार किया गया ताकि वह अंतिम दर्शन कर सकें।
बेटी ने निभाई अंतिम जिम्मेदारी
-मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गीता कपूर के निधन के बाद उनका बेटा सामने नहीं आया। बाद में उनकी बेटी और परिवार की अन्य महिलाओं ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। इस तरह एक एक्ट्रेस, जिसने अपनी पूरी जिंदगी परिवार और बच्चों के नाम कर दी, उनका सफर बेहद भावुक और दर्दनाक अंत के साथ खत्म हुआ।
-गीता कपूर की ये भावुक कर देने वाली कहानी सिर्फ एक एक्ट्रेस की कहानी नहीं है बल्कि उन अनगिनत बुजुर्ग माता-पिताओं की भी कहानी है जो अपने बच्चों के लिए पूरी जिंदगी समर्पित कर देते हैं। शोहरत, सफलता और कई फिल्मों में काम करने के बावजूद उनके जीवन का आखिरी अध्याय अकेलेपन और इंतजार से भरा रहा। यही वजह है कि आज भी उनकी कहानी सुनने वालों की आंखें नम हो जाती हैं।













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