Nashik Weather Update: क्यों फटते हैं बादल? नासिक में हाई अलर्ट, अब तक के 10 बड़े अपडेट
Nashik Weather Update: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई समेत अन्य क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजवीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। महाराष्ट्र के कई जिलों गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। नासिक और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में विनाशकारी बारिश के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में 300 मिली तक बारिश के साथ नासिक में बादल फटने की संभावना जताई है।
नासिक के प्रसिद्ध मंदिरों को किया गया बंद
इसके अलावा नासिक में रेड अलर्ट के चलते स्कूल-कॉलेज में छुट्टी का ऐलान कर दिया गया है। प्रसिद्ध त्र्यंबकेश्वर मंदिर के अलावा वाणी के शक्तिपीठ मंदिर सत्श्रृंगी को बंद कर दिया गया है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिलाधिकारी के आदेश पर एहतियात के तौर पर मंदिर को बंद करने का ये निर्णय लिया गया है।

बादल फटने की चेतनावनी के बाद पुलिस ने नागरिकों से की अपील
वहीं नासिक में बादल फटने की चेतावनी और भारी बारिश के कारण हुए जलभराव के बीच नासिक ग्रामीण पुलिस ने सभी पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे इन संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों की ओर यात्रा न करें। नासिक के पुलिस अधीक्षक डॉ. डीएस स्वामी ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए इगतपुरी, वडोली और त्र्यंबकेश्वर जैसी सीमाओं पर विशेष नाकेबंदी की गई है।

क्यों फटते हैं बादल?
पहाड़ी राज्यों में मानसून आते ही ये ऐसी आपदा होती है जो पल भर में सब कुछ तबाह कर देती है। इस आपदा को 'बादल फटना' कहते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार 'बादल फटना' कोई ऐसी घटना नहीं है जिसमें सचमुच कोई बादल गुब्बारे की तरह फट जाता हो। यह वास्तव में बेहद कम समय में एक सीमित दायरे में होने वाली अत्यधिक भारी वर्षा की स्थिति है। IMD के अनुसार बादल फटने की घटना तब होती है जब समुद्र से आई नमी से भरे अत्यधिक जलयुक्त बादल पहाड़ों से टकराकर एक ही स्थान पर रुक जाते हैं। ऊंचाई के कारण वे तेजी से ऊपर उठते हैं, उनका तापमान अचानक घटता है और तीव्र संघनन के चलते बहुत कम समय में भारी मात्रा में पानी एक साथ धरती पर गिर जाता है।
क्यों बादल फटते ही मचती है तबाही?
मौसम विभाग के मानदंडों के अनुसार, जब लगभग 10 वर्ग किलोमीटर के छोटे दायरे में 100 मिलीमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक की दर से बारिश होती है, तो उसे आधिकारिक तौर पर बादल फटना माना जाता है। सामान्य बारिश की तुलना में यह मात्रा इतनी अधिक होती है कि धरती का ड्रेनेज सिस्टम इसे संभालने में पूरी तरह असमर्थ हो जाता है। कम समय में लाखों लीटर पानी गिरने के कारण पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी तेजी से खिसकने लगती है, जिसे हम भूस्खलन कहते हैं। पहाड़ों से बहकर आने वाला पानी अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर, पेड़ और मलबा लेकर नीचे बस्तियों की तरफ आता है। यह मलबा रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों और पुलों को तिनके की तरह बहा ले जाता है।
महाराष्ट्र सीएम ने बताया कब तक खराब रहेगा मौसम?
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि भारी बारिश और खराब मौसम की यह विकट स्थिति आठ जुलाई तक जारी रह सकती है। उन्होंने बताया कि संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह से हाई अलर्ट पर रखा गया है।
मुंबई और आसपास के जिलों में येलो अलर्ट
IMD ने मुंबई, रायगढ़ और पुणे ज़िलों और सतारा के घाट इलाकों में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना को देखते हुए 'येलो' अलर्ट जारी किया है। खतरे की गंभीरता को भांपते हुए मुंबई महानगर पालिका (BMC) और राज्य सरकार ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए मंगलवार को मुंबई के सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूल-कॉलेजों को पूरी तरह बंद रखने का फैसला लिया है, ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
पुणे और घाट सेक्शन में रिकॉर्ड बारिश और भूस्खलन
मुंबई और पुणे को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण करजत-लोनावला घाट सेक्शन में मानसून ने रौद्र रूप दिखाया है, जहां बीते 24 घंटों में रिकॉर्ड 600 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस भारी बारिश की वजह से रेल पटरियों पर पानी आ गया है और सड़क यातायात की रफ्तार पूरी तरह थम गई है। पुणे शहर के मध्य और बाहरी इलाकों में भी भारी जलजमाव होने से सड़कों पर नावें चलने जैसे हालात बन गए हैं।
22 जगहों पर हुआ भूस्खलन
पहाड़ी क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के चलते पुणे जिले में पिछले दो दिनों में लगभग 22 अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। भूस्खलन के कारण सड़कों पर मलबे और विशाल पत्थरों के आ जाने से यातायात ठप हो गया है। स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के लिए लगातार तैनात हैं ताकि अवरुद्ध रास्तों को साफ कर मार्ग खोला जा सके।
एक्सप्रेसवे और मुंबई-गोवा हाईवे पर ट्रैफिक बहाली की कोशिशें
यातायात को सुचारू बनाने के प्रयासों के बीच कुछ राहत की खबरें भी आई हैं। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का महत्वपूर्ण 'मिसिंग लिंक' हिस्सा सुरक्षा कारणों से करीब 18 घंटे से अधिक समय तक पूरी तरह बंद रहने के बाद आखिरकार खोल दिया गया है। राहत कर्मियों और हाइवे पुलिस ने सुरक्षा जांच पूरी करने के बाद सोमवार रात करीब 10 बजे इस मार्ग पर दोबारा भारी और हल्के वाहनों का परिचालन शुरू करवाया।
12 घंटे बंद रहा मुंबई-गोवा नेशनल हाईवे
वहीं दूसरी ओर, काशेडी घाट सेक्शन में भूस्खलन के कारण मुंबई-गोवा नेशनल हाईवे सोमवार को तकरीबन 12 घंटे तक बंद रहा था। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने बताया कि इस भूस्खलन में किसी जनहानि की खबर नहीं है। गोवा की तरफ जाने वाले कॉरिडोर को खोल दिया गया है, लेकिन मुंबई की तरफ जाने वाले मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के बाद मंगलवार को खोले जाने की उम्मीद है।













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