Asha Bhosle: 'हर चीज का मजाक', सोनिया गांधी ने सिंगर के निधन पर लिखा पत्र लेकिन कर बैठीं बड़ी गलती, भड़के लोग
Sonia Gandhi on Asha Bhosle Death: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले का सोमवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन पर कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
सोनिया गांधी ने आशा भोसले के बेटों को संबोधित करते हुए एक शोक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने कहा है कि 'गायिका के निधन से संगीत के स्वर्णिम युग का अंत हो गया।' लेकिन इस दौरान उनसे एक भारी गलती हो गई जिसे देखने के बाद लोग उन पर और कांग्रेस पार्टी पर भड़क गए हैं और दोनों का मजाक बना रहे हैं।'

दरअसल सोनिया गांधी ने अपने पत्र में आशा भोसले के दोनों बेटों आनंद और हेमंत को संबोधित किया है, जबकि हेमंत भोसले का निधन साल 2015 में कैंसर की वजह से हो चुका है। जिसके कारण लोग कांग्रेस और सोनिया गांधी की आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि 'ये पार्टी हर चीज का मजाक बना देती है।'
'कांग्रेस ने राजनीति में बने रहने की इच्छाशक्ति खो दी है', भड़के लोग
तो वहीं एक यूजर ने लिखा कि 'कांग्रेस ने राजनीति में बने रहने की इच्छाशक्ति खो दी है इसीलिए ऐसी हास्यास्पद गलतियां हो रही हैं। हाल ही में, लोकसभा स्पीकर को हटाने के उनके प्रस्ताव में 2026 की जगह 2025 की तारीख लिखी थी। अब, सोनिया जी आशा जी के दिवंगत बेटे हेमंत का ज़िक्र कर रही हैं।' जबकि एक यूजर ने लिखा कि ' बड़ी चूक: आशा भोसले के निधन पर सोनिया गांधी द्वारा भेजा गया शोक पत्र उनके बेटों आनंद और हेमंत को संबोधित है, जबकि हेमंत भोसले का निधन 2015 में ही हो चुका था। सरकारी संचार में एक गंभीर चूक। इसे मंज़ूरी कैसे मिल गई?'

सोनिया गांधी ने शोक पत्र में क्या लिखा?
'प्रिय आनंद और हेमंत, आपकी प्रिय माता आशा भोसले के निधन से भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। आशा भोसले एक महान हस्ती और आदर्श थीं, जिनके गीतों ने लाखों लोगों को आनंद दिया। उनकी गायन शैली व्यापक और बहुमुखी थी, जो शास्त्रीय संगीत से लेकर लोक संगीत और पॉप तक फैली हुई थी। उनकी आवाज अद्वितीय थी और उनके संगीत के माध्यम से व्यक्त की गई भावनाएं सार्वभौमिक थीं।'
आशा भोसले का संगीत हमेशी जीवित रहेगा-सोनिया गांधी
'उन्होंने हमारी कई भाषाओं में समान सहजता से गाया और वह हमारे लिए सदाबहार गीतों की एक समृद्ध विरासत छोड़ गई हैं, जो आज भी उतने ही प्रिय और सुने जाते हैं जितने कि उन्होंने पहली बार गाए थे। आशा जी का स्नेही व्यक्तित्व, उनकी स्वतंत्र भावना और उनकी संगीत प्रतिभा उनके गीतों के माध्यम से हमेशा जीवित रहेगी।'

'राष्ट्रीय धरोहर थीं आशा भोसले'
आशा भोसले एक राष्ट्रीय धरोहर थीं और मैं लाखों संगीत प्रेमियों के साथ उनके निधन पर शोक व्यक्त करती हूं। उनकी आत्मा को शांति मिले। दुःख की इस घड़ी में, मेरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं आपके और आपके परिवार के साथ हैं। ईश्वर आपको इस क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। मेरी हार्दिक संवेदनाएं।'














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