Xi Jinping North Korea: दोस्ती या चीन को सता रहा है कोई बड़ा डर? अचानक उत्तर कोरिया क्यों पहुंचे जिनपिंग
Xi Jinping North Korea visit: चीन के राष्ट्रपति शी जिगपिंग का उत्तर कोरिया दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं माना जा रहा है। ऐसे समय में जब किम जोन उन और पुतिन के बीच रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं, चीन अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने में जुटा है।
बीजिंग को चिंता है कि कहीं उत्तर कोरिया पूरी तरह रूस के प्रभाव में न चला जाए। यही वजह है कि शी जिनपिंग की यह यात्रा दोस्ती, सुरक्षा, क्षेत्रीय राजनीति और प्रभाव बनाए रखने की बड़ी कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

चीन के लिए उत्तर कोरिया इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर कोरिया चीन का पड़ोसी देश है और दोनों के बीच दशकों पुराने संबंध हैं। चीन नहीं चाहता कि उसकी सीमा के पास कोई बड़ा संकट पैदा हो। बीजिंग के लिए उत्तर कोरिया एक बफर स्टेट की तरह काम करता है, जो चीन और अमेरिकी प्रभाव वाले दक्षिण कोरिया के बीच स्थित है। अगर उत्तर कोरिया अस्थिर होता है तो इसका सीधा असर चीन की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए चीन हमेशा वहां स्थिरता बनाए रखना चाहता है।
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रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकी से क्यों बढ़ी चिंता?
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया और रूस के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। माना जा रहा है कि रूस ने उत्तर कोरिया को तेल और अन्य सहायता दी, जबकि उत्तर कोरिया ने सैन्य सहयोग किया। चीन को डर है कि अगर प्योंगयांग मॉस्को के ज्यादा करीब चला गया तो क्षेत्र में उसका प्रभाव कम हो सकता है और उसकी रणनीतिक पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
चीन-उत्तर कोरिया रिश्तों में दूरी क्यों आई?
हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिखी। 2024 में दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ भी काफी साधारण तरीके से मनाई गई। कई हाई-लेवल मुलाकातें नहीं हुईं और दोनों देशों के बीच संपर्क सीमित दिखाई दिया। दूसरी तरफ किम जोंग उन लगातार रूस के साथ रिश्ते मजबूत करते रहे। इससे यह संकेत मिला कि उत्तर कोरिया अब सिर्फ चीन पर निर्भर रहने के बजाय अपने दूसरे विकल्प भी तलाश रहा है।
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परमाणु कार्यक्रम पर चीन की क्या सोच है?
चीन उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम का खुलकर समर्थन नहीं करता। बीजिंग को लगता है कि अगर प्योंगयांग लगातार मिसाइल और न्यूक्लियर टेस्ट करता रहा तो अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा सकते हैं। यह स्थिति चीन के लिए रणनीतिक चुनौती बन सकती है। इसलिए चीन चाहता है कि उत्तर कोरिया पूरी तरह नियंत्रण से बाहर न जाए और क्षेत्र में तनाव भी बहुत ज्यादा न बढ़े।
शी जिनपिंग के दौरे का बड़ा संदेश क्या है?
इस यात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि चीन अभी भी उत्तर कोरिया को अपने सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में मानता है। बीजिंग यह दिखाना चाहता है कि क्षेत्रीय राजनीति में उसकी भूमिका अब भी मजबूत है। साथ ही चीन यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकी उसके हितों को नुकसान न पहुंचाए। इसलिए शी जिनपिंग का यह दौरा दोस्ती से ज्यादा प्रभाव, सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।












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