Asha Bhosle ने मौत से 4 दिन पहले पोते चिंटू से की ये बात, फिर अस्पताल के बेड पर हुआ ऐसा हाल, सदमे में परिवार
Asha Bhosle Grandson Chintu Bhosle: भारतीय संगीत की दिग्गज आवाज आशा भोसले के निधन ने पूरे देश को गहरे शोक में डाल दिया है। 12 अप्रैल 2026 को मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के चलते उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनके जाने से न सिर्फ फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है बल्कि परिवार के लिए भी ये नुकसान बेहद व्यक्तिगत और भावनात्मक है।
सिंगर के पोते चिंटू भोसले ने शेयर की ऐसी बात
दिवंगत सिंगर आशा भोसले की पोती जनाई भोसले अब तक इस सदमे से उबर नहीं पाई हैं और लगातार दादी को याद करते हुए भावुक पोस्ट शेयर कर रही हैं। वहीं अब सिंगर के पोते चिंटू भोसले ने भी दादी के आखिरी दिनों से जुड़े कुछ खास पल लोगों के साथ शेयर किए हैं।

'मौत से 4 दिन पहले भी बिल्कुल सामान्य थीं आशा भोसले'
-चिंटू भोसले ने एक इंटरव्यू में बताया कि मौत से 4 दिन पहले तक आशा भोसले पूरी तरह सामान्य थीं। चिंटू भोसले ने बताया कि उस दौरान वह दादी के साथ बैठकर आम खाते थे और दुनिया में चल रहे मुद्दों जैसेसे अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव पर चर्चा भी करते थे।
-चिंटू भोसले ने बताया कि उनकी दादी आशा भोसले भले ही ज्यादा उम्र की वजह से घर में ही रहती थीं लेकिन उन्हें देश और दुनिया की पूरी खबर रहती थी। वह बिल्कुल सामान्य और खुशहाल थीं। ऐसे में किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही दिनों में उनकी मौत हो जाएगी।
'आखिरी दिन भी कला के लिए समर्पित रहीं'
-आशा भोसले का कला के प्रति समर्पण उनके अंतिम दिनों में भी साफ झलक रहा था। चिंटू भोसले ने बताया कि निधन से ठीक एक दिन पहले वह तीन घंटे का मराठी नाटक देखने गई थीं।
-इतना ही नहीं आशा भोसले ने मंच पर जाकर कलाकारों को प्रोत्साहित भी किया था और उन्हें कला को जिंदा रखने की सीख भी दी थी। ये उनकी जिंदादिली और जुनून का सबसे बड़ा उदाहरण था।
'नींद में ही शांति से दुनिया को कहा अलविदा'
-चिंटू भोसले ने बताया कि आशा भोसले ने बेहद शांत और सुकून भरे तरीके से इस दुनिया को अलविदा कहा था। वह सोते-सोते ही हमेशा के लिए चली गईं। उन्होंने जाने से पहले किसी को भी परेशान नहीं किया।
-चिंटू भोसले ने बताया कि जब आशा भोसले को अस्पताल ले जाने की बात कही गई तो उन्होंने घर पर ही आराम करने की इच्छा जताई थी लेकिन तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वह एक दिन भी नहीं रह पाईं और उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
-पोते चिंटू भोसले के अनुसार उनकी दादी आशा भोसले अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना पसंद करती थीं। वैसे ही अपने अंतिम पल भी उन्होंने अपनी शर्तों पर बिताए। वह अस्पताल के बेड पर आराम से सो रही थीं। उन्होंने किसी को परेशान नहीं किया और चुपचाप इस दुनिया से चली गईं।
जनाई भोसले पर टूटा दुखों का पहाड़
आशा भोसले का परिवार इस समय उनके जाने के गम में डूबा हुआ है लेकिन सबसे ज्यादा असर उनकी पोती जनाई भोसले पर पड़ा है। चिंटू भोसले ने बताया कि दादी के जाने से जनाई पूरी तरह टूट चुकी हैं क्योंकि दोनों के बीच बेहद गहरा रिश्ता था। जनाई की परवरिश और संगीत के सफर में आशा भोसले का अहम योगदान रहा था। बचपन से ही दोनों ने साथ में कई स्टेज शोज किए थे। जनाई घर पर अपना पूरा टाइम दादी को ही देती थीं।
विरासत को जिंदा रखने का परिवार का संकल्प
-चिंटू भोसले ने कहा कि परिवार अब आशा भोसले की यादों और विरासत को सेलिब्रेट करने पर ध्यान दे रहा है। वह अक्सर साथ बैठकर डिनर करते हैं, पुरानी बातें याद करते हैं, हंसते हैं और आशा भोसले के एवरग्रीन गाने गुनगुनाते हैं।
-चिंटू भोसले ने कहा- ये सब अजीब लग सकता है लेकिन यही उनके जीने का तरीका है। दुख के बीच भी जिंदगी को आगे बढ़ाना जैसा आशा भोसले हमेशा सिखाती थीं।
संघर्ष से शिखर तक का सफर
आशा भोसले ने 92 साल की उम्र में अंतिम सांस ली और सात दशकों से अधिक समय तक भारतीय संगीत जगत पर राज किया। उन्होंने अलग-अलग भाषाओं में 12 हजार से ज्यादा गाने गाए।
आशा भोसले सिर्फ एक नाम नहीं, एक युग थीं
-कम उम्र में ही आर्थिक तंगी के चलते आशा भोसले ने गायन शुरू कर दिया था। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सिर्फ एक बेहतरीन सिंगर ही नहीं बल्कि आशा भोसले एक सफल बिजनेसवुमन भी थीं जिनके दुनियाभर में कई रेस्तरां और होटल्स हैं।
-आशा भोसले सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि एक युग थीं। उनकी आवाज, उनका जुनून और उनकी सीख आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।












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