Dussehra 2022 : दुर्ग में अनोखी Ramlila का मंचन, बुराई को खत्म करने गांव की बेटियों ने उठाया, तलवार और धनुष

दुर्ग, 05 अक्टूबर। Dussehra In Chhattisgarh छत्तीसगढ़ में असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाए जाने वाला दशहरा पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस मौके पर अहंकार के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया जाता है इसके साथ ही रामलीला का मंचन भी किया जाता है। इन लीलाओं में भगवान राम और रावण के बीच के संक्षिप्त कथा को संवाद के साथ मंचन किया जाता है। इन रामलीलाओं में हर जगह भले ही पुरुषों को राम, लक्ष्मण, रावण की भूमिका निभाने का अवसर मिलता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक ऐसा भी गांव है। जहां रामलीला की पूरी मंडली ही बालिकाओं की है।

कठिन अभ्यास के बाद होता है रामलीला मंचन

कठिन अभ्यास के बाद होता है रामलीला मंचन

छत्तीसगढ़ के गांव गांव में रामलीला मंडलियों के द्वारा दुर्गापूजा की समापन के बाद रामलीला का मंचन किया जाता है। इन लीलाओं में राम और सीता, हनुमान और रावण के पात्रों का किरदार निभाने वाले कलाकार अपनी भूमिका निभाते हैं। इन पात्रों की भूमिका को निभाने के लिए उन्हें कठिन अभ्यास करना पड़ता है। संस्कृत के संवादों को याद करना पड़ता है। जिसके कारण ग्रामीण अंचलों में इन किरदारों को पुरुष ही निभाते हैं।

गांव की बेटियां निभाती है रामायण के सभी किरदार

गांव की बेटियां निभाती है रामायण के सभी किरदार

लेकिन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पाटन विधासभा के ग्राम तर्रा में रामलीला के सभी किरदार पुरुष नहीं बल्कि महिलाएं निभाती हैं। Tarra गांव की वह जांबाज बेटियां नारी सशक्तिकरण की मिसाल पेश कर रही हैं। यहां हर साल रामलीला में रामायण के सभी किरदार गांव की बेटियां ही निभाती हैं।इतना ही नहीं रामायण के हर पात्र का किरदार वे बखूबी निभाती हैं। राम, रावण या सीता, हनुमान सभी पात्रों को निभाने में ग्राम तर्रा की बेटियां माहिर हो चुकी हैं।

शुरुआत में हुई परेशानी, लेकिन अब चौंक जाते हैं लोग

शुरुआत में हुई परेशानी, लेकिन अब चौंक जाते हैं लोग

इस रामलीला मंडली की शुरआत 3 साल पहले हुई थी । शुरुआत में इन बालिकाओं को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा। लेकिन वहीं अब मंच पर उतरतीं है लोग दंग रह जातें हैं कि ये वहीं कोमल और मासूम बालिकाएं है जो आज एक स्वर में पूरे जोश के साथ संवाद के माध्यम से गर्जना करतीं हैं। ये बालिकाएं कंधे पर धनुष, हाथों में गदा और तलवार लिए मंच पर प्रस्तुति देती हैं तब तालियों की गड़गड़ाहट से गांव गूंज उठता है।

गांव के बुजुर्गों ने लिया फैसला, पंचायत उठाती है पूरा खर्च

गांव के बुजुर्गों ने लिया फैसला, पंचायत उठाती है पूरा खर्च

गांव के सरपंच योगेश चन्द्राकर ने बताया कि तीन साल पहले गांव के बुजुर्गो ने मिलकर बेटियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक फैसला लिया। जिसमें गांव की रामलीला की जिम्मेदारी बेटियां को दी गई। जिसके बाद रामलीला में किरदार निभाने वाले पुरुषों ने अपनी बेटियों को आगे लाया, और बेटियां भी उत्साहित होकर आगे आई। जिसके बाद ग्राम तर्रा के पंचायत भवन परिसर में सभी बालिकाओं की ट्रेनिंग शुरू की गई। जहां देर शाम होते ही गांव की 30 बेटियां रामलीला की रिहर्सल में जुट जाती हैं। Dussehra 2022 यह तीसरा साल है। जब राम और रावण सहित पूरी रामलीला में अभिनय बेंटिया कर रही है। इस पूरे आयोजन का पूरा खर्च पंचायत उठाती है। इतना ही नहीं उन्हें जिस चीज की जरूरत होती है। उन्हें उपलब्ध कराई जाती है।

गांव में रामायण के पात्रों के रूप में अब हो रही पहचान

गांव में रामायण के पात्रों के रूप में अब हो रही पहचान

ग्राम तर्रा के रामलीला मंडली में शामिल शिवानी-लक्ष्मण, गोल्डी-अंगद, तोषिका- सीता, निकिता-राम, वर्षा-रावण, संतोषी-हनुमान, रेणुका-मेघनाथ की भूमिका में नजर आती हैं। ये सभी बालिकाएं 10 से 20 साल के उम्र की हैं। लगातार तीन साल से रामलीला के मंचन के कारण अपने किरदार में ढल चुकी बेटियों की पहचान अब गांव में रामायण के किरदारों के रूप में होने लगी है। राम बनी निकिता बताती हैं, कि राम का स्वाभाव सौम्य, शांत है। इस किरदार को पाकर वे अपने जीवन में भी शांति का अनुभव करती हैं।

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