Samyak Jain : 20 साल की उम्र में चली गई थी आंखों की रोशनी, UPSC 2021 में हासिल की 7वीं रैंक
दिल्ली, 31 मई: 'मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है' ये कहावत दिल्ली के रहने वाले सम्यक जैन पर बिल्कुल सटीक बैठती है। सम्यक जैन दृष्टिबाधित होने के बावजूद यूपीएससी 2021 की परीक्षा में शामिल हुए। हर बाधार को पार करते हुए सम्यक ने ना सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि 7वीं रैंक भी हासिल की। सम्यक उन सभी लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं, जो सिविल सेवा में जाना चाहते हैं। सम्यक का कहना है कि न देख सकने वाले व्यक्तियों को निराश होने की कतई जरूरत नहीं है। आवश्यकता बस मेहतन करने की है।
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20 साल की उम्र में चली गई आंखों की रोशनी
सम्यक जैन दिल्ली के रोहिणी में रहते हैं। 20 वर्ष की आयु में उनकी आंखों की रोशनी कम होना शुरू हुई और फिर धीरे-धीरे उन्हें सब कुछ दिखना बंद हो गया। बावजूद इसके उनका हौसला कम नहीं हुआ और उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसओएल से इंग्लिश ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद आईआईएमसी से इंग्लिश जर्नलिज्म का कोर्स किया। इसके बाद जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन में एमए की डिग्री हासिल की।

दूसरे प्रयास में पास की UPSC की परीक्षा
सम्यक जैन ने 2020 में भी यूपीएससी की परीक्षा दी थी, लेकिन सफल नहीं हो पाए थे। उन्होंने हार नहीं मानी और साल 2021 में एक बार फिर यूपीएससी की परीक्षा में शामिल हुए। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 7वीं रैंक हासिल की।

दृष्टिबाधित होने के बावजूद पार की हर मुश्किल
सम्यक जैन दृष्टिबाधित हैं। इसके बावजूद उन्होंने हर मुश्किल का पार किया और यूपीएससी की परीक्षा पास की। रिजल्ट आने के बाद मीडिया से बाचतीत में उन्होंने कहा, "मैं रिजल्ट देखकर बेहद खुश हूं। मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था मेरी सिंगल डिजिट में इतनी अच्छी रैंक आएगी। आज ऐसा लग रहा है, जैसे मेरे सारे सपने सच हो गए हों। इस परीक्षा के बारे में मैंने जितना सोचा था, मुझे उससे ज्यादा मिला। मैं इतना खुश हूं कि अपनी भावनाएं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता"

सिविल सेवा के जरिए लोगों की मदद करना चाहते हैं सम्यक जैन
सम्यक का कहना है कि सिविल सर्विसेज एक ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए जरूरतमंद लोगों की काफी मदद की जा सकती है इसलिए उन्होंने इसे चुना। सम्यक ने यूपीएससी के लिए अंतरराष्ट्रीय संबंध और राजनीति शास्त्र जैसे विषय चुने थे। सम्यक ने अभ्यर्थियों को प्ररेणा देते हुए कहा कि न देख सकने वाले व्यक्तियों को निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। मेहनत करने से सब आसान हो जाता है।

मां बनी थीं सम्यक की लेखक
सम्यक ने इस सफलता का बड़ा श्रेय उनके परिवार खासतौर पर मां को दिया है। सम्यक ने बताया कि यूपीएससी के नियमों के मुताबिक, परीक्षा में उन्हें उत्तर लिखने के लिए लेखक की आवश्यकता थी और यह आवश्यकता सम्यक की मां वंदना जैन ने पूरी की। यानी सम्यक प्रशनों के उत्तर बोलते थे और उनकी मां इन उत्तरों को आंसरशीट पर लिखती थीं। सम्यक के पिता एअर इंडिया में कार्यरत है।












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