दिल्ली की मुस्तफाबाद सीट से AIMIM के Tahir Hussain ने शुरू किया चुनाव प्रचार, कस्टडी पैरोल के कितने रुपए लगे?
Tahir Hussain Delhi Mustafabad AIMIM: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में मुस्तफाबाद विधानसभा सीट से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के उम्मीदवार ताहिर हुसैन ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत कर दी है। दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को कोर्ट से कस्टडी पैरोल मिलने के बाद वे बुधवार को दिल्ली पुलिस की निगरानी में चुनाव प्रचार के लिए क्षेत्र में पहुंचे हैं। ताहिर हुसैन को यह कस्टडी पैरोल रोजाना की 2.47 लाख रुपए की पड़ी है।
दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन ने बुधवार को मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। ताहिर हुसैन ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब उन्हें जेल जाने के बाद पार्टी से निकाल दिया गया, तो मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को क्यों नहीं हटाया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी में दोहरी नीति अपनाई जाती है। ताहिर ने कहा कि नरेश बालियान जेल गए तो उनकी पत्नी को टिकट दिया गया, लेकिन उनके परिवार को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने अपनी भावनात्मक अपील में कहा कि वे नाइंसाफी के शिकार हैं और जनता से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।
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ताहिर हुसैन ने कस्टडी पैरोल पर रिहाई को संविधान और न्यायपालिका की वजह से संभव बताया। उन्होंने कहा कि आज चुनाव दो मुख्य पार्टियों के बीच लड़ा जा रहा है-एक अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी और दूसरी नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे किसी ब्रांड के झांसे में न आएं, बल्कि अपने हक और क्षेत्र की समस्याओं को ध्यान में रखकर वोट करें।
Tahir Hussain in Delhi Election 2025: दिल्ली चुनाव 2025 में ताहिर हुसैन
उन्होंने आरोप लगाया कि जनता को भ्रमित किया जा रहा है-एक पार्टी मोदी के नाम पर और दूसरी केजरीवाल के नाम पर वोट मांग रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि स्कूलों की स्थिति खराब है और बच्चे टेंट में पढ़ने को मजबूर हैं। ताहिर हुसैन ने कहा कि वर्तमान चुनाव में तीन नामों की चर्चा हो रही है-केजरीवाल, मोदी, और ताहिर ओवैसी। उन्होंने कहा कि सत्ता की लड़ाई आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच है, लेकिन उनकी लड़ाई जनता के हक, बिजली, पानी और स्कूलों की बेहतर व्यवस्था के लिए है।
मुस्तफाबाद से AIMIM प्रत्याशी ताहिर हुसैन (AIMIM candidate from Mustafabad Tahir Hussain)
उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने मुस्तफाबाद से AIMIM प्रत्याशी ताहिर हुसैन को दिल्ली चुनाव 2025 में महज 6 दिनों के लिए प्रतिदिन 12 घंटे चुनाव प्रचार की अनुमति दी है। इस कस्टडी पैरोल पर आने वाले खर्च को ताहिर हुसैन को स्वयं वहन करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, छह दिन की ताहिर हुसैन की कस्टडी पैरोल प्रक्रिया पर कुल 14.82 लाख रुपये का खर्च आएगा, जिसका भुगतान उन्हें खुद करना होगा। प्रत्येक दिन के लिए 2.47 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है, जिसमें से दो दिन का भुगतान एडवांस में करना होगा। यह राशि सुरक्षा और सरकारी वाहन पर होने वाले खर्च के लिए जमा करनी होगी।
कोर्ट के आदेशानुसार, ताहिर हुसैन को दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में प्रचार के दौरान अपने खिलाफ चल रहे मामलों पर कोई भी टिप्पणी करने से मना किया गया है। साथ ही, उन्हें किसी भी गवाह से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचार समाप्त होने के बाद प्रतिदिन उन्हें जेल वापस लौटना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने ताहिर हुसैन को चुनाव प्रचार की अनुमति देते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने घर नहीं जा सकेंगे और न ही किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर सकेंगे। हालांकि, उन्हें अपनी पार्टी के कार्यालय आने-जाने और चुनावी गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति दी गई है।
दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए 5 फरवरी को मतदान होना है, जबकि 3 फरवरी को चुनाव प्रचार थम जाएगा। चुनाव के नतीजे 8 फरवरी को घोषित किए जाएंगे। इस बार 699 उम्मीदवार भाग्य आजमा रहे हैं। इनमें ताहिर हुसैन जेल में रहते हुए असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
कस्टडी पैरोल क्या होती है? (What is custody parole?)
कस्टडी पैरोल एक विशेष प्रकार की अस्थायी रिहाई होती है, जिसमें किसी विचाराधीन या दोषी कैदी को कुछ समय के लिए जेल से बाहर जाने की अनुमति दी जाती है, लेकिन यह पूरी तरह पुलिस या अन्य सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में होता है। इसे आमतौर पर किसी आवश्यक कार्य, जैसे कि परिवार के किसी सदस्य के अंतिम संस्कार, परीक्षा देने, विवाह, या अन्य अत्यावश्यक परिस्थितियों के लिए दिया जाता है।
इस मामले में, ताहिर हुसैन को कोर्ट से कस्टडी पैरोल इसलिए मिली है ताकि वे चुनाव प्रचार कर सकें, लेकिन इस दौरान उन्हें कई शर्तों का पालन करना होगा, जैसे कि रोज़ाना चुनाव प्रचार के बाद जेल लौटना, गवाहों से न मिलना, और अपने खिलाफ चल रहे मुकदमों पर टिप्पणी न करना।












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