Rekha Gupta: रेखा गुप्ता की जीत और दिल्ली CM बनने के पीछे किसका हाथ? कदम-कदम पर मिला साथ, कैसे दी सबको मात?
Rekha Gupta Delhi New CM: दिल्ली की राजनीति में गुरुवार, 20 फरवरी 2025 को एक नया अध्याय जुड़ गया, जब रेखा गुप्ता ने दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री (Delhi New CM 2025) के रूप में शपथ ली। रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी की वंदना कुमारी को 29,595 वोटों से हराया। इसके बाद, दिल्ली सीएम फेस की रेस में सबसे आगे रहीं।
1992 से राजनीति में कॉलेज समय से ही कदम रखने वाली रेखा गुप्ता को तीन दशक (30 साल) बाद बड़ी सफलता मिली। पहली बार विधायक बनी और सीएम की कुर्सी पर बैठ गईं। सभी के जहन में यह सवाल उठना लाजमी है कि रेखा गुप्ता की चुनावी जीत और दिल्ली सीएम बनने के पीछे किसका हाथ? आइए जानते हैं...

Rekha Gupta Ki Jeet Ke Piche Kaun: रंग लाई रेखा की तीन दशक की तपस्या?
रेखा गुप्ता का राजनीतिक सफर तीन दशकों से अधिक का है। 1992 में दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज में पढ़ाई के दौरान, उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़कर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 1995-96 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की सचिव और 1996-97 में अध्यक्ष बनीं। इसके बाद, उन्होंने भाजपा में विभिन्न संगठनात्मक भूमिकाएं निभाईं, जैसे दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष। उनकी यह संगठनात्मक दक्षता और जमीनी स्तर पर सक्रियता ने उन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया।
Rekha Gupta Husband Manish Gupta Support: रेखा की सफलता के पीछे पति मनीष का हाथ?
रेखा गुप्ता की सफलता में उनके परिवार, विशेषकर उनके पति मनीष गुप्ता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 1998 में शादी के बाद, मनीष गुप्ता ने हमेशा रेखा का समर्थन किया, जिससे वह राजनीति में सक्रिय रह सकीं। खा गुप्ता जब-जब राजनीतिक कार्यक्रमों में शिरकत करने व चुनावी दौर में व्यस्त रहती, तो पीछे से उनके पति मनीष पूरा सहयोग करते। रेखा गुप्ता के दो बच्चे हैं, बेटी हर्षिता (Harshita Gupta), जो ऑस्ट्रेलिया में हैं, और बेटा निकुंज (Nikunj Gupta), जो अभी पढ़ाई कर रहा है। परिवार के इस समर्थन ने रेखा को अपने राजनीतिक लक्ष्यों की ओर बढ़ने में मदद की।

मुख्यमंत्री पद की रेस में कैसे दी प्रवेश को मात?
दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई नाम थे, जिनमें प्रवेश वर्मा प्रमुख थे। हालांकि, भाजपा ने परिवारवाद से बचते हुए और महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना। उनकी स्वच्छ छवि, संगठनात्मक कौशल और जमीनी स्तर पर सक्रियता ने उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बनाया। रेखा गुप्ता ने स्वयं कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह दिल्ली की मुख्यमंत्री बनेंगी, और यह उनके लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है।
रेखा गुप्ता की मुख्यमंत्री बनने की कहानी उनके लंबे राजनीतिक सफर, परिवार के समर्थन और संगठनात्मक कौशल का परिणाम है। भाजपा ने महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है, जिससे दिल्ली की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है।












Click it and Unblock the Notifications