Nithari Case: 18 साल बाद निठारी कांड पर ऐतिहासिक फैसला, SC ने किया सुरेंद्र कोली की रिहाई का रास्ता साफ

Nithari Case SC Judgment: देश को झकझोर देने वाले निठारी हत्याकांड से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 11 नवंबर को अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले के आरोपी सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार कर ली है।

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने 2011 के अपने पुराने फैसले को पलटते हुए कोली को सभी आरोपों से बरी कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब कोली के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

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कोली अब तक केवल रिम्पा हलदर हत्याकांड में दोषी था, जबकि 12 अन्य मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट उसे पहले ही बरी कर चुका था। अदालत ने कहा कि अब कोली पर लगे आरोप साबित नहीं होते हैं, इसलिए उसे तुरंत रिहा किया जाए।

कोर्ट ने क्या कहा?

क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने कहा, "हम याचिका स्वीकार करते हैं। 2011 में पारित पुनर्विचार निर्णय को वापस लिया जाता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को बहाल किया जाता है। अभियुक्त को सभी आरोपों से बरी किया जाता है। उसे तत्काल जेल से रिहा किया जाए।"

इस फैसले के साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोली के खिलाफ दोषसिद्धि केवल एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी के आधार पर हुई थी, जो पर्याप्त सबूत नहीं है। कोर्ट ने माना कि बाकी सभी मामलों में बरी होने के बाद यह स्थिति "कानूनी दृष्टि से असामान्य" हो गई थी।

क्या था निठारी हत्याकांड?

निठारी कांड साल 2005 और 2006 के बीच हुआ था, जिसने पूरे देश को हिला दिया था। यह मामला दिसंबर 2006 में सामने आया जब नोएडा के निठारी गांव में एक घर के पास नाले से कई कंकाल बरामद हुए। जांच में सामने आया कि जिस घर से ये कंकाल मिले, वह कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर का था, और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू नौकर के तौर पर काम करता था।

कोली पर आरोप था कि उसने कई बच्चों की हत्या कर उनके शवों के टुकड़े किए और नाले में फेंक दिए। इस हत्याकांड ने देशभर में सनसनी फैला दी थी।

कोर्ट ने क्यों दी राहत?

सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान ही संकेत दे दिए थे कि मामले में कोली की दोषसिद्धि कमजोर सबूतों पर आधारित है। कोर्ट ने कहा था कि केवल एक बयान और चाकू की बरामदगी के आधार पर फांसी की सजा देना उचित नहीं था।

इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार की और उसे बरी करने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद अब सुरेंद्र कोली लगभग 18 साल बाद जेल से बाहर आ सकेगा।

क्या है क्यूरेटिव याचिका?

क्यूरेटिव याचिका वह अंतिम कानूनी उपाय होती है जिसके ज़रिए कोई दोषी व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ आए निर्णय पर पुनर्विचार की गुहार लगा सकता है। यह केवल विशेष परिस्थितियों में स्वीकार की जाती है, जब अदालत को लगता है कि पहले के निर्णय में गंभीर गलती हुई है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला निठारी कांड के सबसे चर्चित आरोपी कोली के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। हालांकि यह मामला अब भी देश के आपराधिक न्याय इतिहास के सबसे भयावह अध्यायों में दर्ज रहेगा। अदालत के इस आदेश के बाद एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया, सबूतों की विश्वसनीयता और लंबे समय तक चली जांच पर सवाल उठने लगे हैं।

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