Kiran Bedi Tillu Tajpuriya की हत्या पर बोलीं, पुलिस की दोबारा ट्रेनिंग जरूरी, मदद के लिए नाम भी गिनाए, VIDEO
Kiran Bedi Tillu Tajpuriya की हत्या के बाद पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग फिर से कराने पर जोर दे रही हैं। उन्होंने कहा, हमले के बाद कैसे कार्रवाई करनी है, इस बारे में फिर से सोचने की जरूरत है।

Kiran Bedi Tillu Tajpuriya की चाकुओं से गोदकर हत्या और पुलिसर्मियों की मौन मौजूदगी पर कहती हैं कि हमले जैसी सिचुएशन में पुलिसकर्मियों को कैसे रिएक्ट करना है, इसे दोबारा सीखना पड़ेगा।
तिहाड़ जेल में गैंगवॉर के दौरान टिल्लू ताजपुरिया की हत्या के मामले में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की रिटायर्ड अधिकारी किरण बेदी ने कहा है कि नए सिरे से पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग देनी चाहिए।
उन्होंने कहा, प्रशिक्षण पर फिर से काम करने की जरूरत है - कैसे हस्तक्षेप करना है, इसका कुछ पूर्वाभ्यास होना चाहिए। हमें सजगता पर काम करने की जरूरत है। बता दें कि किरण बेदी भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं।
किरण बेदी ने कहा, हमारे पास होगा प्रशिक्षण का मॉडल होना चाहिए। मॉक ट्रेनिंग होनी चाहिए। तिहाड़ में बंद कैदियों से मिलने आने वाले आगंतुकों को सामान्य आगंतुकों से अलग किया जाना चाहिए।
आगंतुकों को अलग से पहचानने का बंदोबस्त किया जाना चाहिए। खतरनाक और गैंगस्टर किस्म के कैदियों को कोर्ट में पेश किए जाने पर किरण बेदी वीडियो परीक्षण का सुझाव देती हैं।
उन्होंने कहा कि जेल के अंदर अधिकारियों के पास हथियार नहीं होना कड़ी चुनौती है। तिहाड़ में अटैक होने पर जेल के अंदर मौजूद अधिकारी बिना हथियार कैसे एक्शन लें, इस पर फिर से सोचना जरूरी है।
प्रशिक्षण और परीक्षण संबंधी सुझावों के अलावा किरण बेदी ने कई सीनियर और रिटायर्ड लेकिन अपने काम में माहिर अधिकारियों की मदद लेने का भी सजेशन देती हैं। उन्होंने कई लोगों के नाम भी गिनाए।
पुराने एक्सपीरियंस वाले लोगों में जयदेव सारंगी, सुनील गुप्ता, पीआर मीणा और तरसेम के नाम गिनाते हुए किरण बेदी ने कहा कि उनके सेवाकाल में भी यूपी के कई गैंग्स्टर तिहाड़ लाए गए थे, लेकिन उसके लिए पुलिस का पुख्ता बंदोबस्त था।
डिप्टी सुपरिटेंडेंट, असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट जैसे अधिकारियों के अनुभव का इस्तेमाल करने पर जोर देते हुए किरण बेदी कहती हैं कि तिहाड़ के जेल सुपरिटेंडेंट को पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग पर नए सिरे से मंथन करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, पुलिस महानिदेशक को जब तक अनुभव मिलता है, तब तक उनके पास जाने या रिटायरमेंट का समय आ जाता है। ऐसे में प्रोसेस अधूरा रह जाता है। इस पर भी विचार करने की जरूरत है।












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