Cash Scandal में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें बढ़ी, मुख्य न्यायाधिश संजीव खन्ना ने मांगा इस्तीफा
Justice Yashwant Varma Cash Scandal: कैश कांड में फंसे दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। जस्टिस वर्मा के घर पर नकदी मिलने के आरोपों की जांच कर रही तीन-सदस्यीय न्यायिक समिति ने आरोपों की पुष्टि की है।
मीडिया रिपोर्टस की मानें तो इसके बाद चीफ जस्टिस ऑप इंडिया (CJI) संजीव खन्ना ने न्यायमूर्ति वर्मा से इस्तीफा देने का आग्रह किया। हालांकि जस्टिस वर्मा ने इस इस्तीफे के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।

Yashwant Varma Cash Scandal: राष्ट्रपति को भेजी गई जांच रिपोर्ट
गुरुवार, 8 अप्रैल को जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज में कहा गया है कि सीजेआई खन्ना ने इन-हाउस प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले से अवगत कराया है। CJI ने तीन सदस्यीय समिति की 3 मई 2025 की रिपोर्ट और न्यायमूर्ति वर्मा के भेजे गए जवाब को संलग्न कर एक पत्र भेजा है।
Justice Yashwant Varma Cash Scandal: क्या है पूरा मामला?
यह मामला तब सामने आया जब 22 मार्च 2025 को न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना हुई। आग बुझाने के दौरान उनके घर से काफी मात्रा में नकदी मिलने का आरोप लगा। इसके बाद CJI ने इस गंभीर मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय उच्च न्यायिक समिति का गठन किया।
जांच समिति में शामिल थे वरिष्ठ न्यायाधीश
- न्यायमूर्ति शील नागू, मुख्य न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय
- न्यायमूर्ति जी एस संधवेलिया, मुख्य न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय
- न्यायमूर्ति अनु शिवरामन, न्यायाधीश, कर्नाटक उच्च न्यायालय
समिति को निर्देश दिया गया था कि वह इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करे और यह पता लगाए कि न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से नकदी वाकई मिली थी या नहीं, और यदि मिली थी, तो उसका स्रोत क्या था।
Justice Yashwant Varma Cash Scandal: जांच रिपोर्ट के बाद CJI दिया इस्तीफे का विकल्प
समिति ने अपनी रिपोर्ट 3 मई 2025 को CJI को सौंप दी। इसके बाद 4 मई को प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने न्यायमूर्ति वर्मा को रिपोर्ट की एक प्रति भेजी और उन्हें इस्तीफा देने का विकल्प दिया। Indian Express के मुताबिक, रिपोर्ट के साथ भेजे गए पत्र में CJI ने लिखा कि इन-हाउस प्रक्रिया के अंतर्गत यदि न्यायमूर्ति वर्मा स्वयं पद से हटते हैं, तो इससे न्यायपालिका की गरिमा बनी रहेगी।
CJI द्वारा दिए गए विकल्प के जवाब में, 6 मई 2025 को न्यायमूर्ति वर्मा ने अपना लिखित उत्तर भेजा, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए इस्तीफा देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
अब चूंकि CJI ने यह पूरा मामला औपचारिक रूप से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास भेज दिया है, तो यह माना जा रहा है कि आगे की कार्रवाई के लिए संवैधानिक स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। इस प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच विमर्श जारी रह सकता है।
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