नाम बदलने के विरोध में उतरा AIIMS दिल्ली का फैकल्टी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र
नई दिल्ली, 16 सितंबर। देशभर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के नाम बदलने की खबरों के बीच दिल्ली एम्स के फैकल्टी एसोसिएशन (एफएआईएमएस) ने चिंता जताई है। इस संबंध में फैकल्टी ने गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया को पत्र भी लिखा है। पत्र में कहा गया है कि एफएआईएमएस को मीडिया से एम्स के नाम बदलने की खबरों का पता चला था। इसके बाद प्रस्ताव को लेकर एफएआईएमएस ने सभी संकाय सदस्यों से राय ली और संकाय के सभी सदस्य एम्स के नाम को बदलने के विरोध में हैं।

स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र में संकाय के सदस्यों की तरफ से कहा गया है कि अगर नाम बदल दिया जाता है तो एम्स दिल्ली की आइडेंटिटी पर फर्क पड़ेगा। क्योंकि संस्थान की पहचान इसी नाम से होती है। इसलिए एफएआईएमएस आपसे (केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री) अनुरोध करता है कि कृपया एम्स दिल्ली सहित अन्य का नाम बदलने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार न करें। वहीं, पत्र में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि नाम नहीं बदलने की वजह से प्रीमियर और मेंटर संस्थान की स्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
पत्र के जरिए स्वास्थ्य मंत्री से एफएआईएमएस ने पहले से लंबित पड़े फैकल्टी की नियुक्ति सहित कई मांगों का भी जिक्र करते मीटिंग करने का भी अनुरोध किया गया है। एफएआईएमएस का मानना है कि इससे एम्स की पहचान को नुकसान होगा। एम्स को 1956 में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल के लिए एक त्रिमूर्ति मिशन ( trinity mission ) के तहत बनाया गया था। अपने स्थापना के बाद से ही ये संस्थान अपने मिशन में सफल हुए हैं।
वहीं, एफएआईएमएस ने नाम नहीं बदलने को लेकर ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड और केंब्रिज जैसे विदेश के संस्थानों का भी जिक्र किया है। एफएआईएमएस का कहना है कि ये संस्थान आज भी दुनियाभर में अपने नाम की वजह से जाने जाते हैं। अगर इनका नाम बदल दिया जाएगा तो ये संस्थान अपनी पहचान खो देंगे और वैश्विक स्तर पर इन्हें कोई नहीं जानेगा। ऐसे में एम्स दिल्ली सहित अन्य शहरों के एम्स का नाम न बदला जाए। क्योंकि नाम बदलने की वजह से संस्थान देश के अलावा विदेशों में भी अपनी पहचान खो देगा।
आपको बता दें कि केंद्र सरकार (Central government) ने दिल्ली सहित देश के 23 एम्स का नाम स्थानीय नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों, क्षेत्र की ऐतिहासिक घटनाओं या स्मारकों के नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से भी सुझाव मांगे गए थे। पहले चरण के तहत एम्स भोपाल, एम्स भुवनेश्वर, एम्स जोधपुर, एम्स पटना, एम्स रायपुर, एम्स ऋषिकेश, एम्स नागपुर, एम्स रायबरेली और एम्स मदुरै के नामों को बदलने का सुझाव दिया गया है।
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