दिल्ली के चिड़ियाघर में ही नहीं सुरक्षित हैं जानवर! दी जा रही एक्सपायर्ड दवाएं
आप दिल्ली आते होंगे तो चिड़ियाघर जाते ही होंगे लेकिन अब वहां रहने वाले जानवरों के साथ भी गंदा खेल खेला जा रहा है।
नई दिल्ली। देश के किसी भी हिस्से से कोई भी दिल्ली आए वो यहां के चिड़ियाघर जरूर घूमना चाहता है। अगर साथ में बच्चे हैं तो फिर क्या पूछना!
लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि दिल्ली का चिड़ियाघर ना केवल जानवरों की मौतों की संख्या को कम कर के लोगों के सामने रख रहा है साथ ही गलत पास्टमोर्टम रिपोर्ट भी पेश कर रहा है।
इतना ही नहीं एक बात यह भी सामने आई कि जानवरों को एक्सपायर्ड दवाएं दी जा रही हैं।

रिकॉर्ड नहीं हैं विश्वसनीय
एक जांच में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) ने पाया है कि कैटमाइन नाम की महंगी दवा से जुड़े रिकार्ड विश्वनीय नहीं थे।
जानकारी के मुताबिक इस दवा का प्रयोग इस्तेमाल पर किया जाता है। यह दर्द खत्म करने और बेहोशी की दवा है।
प्राधिकरण ने जांच में यह भी पाया की चिड़ियाघर के जानवरों के लिए ऐसी दवाएं प्रयोग में लाई जा रही थी जो एक्पायर हो चुकी थीं। इन एक्सपायर दवाओं में रेप्लांटा नाम की दवा भी थी, जिसका प्रयोग किया जा हा था।
जांच में यह भी पाया गया कि दवाओं का रिकॉर्ड भी पूरा नहीं था। जांच में प्राधिकरण ने पाया कि कैटमाइन की जितनी सप्लाई की गई थी, उसका सिर्फ 20% ही प्रयोग किाय गया था।
बाहर बेची जा रही हैं दवाएं
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एक अधिकारी ने इस मामले में बताया कि शक है कि दवाएं बाहर बेची जा रही है, क्योंकि कागजातों में एंट्री और स्टॉक रिकार्ड में कोई मेल नहीं है। इसे बाहर इसलिए बेचा जा सकता है क्योंकि काले बाजार में इसकी कीमत अच्छी मिलती है।
जांच के दौरान मिली एक्सपायर दवा, रेप्लांटा 2008 में बनी थी और इसकी एक्सपायरी डेट 2010 में थी लेकिन रजिस्टर में इसका जिक्र नहीं है। ऐसा काम चिड़ियाघर के लोगों ने अपराध छिपाने के लिए किया।
इस मामले की जानकारी होने पर महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और पशु अधिकार एक्टिविस्ट मेनका गांधी ने वन व पर्यावरण मंत्रालय पत्र लिख कर चिड़ियाघर के निदेशक और अन्य स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।












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