Delhi Riots 2020: Umar Khalid की पुनर्विचार याचिका SC से खारिज, दंगों में मारे गए थे 53 लोग-700 से ज्यादा घायल

Delhi Riots 2020 Umar Khalid News Update: सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद की पुनर्विचार याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि 1 जनवरी 2026 के फैसले में कोई ठोस आधार या गलती नहीं दिखती, इसलिए समीक्षा की जरूरत नहीं है।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने स्पष्ट कहा कि पुनर्विचार याचिका और संलग्न दस्तावेजों की जांच के बाद हमें 1 जनवरी 2026 के फैसले की समीक्षा का कोई ठोस आधार नहीं मिला। तदनुसार, याचिका खारिज की जाती है। साथ ही कोर्ट ने खालिद की अपील को खुली अदालत में सुनवाई की मांग भी ठुकरा दी। यह फैसला उमर खालिद के लिए बड़ा झटका है, जो फरवरी 2020 के दंगों से जुड़े UAPA मामले में सितंबर 2020 से लगातार जेल में हैं।

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सुप्रीम कोर्ट का 1 जनवरी 2026 का फैसला: क्या था पूरा मामला?

5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली दंगों की 'बड़ी साजिश' में दोनों की भूमिका पर प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत हैं।

हालांकि, कोर्ट ने पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी थी और साफ किया था कि सभी आरोपियों की स्थिति एक समान नहीं है। खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ UAPA (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत प्रथम दृष्टया केस बनता है। कोर्ट ने कहा था कि दोनों दंगों की 'योजना बनाने, लामबंदी करने और रणनीतिक दिशा-निर्देश देने' में शामिल थे। साथ ही यह भी कहा गया था कि संरक्षित गवाहों की जांच पूरी होने या जमानत आदेश के एक साल बाद वे नई जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं।

Umar Khalid Cases: उमर खालिद पर क्या-क्या आरोप?

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि उन्होंने 24-25 फरवरी 2020 को भड़काऊ भाषण दिए थे। ठीक उसी समय जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर थे।

पुलिस का दावा है कि ये भाषण CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिए गए थे, जिन्होंने बाद में हिंसा को भड़काया। कुल 18 लोगों को इस साजिश मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से अब तक 11 को जमानत मिल चुकी है।

Delhi Riots 2020 Updates: दिल्ली दंगों 2020, क्या-क्या हुआ था?

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे CAA (नागरिकता संशोधन अधिनियम) और NRC के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे। इन दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से ज्यादा घायल हुए। दिल्ली पुलिस ने इसे 'संगठित साजिश' करार दिया था। उमर खालिद उन प्रमुख चेहरों में शामिल हैं जिन पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनों को हिंसक रूप देने में भूमिका निभाई।

अब क्या होगा? कानूनी रास्ते और आगे की संभावनाएं

पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद उमर खालिद के पास अब मुख्य रूप से दो विकल्प बचे हैं:

  • नई जमानत याचिका दाखिल करना (संरक्षित गवाहों की जांच पूरी होने या पिछले आदेश के एक साल बाद)।
  • मेरिट पर ट्रायल कोर्ट में अपना पक्ष रखना।

कोर्ट ने पहले ही कहा था कि खालिद और शरजील इमाम की स्थिति अन्य आरोपियों से अलग है, इसलिए उनकी जमानत पर अलग से विचार किया जाएगा।

इस फैसले का मतलब

यह फैसला UAPA जैसे सख्त कानूनों के तहत जमानत मिलने की कठिनाई को फिर से रेखांकित करता है। UAPA में जमानत पाने के लिए आरोपी को 'दोहरी संतुष्टि' का सिद्धांत पूरा करना पड़ता है, यानी कोर्ट को यह विश्वास होना चाहिए कि आरोपी निर्दोष है और जमानत देने से जांच पर असर नहीं पड़ेगा।

दिल्ली दंगों का मामला अब भी संवेदनशील बना हुआ है। 18 आरोपियों में से 11 को जमानत मिल चुकी है, लेकिन उमर खालिद और कुछ अन्य अभी भी जेल में हैं।

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