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Delhi pollution: दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट फायर, सरकार की लगा दी क्लास, क्या-क्या कहा?

Delhi pollution Supreme Court Hearing: दिल्ली-एनसीआर के दमघोंटू प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और सरकार को लगाई गई फटकार ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि अब तक के तात्कालिक उपाय पूरी तरह विफल रहे हैं। कोर्ट ने प्रदूषण को अमीरों और गरीबों के बीच भेदभाव पैदा करने वाला कारक बताया, जहां संपन्न लोग तो एयर प्यूरीफायर और वैक्यूम क्लीनर से सुरक्षित हैं, लेकिन गरीब बच्चों और मजदूरों की जान दांव पर है।

प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर टोल वसूली और स्कूल बंदी जैसे कदमों को कोर्ट ने 'अस्थायी समाधान' करार देते हुए 6 जनवरी तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

Delhi pollution Supreme Court

वैक्यूम क्लीनर और मिड-डे मील का संकट

सुनवाई के दौरान वकील गुरुस्वामी ने मार्मिक दलील दी कि स्कूल बंद होने से 85% गरीब बच्चों का खाना (मिड-डे मील) बंद हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गरीब बच्चों के घरों में 'वैक्यूम क्लीनर' हैं जो वे घर पर सुरक्षित रह सकेंगे? कोर्ट ने माना कि हाइब्रिड मॉडल अमीरों के पक्ष में है, जबकि गरीब बच्चा जो पैदल स्कूल जाता है, प्रदूषण में योगदान न देते हुए भी इसका सबसे ज्यादा शिकार हो रहा है।

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'वकील ही बन गए हैं एक्सपर्ट' - कोर्ट का तंज

सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान वकीलों के अनावश्यक हस्तक्षेप पर तंज कसते हुए कहा कि आज विशेषज्ञों से सलाह कम मिलती है और वकील ही एक्सपर्ट बन जाते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि प्रदूषण की समस्या का हल कानूनी बहस से नहीं, बल्कि विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए 'लॉन्ग टर्म प्लान' से निकलेगा। कोर्ट ने विंटर वैकेशन को पहले करने का सुझाव भी दिया ताकि प्रदूषण के पीक समय में बच्चे घर पर सुरक्षित रह सकें।

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एमसीडी को फटकार: 'क्या सीपी में भी टोल लगाओगे?'

ट्रैफिक जाम और उससे होने वाले धुएं पर कोर्ट ने एमसीडी को कड़ी फटकार लगाई। सीजेआई ने पूछा कि क्या आप पैसों के लालच में कल कनॉट प्लेस (CP) के अंदर भी टोल प्लाजा बना देंगे? कोर्ट ने निर्देश दिया कि 31 दिसंबर तक टोल शुल्क नहीं लेना चाहिए ताकि गाड़ियों की लंबी कतारें न लगें। कोर्ट ने नेशनल हाईवे पर टोल प्लाजा के बीच की दूरी बढ़ाने और ट्रैफिक डायवर्ट करने के भी निर्देश दिए।

मजदूरों को लेकर कोर्ट ने जताई गहरी चिंता

प्रदूषण के कारण निर्माण कार्यों पर लगे बैन से प्रभावित मजदूरों को लेकर कोर्ट ने गहरी चिंता जताई। एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि 2.5 लाख लेबर रजिस्टर किए गए हैं, जिनमें से 35 हजार का वेरिफिकेशन हो चुका है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन मजदूरों के बैंक खातों में सीधे पैसा भेजा जाए। अब इस पूरे मामले की अगली समीक्षा 6 जनवरी को होगी, जहाँ राज्यों को अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

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