केजरीवाल सरकार की सौगात: सीमापुरी में स्कूल में बनवाया 2 वर्ल्ड क्लास एकेडमिक ब्लॉक, बच्चों को समर्पित किया

Delhi Government: अरविंद केजरीवाल सरकार से उत्तरी-पूर्वी दिल्ली को एक और सौगात मिली है। शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए केजरीवाल सरकार ने सीमापुरी की तंग गलियों में 4 मंजिला शानदार नए स्कूल बिल्डिंग का निर्माण करवाया है।

विश्वामित्र सर्वोदय विद्यालय, सीमापुरी की ये नई स्कूल बिल्डिंग यहां की घनी आबादी वाले क्षेत्र के लिए शानदार शिक्षा का केंद्र बनेगी। मंगलवार को शिक्षा मंत्री आतिशी व दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने उद्घाटन कर इसे बच्चों को समर्पित किया।

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इस मौके पर शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि, "विश्वामित्र सर्वोदय कन्या विद्यालय के नए एकेडमिक ब्लॉक्स इतने शानदार है कि वो दिल्ली के बड़े से बड़े प्राइवेट स्कूलों की बिल्डिंग से भी भव्य है।"

उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक इन वर्ल्ड क्लास एकेडमिक ब्लॉक्स की जगह छोटी सी स्कूल बिल्डिंग हुआ करती थी, जिसमें मात्र 20 कमरे हुआ करते थे। लेकिन आज उसकी जगह 4 मंजिला 2 शानदार ब्लॉक्स है, जिनमें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 76 कमरे हैं। यहां हमारे बच्चों को शानदार 6 लेबोरेट्रीज मिलेंगी।

सपनों को पूरा कर सकेंगे बच्चे-शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री आतिशी ने साझा किया कि नए एकेडमिक ब्लॉक के साथ अब हमारी बच्चियां यहां साइंस स्ट्रीम की पढ़ाई कर सकेंगी और डॉक्टर, इंजीनियर, साइंटिस्ट बनने के अपने सपनों को पूरा कर सकेंगी।

उन्होंने कहा कि ये इलाका घनी आबादी वाला है। ऐसे में यहां स्कूलों पर बहुत ज्यादा दबाव होता है। इसलिए मौजूदा स्कूल में हर कमरों में 60 बच्चों को बैठना पड़ता था, लेकिन इस नई बिल्डिंग के बाद अब अनुपात 40 पर आ जाएगा और अब यहां ओल्ड सीमापुरी, न्यू सीमापुरी, दिलशाद गार्डन, सनलाइट कॉलोनी, कलंदर कॉलोनी सहित आसपास के हजारों बच्चों को वर्ल्ड क्लास एजुकेशन मिल सकेगी।

दिल्ली सरकार के स्कूलों में शानदार बिल्डिंग

शिक्षा मंत्री आतिशी ने आगे कहा कि आज दिल्ली सरकार के स्कूलों में शानदार बिल्डिंग है, लेकिन 10 साल पहले तक ऐसा नहीं था। 2015 से पहले दिल्ली के सरकारी स्कूलों का हाल बदहाल होता था। स्कूल के अंदर घुसते ही टॉयलेट की बदबू आती थी, पीने का पानी नहीं होता था, बच्चों के बैठने के लिए टेबल-कुर्सी नहीं होती थी। पंखे-लाइटें टूटी होती थी। एक टीन-टप्पर वाले क्लासरूम में बच्चे ठूंस-ठूंस कर भरे होते थे। क्लासरूम में टीचर नहीं होते थे, क्योंकि उनकी बाकी जगह ड्यूटी लगा दी जाती थी। इसका नतीजा था कि जिस परिवार के पास थोड़े भी पैसे होते थे, वो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल से निकलवाकर प्राइवेट स्कूल में भेजते थे। लेकिन बहुत से परिवार ऐसे थे जो दिल पर पत्थर रखकर अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजते थे।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के इस हालत के कारण अक्सर बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं होती थी और बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते थे। इन बच्चों को मजबूरी में छोटे-मोटे काम करने पड़ते थे।

शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि हमारे देश में कहते है कि, बच्चे का भाग्य उसकी हाथ की लकीरों में लिखा होता है। कही न कही ये सच्चाई भी होती थी। 3 साल की उम्र में ही एक बच्चे का भाग्य तय हो जाता था। अगर कोई ऐसे घर से होता था जहां पैरेंट्स महंगे प्राइवेट स्कूल की फीस दे सकते तो वो अच्छे स्कूल में जाता था, अच्छे कॉलेज में जाता था और अच्छी नौकरी पाता था। लेकिन दूसरी ओर जो बच्चा गरीब परिवार से आता था वो पढ़ाई के लिए टूटे-फूटे टीन-टप्पर के सरकारी स्कूल में जाता था, पढ़ाई बीच में छोड़ देता था और यदि पढ़ाई पूरी कर भी लेता तो उसे दुकान में काम करने, मैकेनिक बनने का मौका मिलता था।

'दिल्ली के बच्चों के हाथ की लकीर बदल डाली'

उन्होंने अरविंद केजरीवाल के प्रयासों की सराहना करते कहा कि लेकिन 2015 में दिल्ली में चमत्कार हुआ और दिल्ली की हाथ की लकीर बदलने वाले, दिल्लीवालों के बेटे, उनके भाई अरविंद केजरीवाल जी दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। और उन्होंने दिल्ली के बच्चों के हाथ की लकीर बदल डाली। अरविंद केजरीवाल जी ने प्रण लिया कि दिल्ली के हर बच्चे को चाहे वाई अमीर परिवार से आता हो या गरीब परिवार से आता हो, उसे वर्ल्ड क्लास शिक्षा मिलेगी। इसके लिए उन्होंने दिल्ली के शिक्षा के बजट को दोगुना कर दिया और दिल्ली इकलौता ऐसा राज्य बना जिसने अपने बजट का 25% हिस्सा शिक्षा को दिया। और 2015 के बाद से दिल्ली इकलौता राज्य बना जिसनें हर साल अपने बजट का लगभग एक चौथाई हिस्सा शिक्षा को दिया है।

शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि इसी का नतीजा है कि आज दिल्ली सरकार के स्कूल शानदार हो गए, बच्चों को शानदार लैब-लाइब्रेरी मिल रही है, वर्ल्ड क्लास सुविधाएँ मिल रही है। उन्होंने कहा कि, सिर्फ़ क्लासरूम नहीं बने, यहाँ अच्छे डेस्क आए, शानदार लाइब्रेरी बनी, अत्याधुनिक लैब्स बने। उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी का मानना है कि, जबतक हम अपने टीचर्स को वर्ल्ड क्लास एक्सपोज़र नहीं देंगे तबतक वो बच्चों को वर्ल्ड क्लास शिक्षा नहीं दे सकते। ऐसे में हमने मंत्रियों और अफ़सरों को नहीं बल्कि अपने टीचर्स को दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज़ में ट्रेनिंग दिलवाई, उन्हें विदेश भेजा। टीचर ट्रेनिंग का बजट 10 गुणा बढ़ाकर 100 करोड़ कर दिया। ये अरविंद केजरीवाल जी की शिक्षा क्रांति है।

प्राइवेट स्कूलों से शानदार सरकारी स्कूल-आतिशी

उन्होंने कहा कि इस शिक्षा क्रांति की बदौलत पिछले 7 सालों से दिल्ली में सरकारी स्कूलों के नतीजे प्राइवेट स्कूलों से शानदार आ रहे है। आज दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे डॉक्टर-इंजीनियर, आईएएस अफ़सर बन रहे है। इस साल हमारे स्कूलों के 1400 से ज़्यादा बच्चे जेईई-नीट क्वालीफाई कर आईआईटी और बड़े-बड़े मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लिया है। आज लोग प्राइवेट स्कूलों की बजाय दिल्ली सरकार के स्कूलों में एडमिशन की शिफ़ारिशें लेकर आते है। एक तरफ़ देशभर में पैरेंट्स अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकालकर प्राइवेट स्कूलों में भेजते है तो दूसरी तरफ़ दिल्ली में पिछले 3 सालों 4 लाख से ज़्यादा बच्चों ने प्राइवेट स्कूलों से नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है। ये अरविंद केजरीवाल जी की शिक्षा क्रांति है।

शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि अब हमारे स्कूलों के पढ़ने वाले बच्चे मजबूरी में मैकेनिक नहीं बनते बल्कि शानदार शिक्षा पाकर ऑटोमोबाइल इंजीनियर बनता है, डॉक्टर बनता है। पिछले 10 सालों में अरविंद केजरीवाल जी ने दिल्ली के गरीब बच्चों को न सिर्फ़ सपना देखना बल्कि उसे पूरा करना भी सिखाया है। और आज हमारे बच्चे अपने सपनों को पूरा करने अपने परिवार और देश को आगे बढ़ा रहे हैं।

दिल्ली में जगाई शिक्षा की अलख- गोयल

इस मौके पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी और दिल्ली शिक्षा क्रांति के जनक मनीष सिसोदिया जी ने दिल्ली में शिक्षा की जो अलख जगाई है, उससे दिल्ली की शिक्षा क्रांति को पूरे विश्व में एक पहचान मिली है। पूरे विश्व के लोग इस और आकर्षित हुए है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा पर केजरीवाल सरकार द्वारा किए निवेश का नतीजा है कि अब हमारे स्कूलों के बोर्ड रिजल्ट 100% आ रहे है। हमारे बच्चे शानदार शिक्षा पा रहे है और अपने परिवार के साथ-साथ देश की तरक्की में भी योगदान दे रहे हैं।

उल्लखनीय है कि स्कूल की नई बिल्डिंग से सीमापुरी, दिलशाद गार्डन, दिलशाद कॉलोनी, जीटीबी एंक्लेव, कलंदर कॉलोनी के हजारों बच्चों को फायदा होगा।

विश्वामित्र सर्वोदय विद्यालय, सीमापुरी की नई बिल्डिंग की विशेषताएँ

  • 76 कमरे
  • स्मार्ट क्लासरूम
  • 6 अत्याधुनिक लैब
  • लाइब्रेरी
  • एक्टिविटी रूम
  • शानदार फर्नीचर
  • बच्चों के लिए लिफ्ट
  • टॉयलेट ब्लॉक

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