Delhi Election Result: इन दलों को सोचने पर मजबूर करेगा दिल्ली चुनाव! आगे निकला NOTA, मिले इतने कम वोट
Delhi Election Result: दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों ने इस बार बड़ा उलटफेर कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 48 सीटों के साथ जबरदस्त जीत हासिल कर 27 साल बाद सत्ता में वापसी की है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है।
पिछले चुनाव में 62 सीटें जीतने वाली AAP इस बार सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई। यह नतीजे अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हुए हैं। बीजेपी की इस जीत के पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने मजबूत रणनीति अपनाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का फायदा उठाया।

इसके अलावा, दिल्ली में AAP सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष और कई नेताओं पर लगे आरोपों ने भी पार्टी की हार में अहम भूमिका निभाई। बीजेपी ने दिल्ली के मतदाताओं को यह भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार बेहतर प्रशासन देगी, जिसका असर वोटिंग पर साफ दिखा।
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NOTA से भी कम वोट इन राजनीतिक दल को
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) [CPI(M)] का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। आंकड़ों के मुताबिक, 0.57% मतदाताओं ने नोटा (NOTA) का विकल्प चुना, जबकि BSP को 0.58% और CPI(M) को केवल 0.01% वोट ही मिले। इससे साफ है कि दिल्ली के मतदाताओं ने इन पार्टियों को पूरी तरह से नकार दिया।
BSP का वोट शेयर भले ही नोटा से थोड़ा ज्यादा है, लेकिन यह संकेत देता है कि पार्टी की पकड़ अब दिल्ली में बेहद कमजोर हो गई है। इसी तरह, CPI और CPI(M) जैसी वामपंथी पार्टियां भी लगभग अस्तित्वहीन नजर आईं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को 0.02% और जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] को 0.53% वोट मिले, जिससे साफ जाहिर होता है कि दिल्ली में इन पार्टियों का प्रभाव नगण्य हो गया है।
विभिन्न पार्टियों का वोट शेयर
इस बार के चुनाव में बीजेपी और AAP के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन अंततः बीजेपी ने बढ़त बना ली। विभिन्न पार्टियों का वोट शेयर इस प्रकार रहा:
बीजेपी - 45.56%
AAP - 43.57%
कांग्रेस - 6.34%
AIMIM - 0.77%
BSP - 0.58%
NOTA - 0.57%
JDU - 1.06%
LJP (R) - 0.53%
CPI - 0.02%
CPI(M) - 0.01%
NCP - 0.06%
अन्य - 0.93%
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कांग्रेस अब भी संघर्ष कर रही है, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने भी दिल्ली में कुछ वोट बटोरे हैं। जेडीयू और लोजपा (रामविलास) ने भी मामूली वोट हासिल किए, लेकिन वे भी सीटें जीतने में नाकाम रहे।
AAP के दिग्गज नेताओं की हार
इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका उसके दिग्गज नेताओं की हार रही। खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शिकस्त झेलनी पड़ी, जबकि मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज जैसे वरिष्ठ नेता भी अपनी सीटें नहीं बचा सके। AAP के कई दिग्गजों की हार ने पार्टी के लिए संकट खड़ा कर दिया है, जिससे पार्टी नेतृत्व को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
हालांकि, AAP के लिए थोड़ी राहत की बात यह रही कि कालकाजी से आतिशी और बाबरपुर से गोपाल राय अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे। लेकिन कुल मिलाकर, पार्टी को भारी नुकसान हुआ और यह साफ हो गया कि दिल्ली की जनता का मूड इस बार अलग था।
चुनाव परिणामों का असर
दिल्ली चुनाव के नतीजे सिर्फ राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर पड़ सकता है। AAP की हार से विपक्षी गठबंधन को झटका लगा है, जबकि बीजेपी को इस जीत से और मजबूती मिली है। कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव कोई खास राहत नहीं लेकर आया, क्योंकि पार्टी 6.34% वोट शेयर के साथ हाशिए पर ही नजर आई।
अब देखने वाली बात होगी कि बीजेपी दिल्ली की सत्ता में लौटकर किन नई नीतियों के साथ आगे बढ़ती है और AAP अपनी हार के बाद क्या बदलाव लाती है। एक बात तो तय है कि इस चुनाव के नतीजे ने दिल्ली की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है।
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