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Delhi Exit Poll: क्‍या दिल्‍ली में ओवैसी की AIMIM की हो रही जीत? दिल्‍ली दंगों के आरोपियों पर लगाया है दांव

Delhi Election Exit Poll Result: दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा के अलावा जिस पार्टी की सबसे ज्‍यादा चर्चा रही वो असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम है। इसकी वजह है कि ओवैसी की पार्टी ने महज दो सीटों पर उम्‍मीदवार उतारे लेकिन वो दोनों ही दिल्‍ली दंगों के आरोपी हैं और जेल में बंद हैं।

हालांकि मायावती की बीएसपी, अजीत पवार की एनसीपी और चंद्रशेखर आज़ाद की आज़ाद समाज पार्टी ने भी दिल्‍ली चुनाव में अपने उम्‍मीदवार उतारे हैं लेकिन ओवैसी की पार्टी के चुनाव परिणाम पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। दिल्‍ली विधानसभा चुनाव के असली परिणाम तो 8 फरवरी को आएंगे लेकिन इससे पहले एगिजट पोल के नतीजों पर नजर डालते हैं और जानते हैं कि क्‍या ओवैसी की पार्टी दिल्‍ली में अपना खाता खोल पाएगी?

Delhi Election Exit Poll Result

वोटिंग के बाद तमामल एग्जिट पोल के जो नजीजें आए हैं उसमें ओवैसी समेत सभी क्षेत्रीय पार्टी को तगड़ा झटका लगता नजर आ रहा है। चाणक्य स्ट्रैटेजीज, मैट्रिक्स, पीपुल्स पल्स, पी मार्क, पीपुल्स इनसाइट, वी प्रेसिड और माइंड ब्रिंक जैसे एग्जिट पोल में दिल्‍ली चुनाव में अन्‍य के खाते में शून्‍य सीटे मिलने का अनुमान लगाया गया है।

इन पोल ने मोटे तौर पर ओवैसी, मायावती, अजीत पवार और चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली पार्टियों के लिए शून्य सीटों का अनुमान लगाया, जिससे पता चलता है कि वे दिल्ली विधानसभा में अपना खाता खोलने में कामयाब नहीं हो सकते।

क्‍या ओवैसी की पार्टी दिल्‍ली में खोल पाएगी खाता?

बता दें ओवैसी ने दिल्‍ली चुनाव में ओखला से शिफा रहमान खान और मुस्तफाबाद से ताहिर हुसैन को अपना उम्मीदवार बनाने के लिए पहले ही आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। एग्जिट पोल के अनुमान अगर सही होते हैं तो असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को दोनों ही सीटों पर हार मिलनी तय है। ये ओवैसी के लिए एक बड़ा झटका है।

दिल्‍ली चुनाव में किस पार्टी ने कितनी सीटों पर लड़ा है चुनाव?

दिल्‍ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आप दोनों ने दिल्ली के सभी 70 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे। वहीं भाजपा ने 68 सीटों पर चुनाव लड़ा और दो सीटें अपने सहयोगियों जेडीयू और एलजेपी-रामविलास के लिए छोड़ दीं, जो देवली और बुराड़ी में हैं। अजीत पवार की एनसीपी ने 17 सीटों पर उम्मीदवारों के साथ प्रभाव डालने की कोशिश की, जबकि मायावती की बीएसपी 69 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। चंद्रशेखर आजाद ने भी अपनी पार्टी के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से कुछ सीटों पर उम्‍मीदवार उतारे हैं।

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