Delhi Election: कांग्रेस और AAP के बीच पर्दे के पीछे चल रही है कोई डील! क्या है इस दावे की सच्चाई?
Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनावों के तारीखों की घोषणा अगले महीने होने की संभावना है। अभी तक राजधानी की जो चुनावी तस्वीर दिखाई पड़ रही है, उसके हिसाब से आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और बीजेपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। लेकिन, कथित तौर पर अंदर की जानकारी रखने वालों का दावा है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में गठबंधन की संभावना अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।
आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और अब राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर सियासी डिबेट में हिस्सा लेने वाले आशुतोष ने दावा किया है कि असल में महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के बाद दोनों ही पार्टियां डरी हुई हैं और उनमें पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है।

पर्दे के पीछे बातचीत भी चल रही है-पूर्व आप नेता
आशुतोष ने एक इंटरव्यू में कहा,"जो जानकारी मेरे पास है,पर्दे के पीछे बातचीत भी चल रही है। यानी बैक चैनल डिप्लोमेसी भी यहां चल रही है। एक कोशिश ये है कि जो गलती हमने हरियाणा में की, वो गलती कम से कम दिल्ली में न करें। जिस तरह से कांग्रेस पार्टी हरियाणा में बहुत कॉन्फिडेंस में थी कि हम जीत जाएंगे...और अंत में क्या हुआ?"
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'हरियाणा और महाराष्ट्र में हार के बाद विपक्ष दहशत में है'
उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावे के नतीजों ने विपक्षी दलों को डरा रखा है और वह अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "...तो हरियाणा और महाराष्ट्र में हार के बाद विपक्ष इस वक्त दहशत में है, खौफ में है कि हम बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट हो जाएं कि दिल्ली में तो 50 सीटें आम आदमी पार्टी की आ रही हैं, पर नतीजा क्या हो कि पता चला कि 35 भी नहीं पा कर पाएं....तो बातचीत भी पीछे चल रही हैं और कई सारी ताकतें..फोर्सेज हैं, जो लगी हुई हैं कि हरियाणा और महाराष्ट्र का उदाहरण दिल्ली में दोहराया नहीं जाना चाहिए। अगर ऐसा हो गया तो पूरा का पूरा विपक्ष ही डिमॉरलाइज्ड हो जाएगा और कोई उम्मीद दिखाई नहीं पड़ेगी...तो ऑन द सरफेस यह बात सच है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं...और गठबंधन की सूरत दिखाई नहीं पड़ रही है, लेकिन पीछे ऐसी ताकतें भी हैं जो चाहती हैं कि गठबंधन हो। "
केजरीवाल कर चुके हैं गठबंधन की बात खारिज
बता दें कि इससे पहले दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पिछले हफ्ते ही राजधानी में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। उन्होंने एक एक्स पोस्ट में कहा था, 'दिल्ली में आम आदमी पार्टी यह चुनाव अपनी ताकत पर लड़ेगी। कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोई संभावना नहीं है।'
केजरीवाल का यह बयान तब आया था, जब 7 दिसंबर को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष, देवेंद्र यादव ने राजधानी में कथित गिरती हुई कानून व्यवस्था के लिए आप के संयोजक की आलोचना की थी। उन्होंने केजरीवाल से मुख्यमंत्री आतिशी से उसी तरह से इस्तीफा मांगने को भी कहा था, जिस तरह से निर्भया कांड के बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मांगी थी।
दिल्ली में बीजेपी और कांग्रेस में सीधी लड़ाई- संदीप दीक्षित
उधर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता के दावे के विपरीत नई दिल्ली विधानसभा सीट पर केजरीवाल के खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी और शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित तो अलग ही ट्रैक पर आगे बढ़ते मालूम पड़ रहे हैं। पूर्व कांग्रेस सांसद का दावा है कि दिल्ली की 70 सीटों में से लगभग 50 सीटों पर कांग्रेस का सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के साथ है। जबकि, वह आप के साथ करीब 9 सीटों पर ही कांग्रेस पार्टी की सीधी लड़ाई होने होने का दावा कर रहे हैं।
दीक्षित के मुताबिक,'आप एंटी-इंकंबेंसी का सामना कर रही है और उनके खुद के आकलन के हिसाब से वह कम से कम 32 सीटें हार रहे हैं, जहां अपने एमएलए को बदलना चाहते हैं।' उनका दावा है कि आप के लिए सबसे बड़ा खतरा ये है कि सत्ता-विरोधी लहर सिर्फ उसके विधायकों के खिलाफ नहीं है, बल्कि पार्टी के चेहरे अरविंद केजरीवाल के खिलाफ है।
गठबंधन का आइडिया आप की ओर से दिया जाता है- कांग्रेस नेता
वहीं आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की अटकलों के बारे में उन्होंने एएनआई से कहा, 'गठबंधन का कभी सवाल ही नहीं था। यह आइडिया आप की ओर से दी जाती रही है, क्योंकि उन्हें डर है कि अकेले चुनाव लड़ने पर हारेंगे। लेकिन, यह अच्छा है कि गठबंधन नहीं हुआ।'
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस-आप गठबंधन को बीजेपी ने हराया
2024 के लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने दिल्ली में बीजेपी के खिलाफ गठबंधन किया था। क्योंकि, यह दोनों ही पार्टियां केंद्र में बीजेपी-विरोधी विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं। दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से आप ने चार पर और कांग्रेस ने तीन पर प्रत्याशी उतारे थे। लेकिन, फिर भी बीजेपी दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटें जीतने में सफल हो गई।
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आप को लोकसभा चुनावों में 24.17% वोट मिले और उसकी सहयोगी कांग्रेस को 18.91% वोट आए। लेकिन, बीजेपी को इन दोनों को मिलाकर भी कहीं ज्यादा 54.35% वोट हासिल हुए।












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