Delhi Election: वोटिंग के बीच किसी कैंडिडेट की मृत्यु होने पर क्या रुक जाता है मतदान? जानिए क्या हैं नियम
Delhi Election: आज दिल्ली में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं। मतगणना 8 फरवरी को होनी है और इसी दिन परिणाम जारी किए जाएंगे। इलेक्शन से जुड़े कई सवाल लोगों के मन में हैं उनमें से एक सवाल है कि अगर चुनाव के दौरान किसी प्रत्याशी की मौत हो जाति है तो क्या होगा? इस सवाल का जवाब हम आपके लिए लेकर लाए हैं।
भारत में चुनाव एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिसमें लाखों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। लेकिन अगर किसी विधानसभा चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार की मृत्यु हो जाती है, तो चुनाव आयोग (ECI) निर्वाचन अधिनियम, 1951 के तहत कुछ विशेष नियमों का पालन करता है। यह नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

अगर मतदान से पहले उम्मीदवार की मृत्यु हो जाए
अगर किसी उम्मीदवार की मृत्यु मतदान शुरू होने से पहले हो जाती है, तो चुनाव आयोग कुछ अहम कदम उठाता है। चुनाव आयोग तुरंत उस सीट का चुनाव स्थगित कर देता है और मतदाताओं को सूचित किया जाता है कि इस सीट पर मतदान बाद में होगा।
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चुनाव आयोग संबंधित राजनीतिक दलों और अधिकारियों से चर्चा करने के बाद नई चुनावी तारीख की घोषणा करता है। अगर मृतक उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल से था, तो पार्टी को 7 दिनों के भीतर एक नया उम्मीदवार घोषित करने की अनुमति होती है।
अगर मृतक उम्मीदवार निर्दलीय था, तो उसकी जगह कोई और उम्मीदवार नहीं आ सकता, और चुनाव बाकी बचे उम्मीदवारों के साथ होगा। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि मतदाताओं को अपने क्षेत्र का प्रतिनिधि चुनने का उचित अवसर मिले और चुनावी प्रक्रिया बाधित न हो।
अगर मतदान के दौरान उम्मीदवार की मृत्यु हो जाए
अगर किसी उम्मीदवार की मृत्यु मतदान शुरू होने के बाद होती है, तो चुनाव आयोग अलग प्रक्रिया अपनाता है। मतदान जारी रहता है और मतदाता अन्य उम्मीदवारों के लिए वोट डाल सकते हैं। अगर मतगणना के बाद यह सामने आता है कि मृतक उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिले हैं, तो चुनाव आयोग उस निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को अमान्य (null and void) घोषित कर देता है और उस सीट पर फिर से चुनाव (by-election) कराया जाता है।
अगर नतीजे आने से पहले उम्मीदवार की मृत्यु हो जाए
मतदान खत्म होने और परिणाम घोषित होने के बीच अगर किसी उम्मीदवार की मृत्यु हो जाती है, तो चुनाव आयोग इस स्थिति में भी एक विशेष प्रक्रिया अपनाता है। चुनाव आयोग मतदान को रद्द नहीं करता और मतगणना पूरी की जाती है। अगर मृतक उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं और वह विजयी घोषित होता है, तो उस विधानसभा सीट पर दोबारा उपचुनाव (by-election) कराया जाता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदान और मतगणना निष्पक्ष रहे, लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखा जाए कि किसी मृतक व्यक्ति को विधायक घोषित न किया जाए।
ऐसा पहले कब हुआ था?
ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की वेल्लोर लोकसभा सीट पर एक उम्मीदवार की मृत्यु हो जाने के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया था। बाद में उस सीट पर दोबारा चुनाव कराया गया।इससे पहले भी कुछ विधानसभा और लोकसभा चुनावों में ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है, और हर बार चुनाव आयोग ने नियमानुसार फैसले लिए हैं।
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