Delhi Dehradun Expressway: ₹11,800 करोड़ की लागत, 4 फेज और ढाई घंटे का सफर, एक्सप्रेसवे की खास बातें
Delhi Dehradun Expressway: देश के बुनियादी ढांचे में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने आज महत्वाकांक्षी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi Dehradun Expressway) का भव्य उद्घाटन कर इसे राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह प्रोजेक्ट न केवल दिल्ली और उत्तराखंड के बीच की भौगोलिक दूरी को कम करेगा, बल्कि उत्तर भारत की आर्थिक रफ्तार को भी नई गति देगा।
उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने सहारनपुर में निर्मित एशिया के सबसे बड़े वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर का निरीक्षण किया और देवभूमि आगमन पर देहरादून के प्रसिद्ध दात काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। यह एक्सप्रेसवे आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण के अनूठे मेल का उदाहरण है, जो यात्रियों को विश्वस्तरीय सड़क अनुभव प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Delhi Dehradun Expressway से 6 घंटे का सफर अब 150 मिनट में
इस एक्सप्रेसवे के पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा के समय में क्रांतिकारी बदलाव आया है।
- समय में कटौती: पहले जहां इस दूरी को तय करने में 6 घंटे से अधिक का समय लगता था, वहीं अब यात्री इसे मात्र 2.5 घंटे में पूरा कर सकेंगे।
- कनेक्टिविटी: यह मार्ग न केवल देहरादून, बल्कि हरिद्वार और रुड़की जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी सफर को सुगम बनाएगा।
लागत और निर्माण की यात्रा
लगभग 11,868.6 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह प्रोजेक्ट साल 2021 में शुरू हुआ था। इसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने रखी थी। दिसंबर 2025 में इसके पहले चरण (अक्षरधाम से बागपत) को जनता के लिए खोला गया था, और अब पूरा कॉरिडोर बनकर तैयार है।
चार चरणों में तैयार हुआ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
पूरे प्रोजेक्ट को दक्षता के साथ पूरा करने के लिए इसे चार मुख्य हिस्सों में बांटा गया था:
- प्रथम चरण: दिल्ली के अक्षरधाम से बागपत तक (12 लेन का मार्ग)।
- द्वितीय चरण: बागपत से सहारनपुर बाईपास तक (6 लेन का मार्ग)।
- तृतीय चरण: सहारनपुर से गणेशपुर तक का विस्तार।
- चतुर्थ चरण: गणेशपुर से देहरादून तक का चुनौतीपूर्ण हिस्सा, जिसमें टनल और एलिवेटेड रोड शामिल हैं।
इको-फ्रेंडली डिजाइन, जानवरों के लिए सुरक्षित रास्ता
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण अनुकूल होना है। राजाजी नेशनल पार्क के संवेदनशील क्षेत्र में 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है। यह सुनिश्चित करेगा कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में कोई बाधा न आए। हाथियों के आवागमन के लिए विशेष रास्ते, कई अंडरपास और अत्याधुनिक टनल का निर्माण किया गया है।
सुरक्षा और तकनीक का समावेश
सफर को सुरक्षित बनाने के लिए पूरे मार्ग पर एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) लगाया गया है।
सुविधाएं: एक्सप्रेसवे पर 100 से अधिक अंडरपास और 5 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाए गए हैं।
स्मार्ट मॉनिटरिंग: तकनीक की मदद से यातायात के दबाव को नियंत्रित किया जाएगा, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।












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