Delhi Chunav 2025: दिल्ली की किन सीटों पर पूर्वांचली वोटरों के हाथ में सत्ता की चाबी, इस बार क्यों बढ़ी अहमियत

Delhi Chunav 2025: दिल्ली विधानसभा चुनावों में अब पूर्वांचली (पूर्वी और बिहार) वोटर अपने आप में एक बहुत बड़ा वोट बैंक बन चुका है। पिछले 10 वर्षों में दिल्ली की सियासत को देखें तो लोकसभा चुनावों में पूर्वांचल के मतदाताओं ने बीजेपी को पूरे जतन से आशीर्वाद दिया है,लेकिन विधानसभा चुनावों में उनका साथ आम आदमी पार्टी (AAP) को मिलता रहा है।

लेकिन, पिछले हफ्ते आप के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से लगता है कि एक बहुत बड़ी रणनीतिक चूक हो गई! उन्हें भाजपा पर आरोप लगाना था कि उसने मतदाता सूची में बहुत से नाम आखिरी वक्त में शामिल कराया है। लेकिन, वह इसके लिए यूपी-बिहार के लोगों को निशाना बना गए।

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Delhi Chunav 2025: केजरीवाल के आरोपों के बाद पूर्वांचली वोटरों की इस चुनाव में बढ़ गई है अहमियत

उन्होंने कहा, "एक लाख वोट की छोटी सी असेंबली (नई दिल्ली) में पिछले 15 दिनों में 13 नए वोट बनने की एप्लीकेशन आई है...जाहिर है कि यूपी और बिहार से ला-ला के...यूपी और आसपास के स्टेट से लाकर फर्जी वोट बनवा रहे हैं ये (बीजेपी) लोग...."।

बीजेपी ने इसे हाथों-हाथ लिया और यूपी-बिहार के लोगों के अपमान का आरोप लगाते हुए केजरीवाल और आप के खिलाफ हमला बोल दिया। पार्टी ने दिल्ली में पूर्वांचलियों में भाजपा के सबसे दिग्गज चेहरे और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के तीन बार के सांसद मनोज तिवारी को उतार दिया।

Delhi Chunav 2025: पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के करीब 25 से 30% मतदाताओं का अनुमान

राजनीतिक दलों से जुड़े सूत्रों के आंकड़ों की मानें तो दिल्ली में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के करीब 25 से 30% मतदाता हो चुके हैं। इनका दबदबा खास तौर पर पूर्वी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली के कुछ इलाकों में हो चुका है। कुछ सीटों पर तो इनकी संख्या 35% से भी ज्यादा बताई जाती है।

Delhi Chunav 2025: दिल्ली की 20 से ज्यादा सीटों पर पूर्वांचली वोटर तय कर सकते हैं हार या जीत

अनुमानित तौर पर आज की तारीख में दिल्ली की 70 सीटों में से 20 से भी ज्यादा सीटो पर पूर्वांचली मतदाताओं के पास सत्ता की चाबी आ चुकी है और वह चुनाव परिणाम को किसी भी पक्ष में झुकाने की ताकत रखते हैं।

Delhi Chunav 2025: दिल्ली की किन सीटों पर पूर्वांचली वोटरों के हाथ में सत्ता की चाबी?

अगर पूर्वांचली वोटरों की तादाद के आधार पर देखें तो इनकी सबसे ज्यादा आबादी त्रिलोकपुरी में है, जो कि 35% से अधिक बताई जाती है। इसके बाद नांगलोई जाट और लक्ष्मीनगर में भी यह 30% से ज्यादा संख्या में हैं।

इसी तरह से उत्तम नगर में भी 30%, किराड़ी और घोंडा में 29%,कृष्णानगर और विकासपुरी में 28%,बुराड़ी में 27%,बादली में 26%,मादीपुर में 24%,द्वारका और पटपड़गंज में 23%, सीमापुरी,मुस्तफाबाद और रोहताश नगर में 22%,कोंडली और नजफगढ़ में 21%,करावल नगर,मटियाला, सीलमपुर, शाहदरा और विश्वास नगर में 20% पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के वोटर हैं।

Delhi Chunav 2025: सभी पार्टियों के लिए पूर्वांचलियों का वोट रखने लगा है मायने

यही वजह है कि 2013 से पहले बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस पूर्वांचलियों पर पूरा फोसक करती थी। वहीं, 2015 से आम आदमी पार्टी इन्हें पूरा अहमियत दे रही है। इस बार भी पार्टी ने पिछली बार की तरह ही लगभग एक दर्जन सीटों पर पूर्वांचली चेहरों को मौका दिया है और बीजेपी का भी फाइनल आंकड़ा इसी के आसपास रहने वाला है।

दिल्ली में पूर्वांचल के वोटरों की अहमियत इतनी बढ़ चुकी है कि बीजेपी ने तो मनोज तिवारी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष भी बना चुकी है। इसका असर 2017 के दिल्ली नगर निगम चुनाव (MCD) में दिखा था और आम आदमी पार्टी के दिल्ली की राजनीति में शीर्ष पर होने के बावजूद बीजेपी ने अपना दबदबा कायम रखा और इसके 181 पार्षद चुने गए। वहीं सत्ता में रहते हुए भी आप के 49 और कांग्रेस के 31 पार्षद जीत सके।

इस बार के दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने मनोज तिवारी के ही गाने को अपना कैंपेन सॉन्ग भी बनाया है, "बहाने नहीं बदलाव चाहिए, दिल्ली में भाजपा सरकार चाहिए...."

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