Delhi Chunav 2025: दिल्ली में इस बार 2013 के पैटर्न पर चुनाव क्यों लड़ रही है BJP? 5 बड़ी बातें
Delhi Chunav 2025: बीजेपी ने दिल्ली चुनाव के लिए अबतक कुल 58 सीटों के लिए उम्मीदवारों का एलान किया है। पहली लिस्ट में जहां पार्टी ने अपने दिग्गजों और सीटिंग उम्मीदवारों पर दांव लगाया था,वहीं दूसरी लिस्ट से यह साफ लग रहा कि पार्टी ने नए चेहरों और संगठन के लोगों पर भरोसा करने के साथ-साथ 2013 वाले जातीय समीकरण दुरुस्त रखने की कोशिश की है।
दिल्ली में सरकार बनाने का बीजेपी को अबतक सिर्फ एक बार 1993 में मौका मिला था। यह तब की बात है, जब केंद्र में बीजेपी की एक बार भी सरकार नहीं बनी थी। लेकिन, 1998 के बाद वह फिर दिल्ली में सरकार में नहीं लौटी है। जबकि, केंद्र में तो पिछले तीन बार से लगातार नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार बन रही है। उससे पहले तीन बार अटल बिहार वाजपेयी की अगुवाई में एनडीए की सरकारें बन चुकी हैं।

Delhi Chunav 2025: दिल्ली में इस बार 2013 के पैटर्न पर क्यों लड़ रही है BJP?
इस बार भाजपा हर हाल में दिल्ली में 27 साल से चले आ रहे अपने वनवास को खत्म करना चाह रही है। लेकिन, सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) से कड़ा मुकाबला और कांग्रेस की कमजोरियों ने उसकी चुनौती बढ़ा रखी है और पार्टी ने जो 29 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी लिस्ट जारी की है, उससे साफ है कि पार्टी ने हर हाल में दिल्ली की सत्ता में वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इससे जुड़ी पांच बड़ी बातों के बारे में आगे चर्चा की जा रही है-
Delhi Chunav 2025: 1) जाट-गुर्जर वोट बैंक और गांव वाले इलाकों के वोटरों पर फोकस
दिल्ली बीजेपी के एक नेता ने वनइंडिया को बताया है कि पार्टी इस बार दिल्ली में वही रणनीति अपना रही है, जो 2013 में उसका पैटर्न था।
मसलन,पार्टी ने जाट-गुर्जर वोट बैंक के बीच अपना जनाधार मजबूत करने के लिए इन जातियों के उम्मीदवारों को फोकस किया है और दिल्ली के गावों वाले इलाकों पर अपना पूरा ध्यान लगा दिया है।
बीजेपी ने इस बार 9 जाटों और 7 गुर्जर जाति के लोगों को अबतक टिकट दे दिया है। जबकि, 12 उम्मीदवारों की लिस्ट आगे भी आने की संभावना है।
भाजपा नेता के अनुसार पार्टी ने 2013 पर यही रणनीति अपनाई थी और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उस चुनाव में बीजेपी को 70 में 31, आम आदमी पार्टी को 28 और कांग्रेस को 8 सीटें मिली थीं। बीजेपी की सहयोगी शिरोमणि अकाली दल को भी 1 सीट मिली थी। तब आप के अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस की मदद से अपनी पहली सरकार बनाई थी।
Delhi Chunav 2025: 2) जाट आरक्षण के AAP वाले दांव की काट
पिछले हफ्ते आप संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के जाटों को ओबीसी की केंद्रीय सूची में डालने की मांग करके इस वोट बैंक को रिझाने का दांव चला है। बीजेपी ने अपनी दूसरी लिस्ट से उन्हें जवाब देने की कोशिश की है। पार्टी जाट समाज के नेता और पूर्व सांसद परवेश वर्मा को पहले ही नई दिल्ली में केजरीवाल के खिलाफ उतार चुकी है।
इसके अलावा नरेला, तिमारपुर, पालम, मुंडका, मटियाला और नजफगढ़ से भी जाट प्रत्याशियों को टिकट दिया है। वहीं ओखला, तुगलकाबाद और कस्तूरबा नगर में गुर्जर प्रत्याशियों को मौका दिया गया है। कालकाजी में पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी पहले से ही आतिशी मार्लेना के खिलाफ मैदान में हैं।
Delhi Chunav 2025: 3) बल्लीमारान जैसी जनरल सीट से दलित चेहरे पर दांव
बल्लीमारान एक जनरल सीट है, फिर भी बीजेपी ने यहां से अनुसूचित जाति के प्रत्याशी कमल बागड़ी को टिकट दिया है। बागड़ी रामनगर के निगम पार्षद हैं। इनकी क्षेत्र में बड़ी पकड़ है और यह बीजेपी के उभरते हुए तेज-तर्रार युवा नेता माने जाते हैं। बल्लीमारान दिल्ली की ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली सीटों में गिनी जाती है, जहां करीब 38% मुसलमान वोटर हैं।
इसके साथ ही दिल्ली चुनाव में दूसरी लिस्ट तक बीजेपी ने कुल 8 दलितों को उतार दिया है और इसके जरिए बीजेपी ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कोर वोट बैंक पर फोकस करने की रणनीति अपनाई है।
2022 में चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक बल्लीमारान में तब कुल आबादी 1 लाख 91 हजार से ज्यादा थी, जिसमें दलितों (अनुसूचित जाति) की जनसंख्या 46 हजार 500 से अधिक थी। यानी इस सीट पर करीब एक-चौथाई दलित वोटर हैं।
Delhi Chunav 2025: 4) पूर्वांचली नेताओं को एक बार फिर से तरजीह
पार्टी के अंदर के लोगों की मानें तो भाजपा 70 में से लगभग 10 सीटों पर पूर्वांचलियों को टिकट देगी, जिनमें से 6-7 नाम की घोषणा हो भी चुकी है। दूसरी लिस्ट में कपिल मिश्रा, बजरंग शुक्ला,अनिल गौड़ और अभय वर्मा जैसे नेता उसी की कड़ी हैं।
Delhi Chunav 2025: 5) युवा और नए चेहरों पर दांव
युवाओं की बात करें तो नजफगढ़ में तीन बार निगम पार्षद रह चुकीं नीलम पहलवान का नाम लिया जा सकता है तो सीलमपुर से भी निगम पार्षद अनिल गौड़ को मौका दिया गया है। दूसरी लिस्ट में ज्यादातर ऐसे उम्मीदवार हैं तो पहली बात चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी ने इसके लिए स्थानीय स्तर पर आंतरिक सर्वे करवाने के बाद कदम बढ़ाया है।
वैसे बीजेपी नेता ने वनइंडिया से बातचीत में कहा है कि बीजेपी पहले भी जाट-गुर्जर समुदायों के उम्मीदवारों पर फोकस करती रही है, लेकिन इस बार पार्टी ने ज्यादातर सीटों पर ज्यादा नए चेहरों को मौका दिया है और उन लोगों पर विशेष फोकस किया है, जो संगठन के लिए काम करते रहे हैं। इसी कड़ी में निगम पार्षदों को भी बड़ा अवसर दिया गया है।
दिल्ली में 5 फरवरी को मतदान है और 8 फरवरी को वोटों की गिनती की जाएगी और उसी दिन यह तय होगा कि किसकी रणनीति ज्यादा कारगर साबित हुई।












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