Delhi Chunav 2025: दिल्ली चुनाव में पूर्वांचलियों समेत इन तीन की 'नाराजगी' BJP को पड़ सकती है भारी
Delhi Chunav 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार बीजेपी 'अभी नहीं तो कभी नहीं' वाले मूड में प्रचार अभियान चला रही है। पार्टी के प्रचार अभियान की अगुवाई खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, जो राजधानी के अलग-अलग इलाकों में लगातार कई रैलियां कर चुके हैं। बीजेपी अपने पक्ष में अपने कोर वोट बैंक के अलावा कुछ फीसदी वोटों को खींचने की रणनीति के साथ चुनाव प्रचार कर रही है। लेकिन, तीन ऐसे वर्ग हैं जिनकी कथित नाराजगी कायम रही तो पार्टी की उम्मीदों पर लगातार सातवीं बार झटका लग सकता है।
दिल्ली चुनाव से पहले तीन वर्गों के बारे में बताया जा रहा है कि अलग-अलग वजहों से उनमें बीजेपी के प्रति एक 'नाराजगी'की भावना है और अगर यह भावना मतदान के दिन तक उस वर्ग की आम भावना बन गई तो पार्टी को नुकसान हो सकता है।

Delhi Chunav 2025 Purvanchali Population: पूर्वांचलियों का एक वर्ग बीजेपी से बताया जा रहा है नाराज
दिल्ली में बीजेपी ने तीन बार के पार्टी सांसद मनोज तिवारी को अपना सबसे बड़ा चेहरा बना रखा है, जो कि पूर्वांचलियों के एक कद्दावर नेता बन चुके हैं। लोकसभा चुनावों में भाजपा को पूर्वांचलियों का बहुत ज्यादा समर्थन मिलता भी रहा है। लेकिन, विधानसभा चुनावों में इसका एक बड़ा तबका आम आदमी पार्टी (AAP) को सपोर्ट करता आया है।
इस बार बीजेपी को उम्मीद थी कि पूर्वांचलियों का 'आप' से मोहभंग हो चुका है। लेकिन, कहा जा रहा है कि टिकट बंटवारे को लेकर पूर्वांचलियों के एक वर्ग में बीजेपी (BJP) के खिलाफ नाराजगी है। हालांकि, भाजपा ने इस वर्ग को साधे रखने के लिए पूर्वी यूपी और बिहार के बड़े नेताओं को हर सीट पर चुनाव प्रचार के लिए उतार रखा है।
दिल्ली की 70 सीटों पर 300 से अधिक नेता पार्टी के जनाधार को एकजुट करने के अभियान में जुटे हुए हैं। इनमें से हर सीट पर कम से कम एक बिहार और एक पूर्वी यूपी के नेता शामिल हैं।
अनुमान के मुताबिक दिल्ली में अब पूर्वांचली वोटरों की संख्या कुल वोटरों के एक-तिहाई के आसपास हो चुकी है और 20 सीटों पर तो यह हार या जीत तय करने की भूमिका में आ चुके हैं। अगर 5 फरवरी तक बीजेपी ने इस वर्ग को समझा-बुझा लिया तब तो ठीक है, नहीं तो 27 साल बाद भी सरकार बनाने का उसका सपना अधूरा ही रह सकता है।
Delhi Chunav 2025 Bania Population: दिग्गज वैश्य नेताओं को साइडलाइन करने से बीजेपी को भुगतना पड़ सकता है खामियाजा
बीजेपी को हमेशा से विरोधी ब्राह्मण और बनिया की पार्टी बताते रहे हैं। दिल्ली में बनिया या वैश्य वोटरों की तादाद अनुमानित तौर पर 7% बताई जाती है। यूं तो इस बार दिल्ली की मूलभूत सुविधाओं की लचर स्थिति की वजह से बनिया वोटरों में आम आदमी पार्टी के प्रति नाराजगी दिख रही है।
लेकिन, बीजेपी ने जिस तरह से कुछ बड़े वैश्य नेताओं को साइडलाइन किया है, उससे यह आशंका पैदा हुई है कि अगर उन्होंने नाराजगी दिखाई तो बीजेपी को कुछ सीटों पर नुकसान पहुंच सकता है।
यूं तो बीजेपी के उम्मीदवारों की लिस्ट में संख्या के मामले में दूसरे नंबर पर बनिया ही हैं, जिन्हें पार्टी ने 9 या 10 सीटों से उतारा है। लेकिन, जिस तरह से विजय गोयल, डॉक्टर हर्षवर्धन और रविंदर गुप्ता जैसे नेता इस चुनाव में साइडलान दिख रहे हैं, उससे आशंका है कि कहीं इनकी मायूसी पार्टी को भारी न पड़ जाए।
हालांकि, दिल्ली बीजेपी के एक नेता ने वनइंडिया को बताया है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई बागी चुनाव मैदान में नहीं है। इसलिए कुछ पुराने नेता अगर निजी वजहों से उत्साह नहीं भी दिखाते हैं तो भी पार्टी को किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
Delhi Chunav 2025 Dalit Population: अंबेडकर के मुद्दे पर विरोधियों की रणनीति में बीजेपी के उलझने की आशंका
दिल्ली में दलित वोटरों को अपने पाले में करने के लिए बीजेपी ने इस बार एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है। पार्टी ने हर मोर्चे पर इनका समर्थन जुटाने के लिए संघर्ष किया है। दिल्ली में अनुसूचित जाति (SC) के वोटर 16% हैं और इनके लिए 70 में से 12 सीटें रिजर्व भी हैं। बीजेपी की रणनीति रही है कि दलित वोट बैंक का एक हिस्सा उसकी तरफ भी मुड़ जाए।
इस बार कांग्रेस भी दलित वोटरों को आप से अपनी ओर करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। लेकिन, जिस तरह से पार्टी ने भाजपा के खिलाफ डॉ अंबेडकर के मुद्दे पर अभियान चला रखा है और अगर वह इसमें सफल रही तो बीजेपी की दलितों को अपने खेमे में लाने की सारी उम्मीदों पर पानी फिर सकता है।












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