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Delhi Blast: गरीब ग्रामीणों का ब्रेनवॉश करता था आतंकी उमर, मदद के बहाने नेटवर्क बनाने का चल रहा था कारोबार!

Delhi Blast: दिल्ली ब्लास्ट मामले में मारे गए आतंकियों की साजिश की कड़ी अब जुड़ती दिख रही है। अब तक की जांच में पता चला है कि आतंकी वारदात में मारा गया उमर और उसका साथी मुजम्मिल ग्रामीणों के बीच आतंकी नेटवर्क बनाने का काम करता था। इसके लिए दोनों पहले कम उम्र के ग्रामीण लड़कों की मदद करते थे और फिर उनका ब्रेनवॉश कर दहशतगर्दी में शामिल होने के लिए उकसाते थे। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में चार ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, अब तक जांच में सामने आया कि यूनिवर्सिटी के अस्पताल में कार्यरत डॉ. मुजम्मिल और उसका सहयोगी उमर उन नबी ब्रेनवॉश का काम करते थे। दोनों इलाज के लिए आने वाले गरीब और लाचार मरीजों से नजदीकियां बढ़ाते थे। इसके बाद साइलेंट तरीके से अपना एक गुप्त नेटवर्क तैयार कर रहे थे।

Delhi Blast umar

Delhi Blast: ग्रामीणों के घर तक जाते थे आरोपी

जांच टीम से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों आरोपी मरीजों की मदद करने और हालचाल पूछने के बहाने उनसे गहराई से जुड़ जाते थे। कई बार इलाज के बाद वे मरीजों के घर तक पहुंच जाते थे। दोनों अपने अच्छे व्यवहार और मददगार होने का दिखावा कर ग्रामीणों के साथ मेलजोल बढ़ाने का काम करते थे। धौज सहित आसपास के कई गांवों में उनकी अच्छी पकड़ बन चुकी थी। इस मामले में कुछ ग्रामीणों से भी पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि दोनों ही अपने आंतकी मॉड्यूल के बारे में बहुत सीमित जानकारी थी।

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Umar के पास थी युवाओं के ब्रेनवॉश की जिम्मेदारी

जांच टीम की जांच में यह भी पता चला है कि दोनों ने कई कमजोर और आर्थिक रूप से परेशान लोगों को बहला-फुसलाकर उनका ब्रेनवॉश किया था। अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने पूछताछ में बताया कि मुजम्मिल अक्सर ही कुछ मरीजों को फोन करता था। इलाज के बाद भी उनके साथ उसकी बातचीत होती रहती थी। दूसरी ओर उमर ने धौज समेत कई और गांवों का दौरा भी किया था। उसके ऊपर गांव के युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने साथ जोड़ने की जिम्मेदारी थी।

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जांच के घेरे में अल-फलाह यूनिवर्सिटी

- धौज गांव से हिरासत में लिए गए चार युवकों ने भी बताया कि उनका संपर्क डॉ. मुजम्मिल से इलाज के दौरान हुआ था। युवकों ने कई बार अल फलाह यूनिवर्सिटी जाने की बात भी मानी है।

- इस पूरे मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी भी संदेह के घेरे में है। यूनिवर्सिटी प्रशासन पर वेबसाइट पर गलत जानकारी अपलोड करने का आरोप है। इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग के भी गंभीर आरोप हैं।

- सूत्रों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी के फाउंडर जवाद अहमद सिद्दीकी के कहने पर ही वेबसाइट पर झूठे NAS और UGC संबंधी दावे अपलोड किए गए थे। रजिस्ट्रार की ओर से भी इस मामले पर कई जानकारियां जांच टीम को सौंपी गई हैं।

- लगातार जांच एजेंसियों की मौजूदगी और विवाद बढ़ने के चलते कई स्टाफ सदस्य यूनिवर्सिटी आने से बच रहे हैं। इससे छात्रों की क्लास बाधित हो रही है।

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