Delhi Bomb Blast के 10 दिन बाद Kashmir Times के दफ्तर पर SIA का छापा, AK-47 कारतूस-पिस्तौल राउंड बरामद
SIA Raids Kashmir Times Office News Hindi: देश की राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास मेट्रो के गेट नंबर-1 पर बम विस्फोट से 13 लोगों की मौत हुई। घटना के 10 दिन बाद यानी गुरुवार (20 नवंबर 2025) को जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने कश्मीर टाइम्स अखबार के जम्मू स्थित मुख्यालय पर छापा मारा।
छापे में AK-47 राइफल के कारतूस, पिस्तौल के लाइव राउंड और हैंड ग्रेनेड पिन बरामद हुए। यह कार्रवाई अखबार और उसके प्रमोटरों पर 'देश-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने' के आरोप में दर्ज FIR के तहत की गई। संपादकों ने इसे 'स्वतंत्र पत्रकारिता को चुप कराने की साजिश' बताते हुए निंदा की और आरोप वापस लेने की मांग की।

उपमुख्यमंत्री सुरिंदर सिंह चौधरी (Surinder Singh Chaudhary) ने सतर्क प्रतिक्रिया दी - 'गड़बड़ी साबित हो तो कार्रवाई, दबाव से नहीं।' क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं...
Kashmir Times Office Raid Reason: AK कारतूस और हथियारों के पार्ट्स, प्रमोटरों से पूछताछ की उम्मीद
SIA की टीम ने सुबह 6 बजे रेसिडेंसी रोड स्थित दो मंजिला दफ्तर पर पहुंची। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बिल्डिंग के बाहर कॉर्डन लगाया। अधिकारियों ने दस्तावेज, कंप्यूटर और डिजिटल डिवाइस की गहन तलाशी ली। बरामद सामान में AK-47 राइफल के कारतूस, पिस्तौल राउंड और ग्रेनेड पिन शामिल थे।
FIR नंबर 02/2025 (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट की धारा 13 के तहत) में अखबार पर 'देश की संप्रभुता के खिलाफ सामग्री फैलाने' का आरोप है। SIA का कहना है कि कोई प्लेटफॉर्म सेडिशन या अलगाववाद को बढ़ावा नहीं दे सकता। आने वाले दिनों में प्रमोटरों - संपादक अनुराधा भसीन जामवाल और प्रबोध जामवाल - से पूछताछ हो सकती है। दोनों फिलहाल विदेश में हैं। अखबार 2021-22 से जम्मू में प्रिंट संस्करण बंद है, लेकिन ऑनलाइन एक्टिव है।
संपादकों का संयुक्त बयान: 'सच्चाई पर हमला, चुप नहीं होंगे'
अनुराधा भसीन जामवाल (वरिष्ठ पत्रकार, सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 केस लड़ चुकीं) और प्रबोध जामवाल ने संयुक्त बयान जारी किया: 'यह छापा स्वतंत्र पत्रकारिता को चुप कराने का सुनियोजित प्रयास है। सरकार की आलोचना शत्रुतापूर्ण नहीं। मजबूत प्रेस लोकतंत्र के लिए जरूरी है। आरोप डराने-बदनाम करने के लिए हैं। हम चुप नहीं रहेंगे।' उन्होंने अधिकारियों से FIR वापस लेने, उत्पीड़न रोकने का आग्रह किया। साथ ही, मीडियाकर्मियों, नागरिक समाज और लोगों से एकजुटता की अपील की। 'राज्य दफ्तरों पर छापा मार सकता है, लेकिन सच्चाई की प्रतिबद्धता पर नहीं।' पत्रकारिता अपराध नहीं - यह उनका संकल्प।
कश्मीर टाइम्स का इतिहास: 1954 से 'अलगाववादी' टैग, वेद भसीन की विरासत
1954 में वरिष्ठ पत्रकार वेद भसीन (जम्मू प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष) द्वारा स्थापित कश्मीर टाइम्स को लंबे समय से अलगाववादी समर्थक माना जाता रहा। वेद का निधन हो चुका, उनकी बेटी अनुराधा ने प्रबंधन संभाला। अखबार ने हमेशा कश्मीर मुद्दों पर सरकार की आलोचना की। वेद का नाम पुराने गुलाम नबी फई आतंकी सेमिनार विवाद से जुड़ा।
उपमुख्यमंत्री की सतर्कता, इल्तिजा मुफ्ती का तंज
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर सिंह चौधरी ने कहा: 'गड़बड़ी साबित हो तो कार्रवाई, दबाव से नहीं।' PDP नेता इल्तिजा मुफ्ती ने X पर तंज कसा:- 'कश्मीर टाइम्स सच बोलता है, दबाव में झुकता नहीं। देश-विरोधी गाली देकर सच्चाई दबाना ज्यादती है। क्या हम सब देश-विरोधी हैं?'
SIA का 'टेरर मॉड्यूल' ऑपरेशन - कश्मीर में क्रैकडाउन
यह छापा नवंबर 10 से चल रहे SIA-NIA ऑपरेशंस का हिस्सा है, जो दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट (13 मौतें) से जुड़े टेरर मॉड्यूल पर फोकस्ड हैं। कश्मीर में सेडिशन कंटेंट पर सख्ती बढ़ी है।
कश्मीर टाइम्स की यह जंग पत्रकारिता की आजादी पर सवाल खड़ी कर रही है। क्या आरोप साबित होंगे? अपडेट्स के लिए बने रहें। (सभी तथ्य SIA बयान, संपादकों के स्टेटमेंट और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित।)
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