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जैश हैंडलर ने आतंकी डॉक्टर को भेजी थी 'बम बनाने की वीडियो', Delhi Blast केस में सबसे बड़ा खुलासा

Delhi Blast: दिल्ली के लाल किले के पास हुए ब्लास्ट की जांच में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। सूत्रों ने बताया है कि पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक हैंडलर ने इस मामले के मुख्य आरोपी डॉक्टर मुज़म्मिल शकील के साथ सीधे बम बनाने के वीडियो शेयर किए थे। इस आतंकी घटना में 15 लोग मारे गए थे।

शुरुआती जांच के अनुसार, यह हैंडलर 'हंजुल्ला' के नाम से जाना जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, 'हंजुल्ला' ने ही डॉ. शकील को ऑनलाइन माध्यम से विस्फोटक बनाने की 'ट्रेनिंग' दी थी।

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सुरक्षा एजेंसियों को यह भी पता चला है कि अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर के नौगाम में जिन जैश पोस्टरों की वजह से आतंकी जांच शुरू हुई थी, उन पर 'कमांडर हंजुल्ला भाई' लिखा हुआ था। दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच कर रही सुरक्षा एजेंसियां ​​अब पाकिस्तान में बैठे इस जैश हैंडलर का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।

व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल और डॉक्टरों की भर्ती
यह खुलासा हुआ है कि यह पूरा टेरर मॉड्यूल 'व्हाइट कॉलर' (शिक्षित पेशेवरों) से बना था। जैश हैंडलर, शकील के संपर्क में शोपियां (जम्मू-कश्मीर) के मौलवी इरफान अहमद के माध्यम से आया था।

  • 1. रेडिकलाइज़ेशन: मौलवी इरफान अहमद ने सबसे पहले डॉ. शकील को कट्टरपंथी (Radicalize) बनाया। डॉ. शकील फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में डॉक्टर के रूप में काम करता था, जिसका अब मेडिसिन प्रैक्टिस करने का लाइसेंस रद्द हो चुका है।
  • 2. नेटवर्क का विस्तार: इसके बाद शकील ने यूनिवर्सिटी में ही अपने जैसे 'समान विचारधारा वाले' अन्य डॉक्टरों- मुजफ्फर अहमद, अदील अहमद राथर और शाहीन सईद-को भर्ती किया।

डॉ. शकील पर विस्फोटक ले जाने और सुसाइड बॉम्बर उमर मोहम्मद उर्फ ​​उमर-उन-नबी को सफेद हुंडई i20 कार सौंपने में शामिल होने का भी आरोप है।

200 IEDs और 'बिरयानी' का कोड वर्ड
सूत्रों के अनुसार, जैश से जुड़े इस आतंकी मॉड्यूल ने राजधानी में हमले की योजना महीनों पहले से बना रखी थी। उनका इरादा दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद के हाई-प्रोफाइल इलाकों को निशाना बनाना था और इसके लिए वे 200 शक्तिशाली इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IEDs) तैयार कर रहे थे।

क्या था कोड वर्ड?
आतंकियों ने पुलिस से बचने के लिए टेलीग्राम (Telegram) जैसे सुरक्षित मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल किया। बातचीत में एक्सप्लोसिव मटीरियल के लिए "बिरयानी" और किसी खास आतंकी इवेंट के लिए "दावत" जैसे कोड वर्ड इस्तेमाल किए जाते थे। सूत्रों ने बताया कि दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई i20 कार के अलावा, संदिग्ध सुसाइड बॉम्बर और उसके साथियों ने दिल्ली से दो और कारें खरीदी थीं।

विस्फोट क्यों हुआ: सुसाइड बॉम्बर की घबराहट

लाल किले के पास सफेद हुंडई i20 कार में धमाका हुआ था, जिसमें डीएनए टेस्ट से उमर के सुसाइड बॉम्बर होने की पुष्टि हुई। सूत्रों के मुताबिक, यह घटना उस दिन हुई जब फरीदाबाद में 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुए थे और मॉड्यूल के दो प्रमुख सदस्यों (शकील और राथर) को गिरफ्तार किया गया था। ऐसी आशंका है कि सुसाइड बॉम्बर उमर मोहम्मद शायद घबरा गया और गिरफ्तारी के डर से उसने समय से पहले ही धमाका कर दिया।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच के घेरे में
फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी अब व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के केंद्र में है।

  • संस्थापक गिरफ्तार: इस सप्ताह की शुरुआत में, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को टेरर फाइनेंसिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के मामले में गिरफ्तार किया था।
  • अन्य आरोप: हाल ही में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेज़ों की जालसाजी के दो मामले (FIRs) भी दर्ज किए थे।
  • छापेमारी: ओखला स्थित मुख्यालय सहित यूनिवर्सिटी से जुड़ी कम से कम 25 जगहों पर छापेमारी की गई। इस दौरान ₹48 लाख से अधिक नकद, कई डिजिटल डिवाइस और दस्तावेजी सबूत ज़ब्त किए गए।
  • SIT गठन: फरीदाबाद पुलिस ने शुक्रवार को यूनिवर्सिटी की गतिविधियों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
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