Delhi AQI Today: नहीं कम हो रहा दिल्ली की हवा से जहर, AQI मॉनिटरिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
Delhi AQI Today: दिल्ली-एनसीआर की वायु प्रदूषण की समस्या लगातार 'गंभीर' स्तर पर बनी हुई है, जिससे शहर पर ज़हरीले स्मॉग की मोटी चादर छाई हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 489 के खतरनाक स्तर के आस-पास दर्ज किया गया है, जो 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में आता है। इस ज़हरीली हवा के कारण लोगों को सांस लेने में भारी कठिनाई हो रही है, और खांसी, गले में जलन तथा आंखों में तकलीफ जैसे स्वास्थ्य संबंधी मामले अस्पतालों में तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों ने खासकर बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों को घर के अंदर रहने और N95 मास्क का उपयोग करने की सख्त सलाह दी है। प्रदूषण के मुख्य कारणों में पराली जलाना, वाहनों से निकलने वाला धुआँ और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियाँ शामिल हैं। खराब होते हालात को देखते हुए प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई पाबंदियाँ लागू कर दी हैं, लेकिन फिलहाल हवा की गुणवत्ता में कोई ख़ास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

पराली जलाने, वाहनों के धुएं और निर्माण गतिविधियों के कारण दिल्ली की हवा लगातार जहरीली हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
दिल्ली की हवा 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में
दिल्ली-एनसीआर में सोमवार को भी वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' से 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज किया गया।छह मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जो 'गंभीर' स्तर को दर्शाता है। विशेष स्थानों की रिपोर्ट के अनुसार, अलिपुर में AQI 386, आनंद विहार 384, अशोक विहार 392, चांदनी चौक 383, आईटीओ 394, लोधी रोड 337, मुंडका 396, नेहरू नगर 389 और सिरिफोर्ट 368 रहा। बवाना 427, DTU 403, जहांगीरपुरी 407, नरेला 406, रोहिणी 404 और वजीरपुर 401 जैसे इलाकों में वायु प्रदूषण 'गंभीर' स्तर पर था।
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से मांगा AQI उपकरणों का विवरण
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार से कहा कि वह वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मापने वाले उपकरणों और उनकी क्षमता के बारे में हलफनामा दाखिल करे। चीफ जस्टिस बी.आर. गवाई, जस्टिस विनोद चंद्रन और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने निर्देश दिया कि यह हलफनामा अगले दो दिन में प्रस्तुत किया जाए।
अमिकलस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि प्रदूषण मॉनिटरिंग स्टेशनों के आसपास पानी छिड़काव के मामले सामने आए हैं। केंद्रीय सरकार की ओर से एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि यह पूरे शहर में हो रहा है और राजनीतिक पार्टियां वीडियो वायरल कर रही हैं। CJI गवाई ने भी कहा, "मैंने सुप्रीम कोर्ट के आसपास पानी छिड़काव देखा।"
पराली जलाने की समस्या
सिंह ने अदालत को बताया कि पराली जलाने के मामलों की संख्या कम दिखाई जा रही है। उन्होंने किसानों को मशीनरी उपलब्ध कराने और पंजाब सरकार की सिफारिश के अनुसार केंद्र से प्रति क्विंटल ₹100 मुआवजा देने की जरूरत पर जोर दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि इस साल वायु प्रदूषण बढ़ गया है और दिल्ली में 3 में से 1 मौत प्रदूषण के कारण हो रही है। उन्होंने AQI 200+ को खतरनाक और 450+ को GRAP ट्रिगर बताया। अदालत ने पूछा कि क्या पत्थर क्रशर और अन्य निर्माण उपकरण पर सालभर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। एएसजी भाटी ने कहा कि यह संभव नहीं है क्योंकि इन गतिविधियों पर बड़ी संख्या में लोग निर्भर हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।












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