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दिल्ली की जहरीली हवा से दूर ये हैं बेस्ट ट्रेवल डेस्टिनेशन, पॉल्यूशन का नहीं है नामोनिशान, 50 से भी कम है AQI

Tourist Destination with Best AQI: देश के मैदानी इलाकों में जहरीली हवा हर दिन लोगों की सांसें और मुश्किल बना रही है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में जहां स्मॉग की चादर नजर आ रही है, वहीं हिमाचल की पहाड़ियां इस धुंध में उम्मीद की तरह चमकती दिखाई देती हैं। नवंबर का महीना बीत चुका है, बारिश बेहद कम हुई है, फिर भी हिमाचल की हवा पहले से ज्यादा साफ है। यही वजह है कि प्रदूषण से परेशान लोग अब सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि "सांस लेने की आज़ादी" पाने के लिए भी पहाड़ों का रुख कर रहे हैं।

शिमला, मनाली और धर्मशाला में एक्यूआई 50 के नीचे रिकॉर्ड किया गया है, जो देश के कई बड़े शहरों की तुलना में बेहद बेहतर है। दूसरी ओर बद्दी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी वायु गुणवत्ता धीरे-धीरे सुधर रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव आने वाले समय में हिमाचल को हेल्थ टूरिज्म की नई मंज़िल बना सकता है।

Tourist Destination with Best AQI

बद्दी की हवा में सुधार

बद्दी में पहले वायु गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में रहती थी, लेकिन अब यह मध्यम स्तर तक पहुंच गई है। हालांकि नवंबर में कुछ दिन एक्यूआई 300 के पार भी गया। इस महीने तीन दिन एक्यूआई 300 से ऊपर रहा, चार दिन 200 से 290 के बीच और बाकी दिनों में 135 से 170 के बीच दर्ज किया गया। पिछले पांच दिनों में लगातार सुधार देखा जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को भी राहत मिली है।

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87% कम हुई बारिश, फिर भी हवा सुधरी

नवंबर में हिमाचल में सामान्य से 87 प्रतिशत कम बारिश हुई है। किन्नौर में सबसे ज्यादा 3.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 54 प्रतिशत कम है। कई जिलों में बारिश एकदम नहीं हुई। इसके बावजूद वायु गुणवत्ता पिछले दो सालों की तुलना में बेहतर है। पर्यावरण विशेषज्ञ इसे हवाओं के रुख और पहाड़ी भूगोल का प्रभाव बता रहे हैं।

पहाड़ी पर्यटन स्थलों की हवा सबसे स्वच्छ

शिमला, मनाली, धर्मशाला जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में एक्यूआई 50 से भी कम है, जिसे 'अच्छा' माना जाता है। धूल, धुएं और स्मॉग से जूझ रहे मैदानी क्षेत्रों के लोग अब स्वास्थ्य लाभ के लिए पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं। डॉक्टर भी सांस से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को साफ हवा वाले क्षेत्रों में कुछ दिन बिताने की सलाह दे रहे हैं।

तीन वर्षों में वायु गुणवत्ता के आंकड़े

A B C D
1
शिमला 29-44 45-80 24-78
2
धर्मशाला 38-66 48-82 31-140
3
मनाली 26-49 26-60 26-55
4
सुंदरनगर 34-58 40-115 40-74
5
ऊना 71-76 64-164 21-153
6
डमटाल 42-62 45-113 38-74
7
परवाणू 41-47 46-162 23-41
8
पांवटा साहिब 67-123 73-118 77-129
9
कालाअंब 81-114 52-145 51-135
10
बद्दी 150-315 120-322 110-310
11
नालागढ़ 73-92 80-111 62-85

इन आंकड़ों से साफ है कि 2025 में कई शहरों में हवा पहले से साफ है।

पर्यावरण विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि मैदानी राज्यों में लगातार बढ़ता धुआं, वाहनों का प्रदूषण, पराली जलाना और निर्माण कार्य वायु गुणवत्ता बिगाड़ रहे हैं। पहाड़ी राज्यों में उद्योग सीमित हैं और घने जंगल कम प्रदूषण को सोख लेते हैं। यही कारण है कि बारिश कम होने के बाद भी हवा बेहतर बनी हुई है।

एक्यूआई का मानक

  • 0-50: अच्छा
  • 51-100: संतोषजनक
  • 101-200: मध्यम
  • 201-300: खराब
  • 301-400: बहुत खराब
  • 400 से अधिक: गंभीर

पर्यटन और स्वास्थ्य दोनों को मिला फायदा

पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि इस समय मैदानी इलाकों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। लोग सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि प्रदूषण से राहत पाने के लिए भी हिमाचल आ रहे हैं। होटल कारोबारियों का अनुमान है कि दिसंबर में यह संख्या और बढ़ सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, साफ हवा में कुछ दिन रहने से अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित मरीजों को काफी फायदा होता है। उन्हें सांस लेने में आसानी होती है और संक्रमण का खतरा भी कम होता है।

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