Delhi Air Pollution: सांसो पर संकट! दिल्ली की जहरीली हवा पर SC सख्त, बोला- रिपोर्ट है लेकिन कार्रवाई नहीं
Delhi Air Pollution: दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली होती जा रही है। राजधानी में सांस लेना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' स्तर पर पहुंच चुकी है। बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्य एजेंसियों को फटकार लगाई है।
सोमवार, 3 नवंबर को शीर्ष अदालत ने आयोग फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट यह जानने का प्रयास कर रही है कि दिल्ली की बिगड़ती हवा को काबू में लाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

कोर्ट ने पूछा है कि जब हर साल यही हाल होता है, तो रोकथाम के लिए ठोस और स्थायी उपाय क्यों नहीं किए जाते? इस बीच, कई मॉनिटरिंग स्टेशन बंद होने और हवा की रफ्तार धीमी होने से प्रदूषण स्तर और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालात ऐसे ही रहे तो दिल्ली अगले कुछ हफ्तों में "गैस चैंबर" बन सकती है।
निगरानी स्टेशन बंद, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया गया कि दिल्ली में प्रदूषण की निगरानी करने वाले कई स्टेशन फिलहाल काम नहीं कर रहे हैं। एक याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि दीवाली के दिन 37 में से केवल 9 मॉनिटरिंग स्टेशन ही चालू थे। उसने कहा, "हमें यह भी नहीं पता चलता कि ग्रैप (GRAP) कब लागू किया जाए, यही हालात की गंभीरता दिखाते हैं।"
एक अन्य वकील ने कहा कि "मीडिया में रिपोर्ट पर रिपोर्ट आ रही है कि निगरानी तंत्र काम नहीं कर रहा, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।"
CJI बी. आर. गवई ने मांगी रिपोर्ट
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की जगह अब न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। उन्होंने सीएक्यूएम और सीपीसीबी दोनों से कहा है कि तुरंत रिपोर्ट दें और बताएं कि दिल्ली की हवा को सुधारने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।
सोमवार दोपहर 1:05 बजे तक दिल्ली का समग्र एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 304 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब (Very Poor)' श्रेणी में आता है। सीपीसीबी के 'Sameer App' के अनुसार, दिल्ली के 28 मॉनिटरिंग स्टेशन का AQI 300 से ऊपर रहा। रविवार को भी स्थिति लगभग यही थी-कुल तीन स्टेशन पर वायु गुणवत्ता 'गंभीर (Severe)', यानी 400 से अधिक दर्ज की गई थी।
कम हवा की रफ्तार से और बिगड़ी स्थिति
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (AQEWS) के मुताबिक, रविवार शाम और रात में हवा की रफ्तार 8 किलोमीटर प्रति घंटे से कम हो गई थी। नतीजतन, हवा में मौजूद प्रदूषक कण फैल नहीं पाए और वातावरण में घनी स्मॉग की परत जम गई।
दिल्ली में फिर से 'सांसों पर संकट'
वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्तर का प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और दिल व फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए बेहद खतरनाक है। कई अस्पतालों में सांस की तकलीफ, एलर्जी और खांसी के मरीजों की संख्या में इजाफा दर्ज किया गया है। सरकार की ओर से प्रदूषण कम करने के लिए एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो हवा में पानी की महीन बूंदें छोड़कर धूल के कणों को नीचे गिराने का काम करती हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अस्थायी राहत देती है, समस्या का समाधान नहीं।
हर साल की तरह इस बार भी अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली 'गैस चैंबर' में बदलने लगी है। पराली जलाने, वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्य और मौसम के ठहराव ने मिलकर दिल्ली की हवा को खतरनाक बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वह कड़े निर्देश जारी कर सकता है, ताकि जनता की सेहत से खिलवाड़ न हो।












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