'मेडिकल ड्यूटी से था गायब', आतंकी डॉक्टर उमर ने दिल्ली में क्यों फोड़ा 'अधूरा' बम?
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला 35 वर्षीय डॉ उमर उन-नबी (Umar un-Nabi), जिसे उसका परिवार 'शांत और पढ़ाकू' बताता था, अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को दहलाने वाले एक हाई-इंटेंसिटी ब्लास्ट का मुख्य संदिग्ध बन गया है। लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए इस विस्फोट में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई थी।
जांच में पता चला है कि उमर उन-नबी ही वह व्यक्ति था जो विस्फोटकों से भरी Hyundai i20 कार चला रहा था। वह उस 'व्हाइट-कॉलर आतंकी नेटवर्क' से जुड़ा हुआ था, जिसका भंडाफोड़ विस्फोट से कुछ दिन पहले फरीदाबाद में हुआ था और जहां से लगभग 3,000 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया था।

जांच एजेंसियों द्वारा उमर उन-नबी को लेकर किए गए 5 सबसे बड़े खुलासे यहां दिए गए हैं:
1.व्हाइट-कॉलर नेटवर्क
उमर उन-नबी तीन डॉक्टरों के उस आतंकी नेटवर्क का हिस्सा था, जो जम्मू-कश्मीर से लेकर NCR तक साजो-सामान की आपूर्ति (लॉजिस्टिक्स) संभाल रहा था और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ा था।
- पुराना कनेक्शन: उमर, डॉ. अदील अहमद राथेर को गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC), अनंतनाग से जानता था, जहां वे सीनियर रेजिडेंट थे। अदील के कथित तौर पर JeM और अंसार गज़वत-उल-हिंद (AGuH) दोनों से संबंध थे।
- गांव और काम का कनेक्शन: डॉ. मुज़म्मिल शकील गनाई (जिसके ठिकाने से 3,000 किलो विस्फोटक मिला) और उमर दोनों पुलवामा के एक ही गांव के थे और फरीदाबाद के अल-फ़लाह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक साथ काम करते थे।
- नेटवर्क: ये तीनों डॉक्टर मिलकर पुलवामा से NCR तक आतंक के साजो-सामान का नेटवर्क चला रहे थे।
2. फरीदाबाद छापे से घबराकर की 'जल्दबाजी'
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों के अनुसार, फरीदाबाद में आतंकी मॉड्यूल पर छापे और भारी मात्रा में विस्फोटक की बरामदगी के बाद उमर 'घबरा गया' था।
- जल्दबाजी में कार्रवाई: अपने साथियों के पकड़े जाने के बाद, उमर को लगा कि अब पुलिस उस तक पहुंच जाएगी। इसी घबराहट में उसने सबूतों को नष्ट करने या ठिकाना बदलने की कोशिश की।
- अधूरा बम: पुलिस को संदेह है कि इसी घबराहट के चलते उसने विस्फोट को 'जल्दबाजी और हताशा' में अंजाम दिया। अधिकारी ने बताया, 'बम समय से पहले, अधूरा (Premature) था और पूरी तरह से विकसित नहीं था, जिसके कारण इसका प्रभाव सीमित रहा।'
3. विस्फोट में इस्तेमाल हुई i20 कार का सबूत
जांच एजेंसियों ने CCTV फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर यह स्थापित कर दिया है कि उमर ही विस्फोट से ठीक पहले Hyundai i20 कार चला रहा था।
- पहचान: ब्लास्ट से कुछ मिनट पहले उमर को CCTV फुटेज में कार चलाते हुए देखा गया था।
- पहले भी इस्तेमाल: एक अधिकारी के अनुसार, उमर 29 अक्टूबर को फरीदाबाद के सेक्टर 37 में भी उसी कार को चलाता हुआ देखा गया था।
4. वही विस्फोटक जो फरीदाबाद से मिला
यह पुष्टि हो गई है कि लाल किले के पास विस्फोट में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक (अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल) वही था जो फरीदाबाद में मुज़म्मिल के ठिकाने से बरामद किया गया था।
अधिकारी ने बताया, एजेंसियों की सफलता के बाद, घबराहट और हताशा की स्थिति में, वह लाल किले की ओर बढ़ा। यह घटना उसी कड़ी का अभिन्न अंग थी जिसके कारण बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।' फरीदाबाद में 2,900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, डेटोनेटर, टाइमर और राइफल बरामद हुए थे। उमर इन्हीं में से अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल और एक डेटोनेटर लेकर दिल्ली आया था।
5. मोबाइल बंद, मेडिकल ड्यूटी से गायब
जांचकर्ताओं के अनुसार, 30 अक्टूबर के बाद से उमर उन-नबी लगातार दबाव में था।
- फरार: अमोनियम नाइट्रेट ज़ब्ती की खबर सार्वजनिक होने के बाद वह दिल्ली भाग गया और 9 नवंबर के छापे के बाद छिप गया था।
- डिजिटल फुटप्रिंट: उसने 30 अक्टूबर के बाद अपने पांचों मोबाइल नंबर बंद कर दिए थे, और उस तारीख के बाद से वह अपनी मेडिकल ड्यूटी पर भी नहीं जा रहा था। एक अधिकारी ने कहा, 'वह दबाव में था और जानता था कि घेरा कस रहा है।'












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