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पुरंदेश्वरी की जगह ओम माथुर को क्यों बनाया गया BJP का छत्तीसगढ़ प्रभारी? पढ़िए इनसाइड स्टोरी

निढाल पड़ी भाजपा को रिचार्ज करने के लिए 2 साल पहले ही अनिल जैन की जगह डी पुरंदेश्वरी को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया था ,लेकिन 2023 की उलटी गिनती शुरू ही अचानक उन्हें हटाकर ओम माथुर को नया छत्तीसगढ़ प्रभारी बना दिया गया ह

रायपुर, 10 सितंबर। छत्तीसगढ़ में 15 साल तक सरकार चलने वाली भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर से सत्ता में वापसी के लिए बेकरार है,लेकिन इस बार उसकी सीधी टक्कर राज्य में मजबूत हो चुकी कांग्रेस से है। 2018 में कांग्रेस से मिली करारी हार के बाद निढाल पड़ी भाजपा को रिचार्ज करने के लिए 2 साल पहले ही अनिल जैन की जगह डी पुरंदेश्वरी को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया था ,लेकिन 2023 की उलटी गिनती शुरू ही अचानक उन्हें हटाकर ओम माथुर को नया छत्तीसगढ़ प्रभारी बना दिया गया है। अचानक हुए इतने बड़े परिवर्तन के बाद सवाल उठ रहे हैं कि भाजपा आलाकमान को आखिरकार इतना बड़ा फैसला क्यों लेना पड़ा। आइये इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश करते है।

पुरंदेश्वरी ने लिया था अनिल जैन का स्थान

पुरंदेश्वरी ने लिया था अनिल जैन का स्थान

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी ने अपना मिशन 2023 शुरू कर दिया है। 15 सालों तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह फ़िलहाल भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं ,लेकिन प्रदेश में भाजपा से जुड़े हर छोटे बड़े फैसले खुद लेते रहे हैं। कहा जाए ,तो छत्तीसगढ़ में भाजपा का दूसरा नाम टीम रमन सिंह ही रहा है। 2018 में कांग्रेस से मिली करारी शिकस्त के बाद प्रदेश में हाशिये पर जा चुके नेता और रमन विरोधी गुट ने आवाज उठाना शुरू किया।

इसका असर दो साल बाद देखने को मिला , जब पार्टी आलाकमान ने हरियाणा मूल के नेता अनिल जैन की जगह तेज तर्रार महिला नेत्री डी पुरंदेश्वरी को छत्तीसगढ़ में प्रदेश प्रभारी बनाकर भेजा। छत्तीसगढ़ में कमान संभालते ही डी पुरंदेश्वरी ने लगातार बैठकों का दौर शुरू किया। प्रदेश के सभी संभागों में भाजपा के चिंतन शिविर आयोजित करके कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया।

जमीनी स्तर पर की मेहनत ,अपना काम पूरा करके लौट रही हैं पुरंदेश्वरी

जमीनी स्तर पर की मेहनत ,अपना काम पूरा करके लौट रही हैं पुरंदेश्वरी

सूत्र बताते हैं कि इन बैठकों में उन्हें पार्टी में 15 साल तक सरकार रहे दिग्गज भाजपाई नेताओ से असहयोग मिलने की शिकायत मिली। इसके बाद ही यह तय हो गया था कि छत्तीसगढ़ में चुनाव से पहले भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन होगा। हाल ही में भाजपा ने सीनियर विधायक नारायण चंदेल को नेता प्रतिपक्ष और बिलासपुर सांसद अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है।

विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा में बदलाव का सिलसिला आगे भी जारी रहा और जगत प्रकाश नड्डा ने अपने रायपुर प्रवास के दौरान ही डी पुरंदेश्वरी के स्थान पर ओम माथुर को प्रदेश प्रभारी बना दिया।सवाल उठे कि आखिर दो साल तक छत्तीसगढ़ में मेहनत करने वाली डी पुरंदेश्वरी सक्रियता के बावजूद क्यों हटा दिया गया।

गृहराज्य में लोकसभा चुनाव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी

गृहराज्य में लोकसभा चुनाव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी

दरअसल भाजपा ने केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं,बल्कि कई राज्यों में प्रदेश प्रभारी बदले हैं। इसका सीधा सा मतलब यह कि लक्ष्य करके डी पुरंदेश्वरी को छत्तीसगढ़ से नहीं हटाया गया है। दरअसल छत्तीसगढ़ में उनका काम पूरा हो चुका है। उनको छत्तीसगढ़ में चुनाव से पहले प्रदेश के भाजपा कार्यकर्ताओं के मन की बात पढ़ने और कांग्रेस के खिलाफ जरूरी रणनीति और बदलाव संबंधी रिपोर्ट तैयार करने के लिए भेजा गया था। इन दो सालों में संगठन के कामकाज को बेहतर तरीके से समझने के बाद उनके अनुभव का लाभ पार्टी को उनके 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले दक्षिण भारत के राज्यों में मिलेगा।

ताकि नेताओं में ना रहे मनमुटाव

ताकि नेताओं में ना रहे मनमुटाव

कड़े फैसले लेकर छत्तीसगढ़ में भाजपा के कई शीर्ष नेताओं की आंखो की किरकरी बनी पुरंदेश्वरी पर कांग्रेस की भी नजर बनी रही। कई बार सीएम भूपेश बघेल ने भी पुरंदेश्वरी के बयानों और उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें हंटर वाली बताया था। अब भाजपा चुनाव में जाने से पहले एकदम नई टीम चाहती है। नेताओ के बीच किसी प्रकार का मनमुटाव ना रहे,इसलिए प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के बदलने के बाद पार्टी ने प्रदेश प्रभारी भीं बदल दिया है।

ओम माथुर रहे हैं सफल , छत्तीसगढ़ में झोकेंगे ताक़त

ओम माथुर रहे हैं सफल , छत्तीसगढ़ में झोकेंगे ताक़त

डी पुरंदेश्वरी के स्थान पर राजस्थान के दिग्गज नेता भाजपा नेता ओम माथुर को छत्तीसगढ़ का प्रभार सौंपा गया है। ओम माथुर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में प्रभारी होने का अनुभव है। ॐ माथुर मध्य प्रदेश, झारखंड जैसे कई प्रदेशों में भाजपा के लिए बेहतर परफॉर्मेंस कर चुके है।

जानकार बताते है कि देश के कई राज्यों में सफल चुनावी रणनीति बनाकर बेहतर टिकट वितरण में उनका अहम योगदान रहा है। छत्तीसगढ़ में नई टीम बनाने के बाद आगामी चुनाव में जीतने वाले चेहरों को टिकट देना सबसे बड़ी चुनौती होगी। जानकर बताते है कि ओम माथुर पार्टी में बूथ स्तर तक कार्यकर्तों से संवाद स्थापित करके फैसले लेने में माहिर हैं,इसलिए उनके अनुभव को लाभ छत्तीसगढ़ में भाजपा की वापसी के लिए किया जायेगा।

छत्तीसगढ़ के साथ राजस्थान भी महत्त्वपूर्ण है

छत्तीसगढ़ के साथ राजस्थान भी महत्त्वपूर्ण है

छत्तीसगढ़ की तरह ही अगले साल राजस्थान में भाजपा को वापसी करनी है,तो दोनों राज्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करना होगा। ओम माथुर राजस्थान में भाजपा की कोर कमेटी के सदस्य हैं और अब छत्तीसगढ़ के प्रभारी भी है। ओम माथुर को राजस्थान से दूर करके भाजपा ने एक तीर से दो लक्ष्य साधे हैं। दरअसल ओम माथुर को राजस्थान की सियासत में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के विरोधी धड़े के नेता के रूप में देखा जाता है। उनके छत्तीसगढ़ में सक्रिय होने से राजस्थान में भी संतुलन कायम रहेगा और छत्तीसगढ़ और राजस्थान से कांग्रेस सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।

यह भी पढ़ें Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में BJP का चेहरा कौन, क्या संगठन ने रमन सिंह से बनाई दूरी ?

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