Chhattisgarh: कुछ घंटो के लिए खुली लिंगेश्वरी माता की गुफा, जानवरों के पंजे का निशान देखकर की गई भविष्यवाणी
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में जंगलो के बीच एक ऐसा देवस्थान हैं,जो साल में केवल एक बार खुलता है। इस स्थान पर विराजी देवी के दर्शन के लिए देशभर से लोग पहुंचते हैं,वहीं मंदिर में उभरे जानवरों के पंजों के निशान से सालभर के
कोंडागांव, 08 सितंबर। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में जंगलो के बीच एक ऐसा देवस्थान हैं,जो साल में केवल एक बार खुलता है। इस स्थान पर विराजी देवी के दर्शन के लिए देशभर से लोग पहुंचते हैं,वहीं मंदिर में उभरे जानवरों के पंजों के निशान से सालभर के लिए भविष्यवाणी की जाती है। स्थान है माता लिंगेश्वरी की गुफा,जो कि कोंडागांव के फरसपाल में स्थित है। बुधवार को मंदिर को यह मंदिर खुला था,जो कि अब अगले साल इसी समय खुलेगा।

पहड़ियों में है माता लिंगेश्वरी का गुफा मंदिर
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के फरसगांव से बड़ेडोंगर मार्ग पर स्थित ग्राम आलोर से करीब 3 किलोमीटर किमी दूर झांटीबन की पहाड़ियों में माता मां लिंगेश्वरी की गुफा है। इस गुफा का द्वार साल में एक बार ही खुलता है। बुधवार को मंदिर समिति के पुजारियों ने पूजा-अर्चना करके कुछ घंटो के लिए गुफा का द्वार खोला। अब यह मंदिर अगले साल इसी मुहूर्त में खुलेगा।

हज़ारो की संख्या में पहुंचे भक्त
इस गुफा मंदिर का द्वार खोलने के बाद दर्शन और मन्नात के पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने गुफा के बाहर से माता के दर्शन किये। इस दौरान मंदिर समिति, जिला और पुलिस प्रशासन की टीम मंदिर तक पहुंचने में श्रद्धालुओं की मदद कर रही थी ।घना जंगल और नक्सल प्रभावित इलाका होने के कारण जानकारी होने के बावजूद कई लोग यहाँ तक नहीं पहुंच पाते है।

संतान की होती है प्राप्ति
दो वर्ष तक कोरोना के कारण माता के दर्शन के लिए तरस रहे श्रद्धालुओं ने उनकी एक झलक के लिए काफी मशक्त की,लेकिन सभी श्रद्धालुओं ने बारी-बारी करके माता का दर्शन करने का अवसर दिया गया। सभी ने अपनी मन्नत लिगेश्वरी माता से मांगी। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने वाले निसंतान दम्पत्तियों को संतान की प्राप्ति होती है। देशभर से लोग अपनी इस कामना की पूर्ति के लिए माता के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

गुफा में उभरते हैं जानवरों के पद चिन्ह
हर मंदिर को लेकर अपनी मान्यताएं होती हैं। कोंडागांव के लिंगेश्वरी माता गुफा मंदिर के द्वार हर साल भादो माह की नवमी तिथि के बाद पड़ने वाले प्रथम बुधवार को खुलता है। माता की सेवा और अर्जी के बाद उसके भीतर रेत में उभरे पदचिन्हों को देखकर पेनपुजारी की तरफ से सालभर की भविष्यवाणी की जाती है। समिति के सदस्यों ने बताया कि है हर साल अलग-अलग जीव जंतुओं के पंजो के निशान गुफा के अंदर रेत में उभरे रहते हैं।

सालभर के लिए होती है भविष्यवाणी, जानिए पदचिन्हों का मतलब
स्थानीय लोगों ने बताया कि गुफा की रेत अगर कमल फूल के निशान दिखाई देते हैं, तो धन संपत्ति में वृद्धि होती है। हाथी के पांव के निशान दिखते हैं, तो परिपूर्ण धनधान्य मिलता है। इसी प्रकार यदि घोड़े के खुर के निशान दिखते हैं, तो युद्ध की संभावना रहती है। बिल्ली के पंजो के निशान मिले तो भय होता है, बाघ के पंजों के निशान मिले, तो क्षेत्र में जंगली जीवों का आतंक होता है। इसी तरह यदि मुर्गी के पंजों के निशान दिखाई दे,तब इलाके में अकाल पड़ने की संभावना होती है। इस साल मंदिर की गुफा में बिल्ली के पंजे के निशान देखे गए हैं।
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