बढ़ रहा है तापमान ,धधक रहे हैं जंगल, पर राहत मुश्किल, छत्तीसगढ़ में वनकर्मी हड़ताल पर !
Temperature is rising, forests are burning, but relief is difficult, forest workers on strike in Chhattisgarh
रायपुर, 30 मार्च। जंगलों से घिरे हुए छत्तीसगढ़ के लिए यह वक्त बेहद मुश्किल भरा है। एक तरफ राज्य का मौसम तापमान में वृद्धि दर्ज करने के बाद से दिनों दिन गर्म होता जा रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के 10 खूबसूरत जंगल आग के हवाले हो चुके हैं। मुश्किल बड़ी है, क्योंकि राज्य के वन विभाग के सैकड़ों कर्मचारी हड़ताल पर चल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यह आग कौन बुझायेगा?

वन कर्मियों की हड़ताल बनी मुसीबत
छत्तीसगढ़ के सैकड़ों वन कर्मी 21 मार्च से हड़ताल पर जा चुके हैं। मौसम गर्म होने से छत्तीसगढ़ के जंगलों में लगी आग अब रौद्र रूप लेने लगी है। भारतीय वन सर्वेक्षण की तरफ से कराये गए सर्वे के मुताबिक इस समय छत्तीसगढ़ के जंगलों में 10 हजार 536 से ज्यादा स्थान आग के हवाले हो चुके हैं। मिली जानकारी के मुताबिक आग तेजी से फैलती जा रही है, हालांकि राज्य के वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उनकी नजर लगातार जंगलों में बनी हुई है और आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रदेश के वन कर्मी वेतन विसंगति दूर करने समेत अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर 21 मार्च से हड़ताल पर चल रहे हैं। जंगलो में आग लगने के बाद उन्हें बुझाने के लिए कोई नहीं है और जंगलो में आग लगने की सूचना मिलने में भी देरी हो रही है। बहरहाल इस हड़ताल के कारण वन विभाग के अधिकारी खुद फील्ड पर एक्टिव हो गए हैं और ग्रामीणों की मदद से आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। माना जाता है कि हर साल 16 फरवरी से 15 जून तक गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनायें बढ़ती हैं।

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री बेपरवाह
इधर जंगलों में आग के फैलने से जंगली जानवरों को नुकसान पहुंचने की खबरे मिल रही है। इस मुश्किल घड़ी में भी छत्तीसगढ़ के वन मंत्री मोहम्मद अकबर वन कर्मचारियों की हड़ताल को खत्म कराने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हुए नहीं दिख रहे हैं। अकबर का कहना है कि वनकर्मियों की अधिकतर मांगों पर सहमति बन गई है, कुछ मामलों को कैबिनेट में पेश करना होगा। छत्तीसगढ़ के जंगलों में आग फैलने की खबरों को नकारते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के जंगलों में बीते साल की तुलना में कोई खास आग नहीं लगी है। कुछ लोग पुराने फोटो और वीडियो वायरल करके भ्रम फैला रहे हैं।

ग्रामीण भी लगा सकते हैं आग
वन अधिकारियों का कहना है कि गर्मी का मौसम आते ही जंगलों में हर साल आग लगती है, इस मौसम में वन विभाग हमेशा सजग रहता है, लेकिन इस बार वन कर्मियों की हड़ताल के कारण आग बुझाने में समस्या आ रही है। वन विभाग को संदेह है कि यह आग ग्रामीणों ने ही लगाई है। दरअसल इस मौसम में महुआ बीनने के लिए ग्रामीण जंगल के पत्तों में आग लगा देते हैं, जिसकी वजह से अक्सर आग फैल जाती है।

घट रहा है ऑक्सीजन लेवल, इंसान, जानवर दोनों असुरक्षित
इस समय कवर्धा के जंगलों में भी आग की लपटें दूर तक देखी जा रही है। भोरमदेव अभ्यारण्य का क्षेत्र होने के कारण यहां वन्य जीव भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं, लिहाजा वन विभाग की चिंता बढ़ी हुई है, क्योंकि आग लगने से हिंसक वन्य जीव भी अपना जीवन बचाने के लिए इंसानी बस्तियों की तरफ भागते हैं। बहरहाल जंगलों में आग लगने से जहां, वन संपदा को बड़ा नुकसान हो रहा है, वहीं पेड़ों की संख्या घट जाती है, जिससे इलाके के ऑक्सीजन लेवल पर बुरा असर पड़ता है।
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