छत्तीसगढ़ में लगेगा देशभर के जनजातीय साहित्यकारों का जमावड़ा, भूपेश सरकार करवा रही है अनूठा आयोजन
Raipur will organize a gathering of tribal writers from across the country, Chhattisgarh government is organizing a unique event में भूपेश
रायपुर, 16 अप्रैल। आदिवासी नृत्य महोत्सव आयोजित करके दुनियाभर में वाहवाही लूटने वाली छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार एक बार फिर से अनूठा आयोजन करवाने जा रही है। छत्तीसगढ़ के जनसम्पर्क विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 19 अप्रैल से राजधानी रायपुर में देशभर के जनजातीय साहित्यकारों के कुंभ का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन पंडित दीनदयाल आडिटोरियम में आयोजित किया जायेगा। 19 अप्रैल से 21 अप्रैल तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन का नाम राष्ट्रीय जनजातीय साहित्यकार महोत्सव रखा गया है ,जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे।

3 दिनों तक चलेगा जनजातीय साहित्यकार महोत्सव , सहदेव भी देगा प्रस्तुति
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित होने वाले इस राष्ट्रीय जनजातीय साहित्यकार महोत्सव में जनजातीय नृत्य प्रदर्शन और कला और चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजित की जाएंगी । इसके अतिरिक्त पुस्तक मेला, कई विभागों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।
राज्य के आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की अगुवाई में आयोजित किए जा जाने वाले इस राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव में देश के विभिन्न अंचलों के जनजातीय समुदाय के सम्मानित व्यक्तियों, समाज प्रमुखों, साहित्यकारों और कला विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया है। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। जिसमे प्रमुख तौर पर छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बस्तर बैंड के प्रदर्शन के अलावा वायरल वीडियो स्टार बाल कलाकार सहदेव नेताम का जनजातीय नृत्य प्रमुख आकर्षण होगा। इस आयोजन की शरुआती तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

जनजातीय कथाएं, जनजातीय कविताएं, पुरखा साहित्य में होगी परिचर्चा
महोत्सव का मकसद देशभर में पारम्परिक एवं समकालीन जनजातीय साहित्य से परिचय और आधुनिक संदर्भ में उनके विकास की स्थिति जानना है। साथ ही छत्तीसगढ़ में जनजातीय साहित्य के क्षेत्र में काम करने वाले शोधार्थियों, साहित्यकारों, रचनाकारों को मंच देकर कर जनजातीय साहित्य के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रोत्साहित करना है। मिली जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम में जनजातीय साहित्य से जुड़े विभिन्न विषयों के स्थापित और नवोदित साहित्यकारों को आमंत्रित कर जनजातीय परम्परा में साहित्य और वर्तमान स्थिति, जनजातीय कथाएं, जनजातीय कविताएं, पुरखा साहित्य में परिचर्चा होगी।

देशभर से आएंगे शोधकर्ता
साहित्य महोत्सव में देश के कई राज्यों से जनजातीय विषयों पर लिखने वाले साहित्यकारों और शोधकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार इन शोधकर्ताओं के के शोध का प्रकाशन भीकरेगी । साहित्य महोत्सव के तहत कला और चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित होगी। इसके अलावा हस्तकला के तहत माटी, बांस, बेलमेटल, काष्ठकला का भी प्रदर्शन किया जाएगा। इसी तरह दीवारों पर, पत्थरों पर कई प्रकार के जनजातीय सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को दर्शाती चित्रकला देखने को मिलेगी मिली जानकारी के मुताबिक प्रतियोगिता में करीब 350 प्रतियोगी शामिल होंगे।

दिखाई देगी छत्तीसगढ़ की संस्कृति की झलक
इस महाआयोजन में छत्तीसगढ़ की कई नृत्य विधाओं का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जिसमें जनजातीय नृत्य शैला, सरहुल, सोन्दो, कुडुक,करमा, डुंडा, दशहरा करमा, गवरसिंह, विवाह नृत्य , मड़ई नृत्य, गेड़ी, करसाड़, मांदरी, डण्डार जैसे नृत्यों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस महोत्सव में पुस्तक मेला भी लगाया जायेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले भूपेश बघेल सरकार ने आदिवासी नृत्य महोत्सव का भी आयोजन किया है,जो बेहद ही सफल रहा है। इस महोत्सव में भारत हिन् नहीं बल्कि दुनियाभर के कई देशों के आदिवासी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी थी। इसके सफल आयोजन के बाद छत्तीसगढ़ को एक अलग पहचान भी मिली है। जहां तक साहित्य महोत्स्व की बात है। रमन सरकार के कार्यकाल में रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में रायपुर साहित्य महोत्सव का आयोजन हो चुका है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद यह दोबारा नहीं हो पाया। बहरहाल जनजातीय वर्गों के साहित्यकारों के लिए अब नया कार्यक्रम आयोजित होने वाला है।
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