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'पूरा गांव बना दशरथ मांझी', सरकार ने नहीं सुनी तो एक किमी लंबा पाइप लगाकर खुद खींच लाए झरने से पानी

सरगुजा, 15 अप्रैल। इंसान को जिन्दा रहने के लिए खाना, हवा और पानी की सबसे अधिक जरूरत होती है। अगर प्यास लगी हो, तो इंसान आसमान से लेकर पाताल तक पानी की खोज पर निकल पड़ा है। छत्तीसगढ़ सरगुजा में ग्रामीणों ने ऐसा ही कुछ कारनामा कर दिखाया है, जो उनके हौसले की मिसाल तो पेश करता ही है, लेकिन साथ ही सरकारी सिस्टम पर करारा तमाचा भी है। दरअसल सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र में ग्रामीणों ने गांव का हेंडपम्प खराब होने के बाद पाइप लाइन बिछाकर एक किलोमीटर दूर पहाड़ में झरने से अपने गांव में पानी पहुंचा दिया है।

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    'पूरा गांव बना दशरथ मांझी', सरकार ने नहीं सुनी तो एक किमी लंबा पाइप लगाकर खुद खींच लाए झरने से पानी
    पहाड़ में बह रहे झरना बुझा रहा प्यास

    पहाड़ में बह रहे झरना बुझा रहा प्यास

    छत्तीसगढ़ में गर्मी का मौसम शुरुआत से ही अपने तेवर दिखा रहा है। मैदानी इलाकों में जहां लोग सूरज की तेज तपिश से हलकान हैं, तो वहीं दूरस्थ अंचलो में ग्रामीण पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत लब्जी के आश्रित ग्राम जामा के ग्रामीण आज भी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों को गांव का हैंडपम्प खराब हो जाने के बाद पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। लाख मिन्नतों के बाद भी सरकारी सिस्टम ने हैंडपंप नहीं सुधारा, तो ग्रामीणों ने गांव से एक किलोमीटर दूर पहाड़ में बह रहे झरने से पानी लेना शुरू कर दिया है।

    चंदा करके खुद ही बिछा दी पाइप लाइन

    चंदा करके खुद ही बिछा दी पाइप लाइन


    ग्राम जामा के बाशिंदों ने पहले आपस में चंदा इकठ्ठा करके पाइप खरीदी। उसके बाद एक किलोमीटर दूर पहाड़ से गांव तक पाइप लाइन बिछाकर अपने घरों तक पानी ले आये। ग्रामीण पानी का उपयोग पीने के अलावा अपनी दैनिक दिनचर्या के लिए भी कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि उनके गांव में गर्मी के दिनों में ही नहीं बल्कि हर मौसम में पानी की समस्या बनी रहती है। बरसात के दिनों में उन्हें गंदे पानी के सहारे जीवन काटना पड़ता है।

    जामा के ग्रामीण युवा दिनेश तिर्की का कहना है कि उनके गांव में लोग पानी की समस्या से बहुत परेशान हैं, इसलिए अपनी जेब से पैसे खर्च करके उन्होंने पाइप लाइन बिछाने का निर्णय लिया। दिनेश का कहना है कि झरने के पानी से किसी तरह गर्मी के मौसम में काम चला रहे हैं, लेकिन बरसात के दिनों में इस पानी को पीने से हम बीमार पड़ सकते हैं, इसलिए हमारे गांव में खराब पड़े हैंडपंप को जल्द से जल्द बनाया जाना चाहिए।

    32000 रूपये खर्च करके ढूंढा समाधान

    32000 रूपये खर्च करके ढूंढा समाधान

    ग्रामीण दुहन पन्ना का कहना है कि पिछले गांव का हैडंपप बीते 8 महीने से खराब है। इसलिए हर घर से चंदा करके हमें पाइप लाइन बिछाने पड़ी, जिसमें करीब 32000 रुपये खर्च आया है। वहीं गांव की गृहणी कमलापति का कहना है कि हैंडपंप बिगड़ने के बाद हम लोग नदी और झरने से पानी ला रहे थे, लेकिन इसमें होने वाली तकलीफ को देखते हुए सबने पाइपलाइन बिछाने का फैसला लिया। अब हम अपने घरों में खुद पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम गांव वाले सरकार से सुविधा की मांग कर सकते हैं, लेकिन जब लगने लगा कि सुविधा नहीं मिलेगी, तो पाइप बिछानी पड़ी।

    विधायक जी का तर्क भी जानिए

    विधायक जी का तर्क भी जानिए

    ग्राम जामा सरगुजा की लुंड्रा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस सीट से प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी के कांग्रेस विधायक डॉ. प्रीतम राम का कहना है कि प्रकृतिक के गोद में सब रहकर उसका अपने तरीके से उपयोग करते हैं। सरकार अब जल जीवन मिशन के तहत प्राथमिकता के आधार पर दूरस्थ अंचलों में घर घर तक पानी पहुंचने का काम कर रही है।

    इसका लाभ दिलवाने का प्रयास किया जायेगा। सरकार के संज्ञान में होने के बावजूद जामा के ग्रामीणों को हैण्डपम्प बंद होने की वजह से झरने से पानी गांव तक लाना पड़ रहा है। अब इंतजार ही किया जा सकता है कि सरकार कब जागती है, क्योंकि ग्रामीणों ने फिलहाल खुद ही अस्थायी समाधान ढूंढ निकला है।

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