नक्सलियों की सुरक्षा बलों पर हमला करने के लिए नई रणनीति, दिवाली पटाखों और अगरबत्ती का कर रहे उपयोग

Chhattisgarh News: भारत में सुरक्षा बलों को नक्सलियों द्वारा अपनाई गई एक नई और अपरंपरागत रणनीति का सामना करना पड़ रहा है। माओवादी अब वामपंथी अतिवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के शिविरों पर हमले करने से पहले दिवाली पटाखे और अगरबत्ती का उपयोग कर रहे हैं। ताकि बलों को विचलित किया जा सके। यह नई रणनीति 25 सितंबर को तेलंगाना के पुसगुप्पा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शिविर पर हुए हमले में देखी गई।

नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार शाम करीब 6:30 बजे तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा के पास स्थित सीआरपीएफ के शिविर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर विस्फोट की आवाजें और धुआं दिखाई दिया। सैनिक तुरंत रक्षात्मक स्थिति में आ गए। माओवादियों ने अस्थायी रॉकेट और बैरल ग्रेनेड लांचर से हमला शुरू कर दिया।

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सीआरपीएफ के जवानों ने आईएनएसएएस और एके सीरीज की राइफलों से जवाबी कार्रवाई की। गोलीबारी लगभग 45 मिनट तक जारी रही। जब तक कि माओवादी पीछे नहीं हटे। हालांकि रॉकेट हमले से शिविर की बाड़ को थोड़ा नुकसान हुआ। लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।

हमले के बाद सीआरपीएफ के जवानों ने शिविर के आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया और पेड़ों से लटके विस्फोटित दिवाली पटाखे और जली हुई अगरबत्तियां पाई गई। इससे माओवादियों द्वारा इस नई रणनीति का उपयोग किए जाने की पुष्टि हुई। अगरबत्तियां पटाखों के लिए टाइमर का काम करती हैं। माओवादी पटाखों के पास अगरबत्तियां जलाते हैं और फिर सुरक्षित स्थान पर जाकर हमले की तैयारी करते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार माओवादियों के लिए सीधा टकराव अब मुश्किल होता जा रहा है। इसलिए वे प्रॉक्सी हमलों पर निर्भर हो रहे हैं। पहले माओवादी खनन क्षेत्रों से विस्फोटक चुराते थे। लेकिन अब वे दिवाली-ग्रेड के पटाखों और कच्चे रॉकेट का उपयोग कर रहे हैं। जो आसानी से उपलब्ध होते हैं और उनका पता लगाना भी मुश्किल होता है।

हालांकि यह नई रणनीति अत्यधिक खतरनाक नहीं है। लेकिन सुरक्षा बल सतर्क बने हुए हैं। ये हमले मुख्य रूप से उन सुदूर क्षेत्रों में किए जा रहे हैं। जहां सीआरपीएफ नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित कर रहा है। पिछले तीन-चार वर्षों में छत्तीसगढ़ में लगभग 40 ऐसे बेस बनाए गए हैं। इस साल चार और बनाने की योजना है।

दक्षिणी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र जो ओडिशा और तेलंगाना की सीमा से सटा है। उसमें नक्सल विरोधी अभियान सबसे तीव्र हैं। सीआरपीएफ माओवादियों की इन नई रणनीतियों से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा और ऑपरेशन योजनाओं को लगातार अनुकूलित कर रहा है।

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