दो मोर्चों पर तैनात भारतीय सेना, आतंकवाद के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' और नक्सलवाद के खिलाफ 'Mission Sankalp'
Mission Sankalp anti-Naxal operation: एक ओर सीमा पार आतंक के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय सुरक्षा बलों की कार्यवाही ने पाकिस्तान में खलबली मचा दी है, तो वहीं देश के भीतर छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमाओं पर 'मिशन संकल्प' के जरिए नक्सलवाद के गढ़ को खत्म करने की बड़ी कार्रवाई जारी है।
'ऑपरेशन सिंदूर' से भारतीय सेना ने तीव्र और सटीक कार्यवाही कर पाकिस्तान को सीधा संदेश दिया कि अब हर आतंकी हरकत की कीमत चुकानी होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय बैठक में बताया कि इस ऑपरेशन के तहत करीब 100 आतंकवादियों मारे जाने की आधिकारीक पुष्टि की है, जो पहलगाम आतंकी हमले का सीधा बदला था।

Mission Sankalp : नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान
दूसरी तरफ सेना का एक और ऑपरेशन चल रहा है जिसमें नक्सलियों के खात्मे का अभियान चल रहा है। इसे अमित शाह के ऑपरेशन संकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। कर्रेंगुट्टा की दुर्गम पहाड़ियों में सुरक्षा बलों ने PLGA की 'बटालियन 1' जैसे खतरनाक माओवादी दस्ते को घेरा हुआ है। यह वही बटालियन है जो बस्तर, बीजापुर, सुकमा जैसे क्षेत्रों में अब तक 150 से अधिक जवानों की शहादत के लिए जिम्मेदार रही है।
Anti-Naxal operation में तीन जवानों की शहादत
इस अभियान की ताजा जानकारी के अनुसार, तेलंगाना के वेंकटपुरम और ईडमिली की पहाड़ियों में मुठभेड़ के दौरान आईईडी ब्लास्ट हुआ है, जिसमें तीन जवान बलिदान हो गए हैं और तीन अन्य घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि, इस घटना की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हालांकि अभी तक इसकी कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं मिली है।
ये ब्लास्ट तेलंगाना के मूलगु जिले के वाजेडु गांव में गुरुवार सुबह हुआ यह इलाका छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से सटा हुआ है और माओवादियों की गतिविधियों के लिए कुख्यात माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में सुरक्षाबलों की टीम गश्त पर थी तभी माओवादियों ने पहले से ही आईईडी बिछा कर रखा था।
Mission Sankalp कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में 16 दिनों से चल रहा ऑपरेशन
बस्तर नक्सली गतिविधियों का गढ़ रहा है और सेना का ये अभियान भी नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले और तेलंगाना सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में 16 दिनों से चल रहा है। बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने जानकारी दी कि ऑपरेशन की शुरुआत 21 अप्रैल को हुई थी, और अब तक इस क्षेत्र में 35 से अधिक मुठभेड़ें हो चुकी हैं।
'मिशन संकल्प' के तहत सेना तैनात हैं, जिसका उद्देश्य बस्तर और देश के अन्य हिस्सों में पिछले छह दशकों से फैले वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) का अंत करना है।
Anti-Naxal operation में कई इनामी महिला नक्सली ढ़ेर
इस ऑपरेशन के दौरान अब तक कई कुख्यात माओवादी ढेर किए जा चुके हैं। 24 अप्रैल को पीएलजीए बटालियन नंबर 1 से जुड़ी तीन महिला नक्सली, जिन पर प्रत्येक पर 8 लाख रुपये का इनाम था, मारी गईं। 5 मई को एक और महिला नक्सली का शव बरामद हुआ, जबकि बुधवार को भी कई नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। कर्रेगुट्टा और उसके आसपास का क्षेत्र माओवादी बटालियन नंबर 1 का गढ़ माना जाता है।
आईजी सुंदरराज के अनुसार, अब तक इस अभियान में सुरक्षाबलों ने 40 से अधिक हथियार, करीब 400 इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी), 2 टन विस्फोटक सामग्री और 6 टन से ज्यादा राशन, दवाइयां, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और अन्य माओवादी सामग्री जब्त की है। यह ऑपरेशन नक्सलियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
Naxal operation: नक्सलियों के लिए मददगार है कर्रेंगुट्टा की भौगोलिक स्थिति
माना जा रहा है कि माओवादी संगठन 'कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी)' के शीर्ष नेता कर्रेंगुट्टा की इसी पहाड़ियों में छिपे हुए हैं। इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई 'बटालियन 1' के पास है। इस बटालियन का नाम कई बड़े हमलों से जुड़ा रहा है, जिनमें 2010 में ताड़मेतला (सुकमा) में हुए हमले में 76 CRPF जवानों की हत्या शामिल है।
दरअसल कर्रेंगुट्टा की पहाड़ियां नक्सलियों के रणनीतिक महत्व के लिए बेहद महत्तवपूर्ण है यह क्षेत्र कठिन पहाड़ी भूगोल, गर्म और उमस भरे मौसम, और अंतर्राज्यीय सीमा के फैलाव के कारण अन्य अभियानों की तुलना में अलग है। आमतौर पर नक्सल विरोधी अभियानों की अवधि कुछ हफ्तों की होती है, लेकिन यह अभियान लंबा चल सकता है।
नक्सलियों के लिए कर्रेंगुट्टा की ये खड़ी पहाड़ियाँ एक सुरक्षित शरणस्थली बन चुकी हैं। यहां की चट्टानी पहाड़ियाँ, गुफाएँ, और उबड़-खाबड़ भू-आकृति उनके लिए एक मजबूत किले की तरह काम करती हैं। इसके अलावा, यहां अनेक प्राकृतिक जल स्रोत हैं जो माओवादियों को जल संकट से बचाते हैं।
Karregutta hills पर IEDs और स्नाइपर्स की आशंका
पूर्व छत्तीसगढ़ DGP आर. के. विज ने मीडिया से बातचीत में बताया कि "बटालियन 1 पहाड़ियों की ऊँचाई पर प्रमुख स्थानों पर काबिज है। उन्होंने चारों ओर IEDs बिछा रखे होंगे और संभवतः स्नाइपर्स भी तैनात होंगे। ऐसे में सुरक्षाबलों को बहुत सोच-समझकर और रणनीति के तहत आगे बढ़ना होगा।"
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस क्षेत्र में जिन माओवादी नेताओं की मौजूदगी है, उनमें केंद्रीय समिति के सदस्य पुल्लूरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्ना और सुजाता, PLGA प्रमुख बर्से देवा, दक्षिण बस्तर के सैन्य कमांडर मड़वी हिडमा, दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य सन्नू और तेलंगाना राज्य समिति के सदस्य दामोदर शामिल हैं।
Mission Sankalp में सुरक्षा बलों के सामने भीषण गर्मी है चुनौती
इस अभियान में एक और बड़ी चुनौती है-भीषण गर्मी। एक अधिकारी ने पुष्टि की कि सुरक्षाबलों को डिहाइड्रेशन की समस्या से जूझना पड़ रहा है, जबकि माओवादियों को पहाड़ियों में स्थित प्राकृतिक झरनों से जल की कोई कमी नहीं है। हालांकि, एक बड़ी राहत यह है कि इन पहाड़ियों में कोई स्थायी नागरिक आबादी नहीं है। "इससे यह सुनिश्चित होता है कि आम नागरिकों को नुकसान नहीं पहुंचेगा," एक अधिकारी ने कहा।
Mission Sankalp आतंक का अंत ही असली उद्देश्य: IG सुंदरराज
IG सुंदरराज ने कहा, "नक्सल विरोधी अभियानों का उद्देश्य केवल माओवादियों की हत्या या हथियार बरामद करना नहीं है। हमारा मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र को प्रतिबंधित माओवादी संगठन की कैद से मुक्त कराना है।"
उन्होंने यह भी बताया कि नक्सलियों ने इस इलाके में अनेक IEDs लगाकर स्थानीय आदिवासी जनता को चेतावनी दी थी कि वे इस क्षेत्र में न जाएं। "30 मार्च को एक मासूम आदिवासी महिला सुशीला सोड़ी की एक IED विस्फोट में मौत हो गई जब वह मवेशियों को चराने के लिए पहाड़ियों के पास गई थी।"
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