महाशिवरात्रि 2022: छत्तीसगढ़ में विराजे हैं गंधेश्वर महादेव, 2000 साल पुराने शिवलिंग से आती है तुलसी की सुगंध

महासमुंद,01 मार्च। महाशिवरात्रि के अवसर पर आज हम आपको एक ऐसे शिवलिंग के बारे में बताने जा रहे हैं,जिससे तुलसी की सुगंध आती है। सुनने में थोड़ा अचरजपूर्ण जरूर है,लेकिन यह सच है। तुलसी की सुगंध आने के कारण ही भगवान शिव के इस रूप को गंधेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। गंधेश्वर महादेव का मंदिर छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पड़ने वाली प्राचीन नगरी सिरपुर में स्थित है। माना जाता है कि इसकी स्थापना महाभारत के प्रसिद्ध चरित्र बाणासुर ने की थी।

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    महाभारत काल में बाणासुर की नगरी थी सिरपुर

    महाभारत काल में बाणासुर की नगरी थी सिरपुर

    गंधेश्वर महादेव के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से सालभर लोग सिरपुर पहुंचते हैं। आठवीं शताब्दी का यह मंदिर अपने धार्मिक और पौराणिक महत्त्व के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता हैं,इसलिए इसे विश्व धरोहर के तौर पर चिन्हांकित किया गया है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की सिरपुर नगरी को महाभारत काल में बाणासुर की नगरी माना जाता है। माना जाता है कि बाणासुर ने ही सिरपुर में भगवान शिव का यह लिंग स्थापित किया था। महाभारत में बताया गया है कि असुरराज बाणासुर भगवान शिव के परम भक्त थे,उन्हें शिवजी से रक्षा का वरदान प्राप्त था। सिरपुर के गंधेश्‍वर महादेव का शिविलिंग लगभग 2 हजार साल पुराना बताया जाता है।

    शिवलिंग से आती है तुलसी के पत्तों सी सुगंध

    शिवलिंग से आती है तुलसी के पत्तों सी सुगंध

    अचरजपूर्ण बात है कि गंधेश्वर महादेव के इस शिवलिंग से तुलसी के पत्तों सी सुगंध आती है। जब कोई व्यक्ति मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करता है,तभी उसे तुलसी की खुशबु महसूस होने लगती है। शिवलिंग को स्पर्श करने के बाद भी हाथों से तुलसी की सुगंध आने लगती है। इस शिवलिंग को लेकर कई बार शोध भी किये जा चुके हैं,लेकिन आस्था और मान्यताएं तर्कों के आगे हमेशा जीत जाती हैं। माना जाता है कि महानदी के तट पर स्थित भगवान गंधेश्वर महादेव के शिवलिंग के दर्शन करने मात्र से जीवन के संकट कट जाते हैं।मान्यता है कि गंधेश्‍वर शिवलिंग को द्वादश ज्योतिर्लिंगों के पत्थर से बनाया गया था।


    मंदिर के पुजारी नंदाचार्य दुबे बताते हैं कि सिरपुर नगरी 8वीं शताब्दी में बाणासुर की विरासत थी, शिव के उपासक बाणासुर भगवान शिव की पूजा के लिए काशी जाते थे ,तो हर बार वहां से एक शिवलिंग साथ में ले आते थे, एक बार स्वयं भगवान भोलेनाथ ने बाणासुर को दर्शन देकर कहा कि अब तुम्हे काशी आने की आवश्यकता नहीं है, मै स्वयं सिरपुर में ही स्थापित हो रहा हूँ, बाणासुर अचरज में पड़ गए ,क्योंकि उन्होंने सिरपुर में कई शिवलिंग स्थापित कर रखे थे, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि भगवान शिव किस शिवलिंग में आकर स्थापित हो जायेंगे, तब भगवान शिव ने बाणासुर से कहा कि जिस भी शिवलिंग से तुम्हे गंध आये,उस शिवलिंग का पूजन करो।

    आदिकाल से स्थित हैं गंधेश्वर महादेव

    आदिकाल से स्थित हैं गंधेश्वर महादेव

    पुरातत्व विभाग के गाइड सत्यप्रकाश ओझा का मत है कि गंधेश्वर महादेव का शिवलिंग पुरातत्व विभाग की खुदाई की वजह से सामने नहीं आया है,यह आदिकाल से ही यहां स्थित है। सिरपुर क्षेत्र में पुरात्तव विभाग को खुदाई के दौरान कई शिवलिंग मिले थे,लेकिन गंधेश्वर शिवलिंग को छोड़कर ,अन्य किसी में तुलसी या किसी अन्य प्रकार की खुशबु नहीं आती है।पुरातत्व विभाग अभी भी सिरपुर में खुदाई कर रहा है। विशेषज्ञों को लगता है कि इस क्षेत्र में एक अलग ही सभ्यता दबी हुई है, जो प्राचीनकाल में वैज्ञानिक तौर पर काफी विकसित रही होगी।शोध में माना गया है कि महानदी के किनारे होने के कारण हजारों साल पहले किसी भूकंप के कारण यहां नगरी प्रभावित हुई रही होगी।

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